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काशी विश्वनाथ मंदिर का हिस्सा बना ज्ञानवापी कूप, जानें इसका इतिहास और महत्व

पहले जो लोग बाबा के धाम में आते थे, वो कूप का दर्शन भी करते थे. लेकिन बाहर से आने वाले और कूप के महत्व से अपरिचित लोग बाबा का जलार्चन करके ही बाहर निकल जाते थे. ऐसे में वे ज्ञानवापी कूप का दर्शन नहीं कर पाते थे.

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काशी विश्वनाथ मंदिर का हिस्सा बना ज्ञानवापी कूप, जानें इसका इतिहास और खासियत
काशी विश्वनाथ मंदिर का हिस्सा बना ज्ञानवापी कूप, जानें इसका इतिहास और खासियत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नए सिरे से लोगों के सामने आया ज्ञानवापी कूप
  • ज्ञानवापी कूप मंदिर के सर्किल में शामिल

धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत समेटे वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ का भव्य स्वरूप आज लोगों के सामने आ रहा है. पवित्र धाम के पुनर्निर्माण के साथ ही ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व का ज्ञानवापी कूप (ज्ञान का कुआं) भी नए रूप में लोगों के सामने आ गया है.

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पहले जो लोग बाबा के धाम आते थे, वे कूप का भी दर्शन करते थे. लेकिन कूप के महत्व से अपरिचित लोग बाबा का जलार्चन करके ही बाहर निकल जाते थे. उन्हें ज्ञानवापी कूप के दर्शन नहीं होते थे. अब नई भव्य निर्माण योजना में ज्ञानवापी कूप को शामिल कर इसे मंदिर के सर्किल में शामिल किया गया है ताकि मंदिर में भगवान शिव के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं को इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व पता चल सके.

अविमुक्तेश्वर, विश्वेश्वर और ज्ञानवापी सबसे प्राचीन
मत्स्य पुराण में विश्वनाथ मंदिर का वर्णन मिलता है. इसमें अविमुक्तेश्वर, विश्वेश्वर और ज्ञानवापी का उल्लेख किया गया है. इसके बाद स्कंदपुराण के काशी खंड में इसका विस्तार है. ज्ञानवापी कूप विश्वेश्वर (विश्वनाथ) का ऐसा अभिन्न अंश है जो काशी का केन्द्र माना गया है. 5 लाख सक्वायर फीट में धाम के निर्माण के बाद ज्ञानवापी कूप बाबा के मंदिर का हिस्सा बन गया है. अब यहां आने वाला हर शख्स इस कूप के दर्शन भी कर सकेगा. इसे मंदिर के मुख्य हिस्से में शामिल किया गया है.

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ऐसा कहा जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब के आदेश से आक्रमण के बाद मंदिर के अर्चक शिवलिंग लेकर इसी कूप में कूदे थे. इसके बाद जब मंदिर का निर्माण हुआ तो ये मुख्य सर्किल से बाहर हो गया. इतिहासकार इसके धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताते हैं. इसी कूप के जल से संकल्प होता है. इतिहासकार राणा पीवी सिंह के मुताबिक, ज्ञानवापी कूप के जल से ही संकल्प लेना और संकल्प छुड़ाना दोनों कार्य होते हैं. यही शास्त्र सम्मत है. विश्वनाथ के दरबार में ये पूरी क्रिया ज्ञानवापी पर ही होगी. ज्ञानवापी का जल ग्रहण करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है.

काशी का केन्द्र है ज्ञानवापी कूप
नए निर्माण के बाद काशी आने वाले लोग ज्ञानवापी के वैभव से परिचित हो पाएंगे. राणा पीवी सिंह ज्ञानवापी कूप के बारे में बताते हुए कहते हैं कि ज्ञानवापी काशी का नाभि केन्द्र है. समय के साथ इसके महत्व को आम लोगों के बीच नहीं लाया जा सका. अब ये फिर से उसी वैभव के साथ सामने आ गया है, जो इस निर्माण की सर्वाधिक महत्वपूर्ण बातों में से एक है.

 

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