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Laddu Holi 2021: बरसाने में जमकर खेली गई लड्डू होली, कोरोना से बेखौफ दिखे श्रद्धालु

इस दिन नंदगांव के हुरियारों को न्यौता देकर पांडा बरसाना लौटता है, जिसका सभी लड्डू फेंककर स्वागत करते हैं. हालांकि इस बार कोरोना वायरस के चलते भी श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई.

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Photo Credit: Getty Images (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Photo Credit: Getty Images (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं
  • श्रद्धालु ब्रज में जमकर राधा रानी और कान्हा की करुणा बटोर रहे

बरसाना के प्रमुख श्रीजी मंदिर में सोमवार को बड़े ही धूम-धाम से लड्डू होली खेली गई. बरसाना की लट्ठमार होली से ठीक एक दिन पहले खेली जाने वाली इस लड्डू होली का बृज में विशेष महत्त्व है. इस दिन नंदगांव के हुरियारों को न्यौता देकर पांडा बरसाना लौटता है, जिसका सभी लड्डू फेंककर स्वागत करते हैं. हालांकि इस बार कोरोना वायरस के चलते भी श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई. कोरोना संकट में भी श्रद्धालु ब्रज में जमकर राधा रानी और कान्हा की करुणा बटोर रहे हैं. उनमें कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है.

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बृज में लट्ठमार होली की परम्परा बेहद प्राचीन है और बरसाना को इसका केंद्र माना जाता है. बरसाने की लट्ठमार होली के विश्व प्रसिद्ध होने की वजह है इसका परंपरागत स्वरूप. बरसाने की हुरियारिनो से होली खेलने के लिए नंदगांव के हुरियारे आते हैं और इसके लिए बाकायदा एक दूत न्यौता देने नंदगांव पहुंचता है. इस दूत को यहां पांडा कहा जाता है और जब ये पांडा लौटकर बरसाने के प्रमुख श्रीजी मंदिर पहुंचता है तो यहां मंदिर में सभी गोस्वामी इकठ्ठा होकर उसका स्वागत करते है और बधाई स्वरूप पांडा पर लड्डू फेंकते हैं.

इसके बाद मंदिर प्रांगण में मौजूद भक्त भी पांडा के ऊपर लड्डू फेंकते हैं, जिसे हम सभी लड्डू होली के नाम से जानते हैं. इस होली में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से भक्त बरसाना पहुंचते हैं और लड्डू होली का आनंद उठाते हैं. होली को लेकर जिला अधिकारी मथुरा नवनीत सिंह चहल से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कोरोना वायरस के चलते तमाम एहतियात बरते जा रहे हैं. हम लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे मास्क लगाकर आएं.

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बरसाने के लाडली मंदिर में भी लड्डू होली खेली गई. इसे देखने  के लिए लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़े, जिसमें श्रद्धालु पर पहले से राधारानी मंदिर के सेवायत द्वारा लड्डू  फेंककर होली की शुरुआत की जाती है. इसके बाद श्रद्धालु अपने साथ लाए लड्डू  एक-दूसरे पर मारकर  होली का आनंद लेते हैं और नाचते-गाते हैं,  गुलाल उड़ाते है, होली के रंग में रंग जाते हैं.

एक तरफ ब्रज में होली के लिए आने वाले श्रदालु अपने को सौभाग्यशाली मान रहे हैं तो वही कान्हा के संग मयूर लीला का मंचन करने वाले कलाकार भी ब्रज में अपनी प्रस्तुति को अपने लिए सौभाग्य का पल बताते है. श्रद्धालुओं का कहना है कि बरसाना में राधा-कृष्ण के प्रेम की बरसात हो रही है और कोरोना उनका कुछ नही  बिगाड़ सकता.

 

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