पूरे देश में आज दशहरे (Dussehra 2021) का त्योहार मनाया जा रहा है. आज ही के दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था. भारत में इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत की तरह देखा जाता है. इससे लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने की सीख मिलती है लेकिन हर कहानी को दो पहलुओं की तरह इस कहानी का भी एक दूसरा हिस्सा है. लंकाधिपति रावण को लेकर श्रीलंका (Sri Lanka) के लोगों की राय दूसरी है. वहां के लोग रावण को पूजते तो नहीं है लेकिन उसे एक शक्तिशाली योद्धा और हीरो की तरह देखते हैं. यहां तक कि श्रीलंका ने अपनी एक सेटेलाइट का नाम भी रावण के नाम पर रखा है.
श्रीलंका में रूढ़िवादी सिंहल-बौद्ध धर्म के लोग बहुसंख्यक हैं. ये लोग लंबे समय से श्री वाल्मीकि के महाकाव्य रामायण में रावण के चित्रण से असहज रहे हैं. इस समुदाय में एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जिन्हें एक गौरवशाली अतीत की चाह रही है और जो रावण को महान आदर्शों और मूल्यों वाले सिंहली राजा के तौर पर भी देखना चाहता है. एक ऐसा वर्ग जो मानता है कि रावण सिर्फ इसलिए पराजित हुआ था क्योंकि उसके षड्यंत्रकारी भाई विभीषण ने श्रीराम की मदद कर दी थी.
1980 के दशक में रावण को एक राष्ट्रीय नायक के तौर पर ढालने की कोशिशें काफी तेज होनी शुरू हुई थीं जब श्रीलंका में गृहयुद्ध जैसे हालात के बीच भारतीय सेना ने इस देश में एंट्री ली थी जिसे कुछ लोगों ने श्रीलंका के आंतरिक संघर्ष में हस्तक्षेप के तौर पर भी देखा था. भारत की सेना ने श्रीलंका में कदम रखा था तो श्रीलंका के संगठन जनता विमुक्ति पेरामुना ने उन्हें बंदर सेना कहते हुए पोस्टर चिपकाए थे. श्रीलंका के अपने पहले सैटेलाइट का नाम रावण रखने के साथ ही इस पौराणिक राजा का राजनीतिक प्रतीक के तौर पर रूपांतरण पूरा हो गया.
रावण को नायक की तरह देखने के पीछे और भी कई कारण हैं-
शिक्षा और युद्ध में निपुण रावण- रावण के पिता महान ऋषि विश्रवा और उनकी मां कैकेसी से थी. ऋषि विश्रवा सप्तर्षियों में से एक थे. बेहद सम्मानित परिवार में जन्म लेने के कारण रावण शिक्षा और युद्ध दोनों मामलों में बहुत निपुण था. रावण के दस सिर थे जिसे ज्ञान का उपहार माना जाता था. रावण को हर मामले में विशेषज्ञता हासिल थी. तर्क-वितर्क में आगे रहने वाले रावण को प्रशासन का गहरा ज्ञान था.
महान वैद्य था रावण- पुराणों के अनुसार, रावण एक महान वैद्य था. आयुर्वेद में ऐसी सात पुस्तकें हैं जिनकी रचना आज भी रावण के नाम पर है, जिससे पता चलता है कि रावण एक ज्ञानी वैद्य था. ऐसा कहा जाता है कि रावण ने अपनी पत्नी के अनुरोध पर छोटे बच्चों के लिए आयुर्वेदिक उपचार पर एक पुस्तक लिखी थी. चिकित्सा हो या विज्ञान रावण का को हर क्षेत्र में महारत हासिल थी.
तकनीक का ज्ञान- रावण की तरह उसके पुष्पक विमान की भी रामायण में बहुत चर्चा है. पुष्पक विमान में ही रावण ने सीता का हरण किया था. पौराणिक कथाओं के अनुसार, पुष्पक विमान का अविष्कार खुद रावण ने ही किया था. रावण नई-नई तकनीक को जानने में दिलचस्पी रखता था अपने अनोखे विचार से नई-नई चीजें बनाता था.
शिव का परम भक्त- रावण भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था. शिव को उन्हें प्रसन्न करने के लिए रावण ने कड़ी साधना की थी. भले ही रावण राक्षण की योनि में आता हो लेकिन उसकी भक्ति बिल्कुल सच्ची थी. यही वजह थी कि भगवान शिव भी उससे प्रभावित हो गए थे. शिव ने रावण को दिव्य हथियारों का उपयोग करने की शक्ति प्रदान की थी.
रावण को सही मानते हैं श्रीलंका के लोग- रावण और भगवान राम के बीच युद्ध की शुरुआत को लेकर भी श्रीलंका के लोगों की अलग राय है. भारत के लोगों का मानना है कि अगर रावण ने सीता का हरण नहीं किया होता तो राम के साथ युद्ध की स्थिति कभी नहीं आती. वहीं, श्रीलंका के लोगों का मानना है कि युद्ध के पीछे की असली वजह लक्ष्मण द्वारा शूर्पनखा की नाक काटना था. इन लोगों का मानना है कि रावण ने वही किया जो एक बड़ा भाई अपनी छोटी बहन का बदला लेने के लिए करता.
महान राजा के गुण- श्रीलंका के लोग रावण को भगवान के रूप में नहीं पूजते हैं, लेकिन वो उसे एक महान राजा मानते हैं. इन लोगों के लिए रावण एक ऐसा राजा था जिसने आक्रमणकारियों का विरोध किया. बहन के सम्मान का बदला लेने की कोशिश में उसे अपने ही भाइयों से धोखा मिला. श्रीलंका के लोगों के लिए रावण एक ऐसा राजा था जिसे ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त था.
श्रीलंका के लोग रावण के लिए कोई त्योहार नहीं मनाते हैं और न ही उसके नाम पर यहां कोई मंदिर हैं. ये लोग रावण को एक ऐसे महान शासक के रूप में देखते हैं जिसे अपनों से धोखा मिला और उसका दुखद अंत हुआ.