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Palmistry: इस उंगली के नीचे हो खड़ी रेखा तो खूब होता है नाम, सफलता खुद चूमेगी कदम

हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक, हथेली में एक खास रेखा ये बताती है कि व्यक्ति को जीवन में कितना नाम और यश मिलेगा. जिन लोगों के हाथों पर ये रेखा होती है, प्रसिद्धि खुद आकर उनके कदम चूमती है. आइए आज आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं.

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हाथ की इस उंगली के नीचे हो ऐसा निशान तो इंसान को मिलता है खूब नेम-फेम
हाथ की इस उंगली के नीचे हो ऐसा निशान तो इंसान को मिलता है खूब नेम-फेम
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हथेली पर कुछ निशानों का बनना होता है लकी
  • सूर्य पर्वत पर रेखा का बनना बेहद शुभ
  • लकी-अनलकी निशानों से करें भविष्य का पता

आपने ऐसे कई लोगों को जानते होंगे जिन्हें जीवन में बहुत ज्यादा नेम और फेम मिलता है. हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक, हथेली में एक खास रेखा ये बताती है कि व्यक्ति को जीवन में कितना नाम और यश मिलेगा. जिन लोगों के हाथों पर ये रेखा होती है, प्रसिद्धि खुद आकर उनके कदम चूमती है. आइए आज आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं.

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हथेली पर सूर्य पर्वत
हाथ में अनामिका अंगुली (रिंग फिंगर) के नीचे का स्थान सूर्य पर्वत का होता है. इस जगह से कुंडली में सूर्य की स्थिति देखी जाती है. इसी स्थान से पता चलता है कि व्यक्ति को जीवन में कितना नाम और यश मिलेगा. व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य का पता भी इसी पर्वत से लगाया जा सकता है.

नेम-फेम के बारे में कैसे जानें?
अनामिका अंगुली के नीचे इस पर्वत का उठा होना हमेशा लाभकारी माना जाता है. अगर ऐसा हो तो व्यक्ति को जीवन में खूब मान-सम्मान मिलता है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इस पर्वत पर एक सीधी रेखा हो तो राजकीय सेवा के बेहतर योग बनते हैं. पर्वत पर दोहरी रेखा व्यक्ति विशेष की उन्नति का संकेत देती है. ऐसे लोग जीवन में सर्वोच्च ऊंचाइयों पर पहुंचते हैं.

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पर्वत पर अल-अलग चिन्हों का अर्थ
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, अगर इस पर्वत पर तिल हो तो इंसान को बहुत बदनामी मिल सकती है. पर्वत पर वलय हो तो व्यक्ति को जीवन में संघर्ष करना पड़ता है. साथ ही स्वास्थ्य की समस्याएं भी हो जाती हैं. इस पर क्रॉस का होना भी अच्छा नहीं है. इस पर्वत पर त्रिभुज हो तो व्यक्ति की शोहरत बढ़ती है. इससे व्यक्ति को अपार नाम और यश मिलता है.

सूर्य पर्वत खराब हो तो क्या करें?
अगर हथेली पर सूर्य पर्वत खराब अवस्था में हो तो प्रातःकाल अपनी दोनों हथेलियों को जरूर देखें. अनामिका अंगुली से कंठ पर तिलक लगाएं.च. अनामिका अंगुली में तांबे का छल्ला धारण करें. नित्य प्रातः 108 बार गायत्री मंत्र का जप करें. एक रक्तमणि (गार्नेट) जरूर धारण करें.

 

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