Mangla Gauri Vrat 2023: भगवान शिव को समर्पित सावन के महीने में हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखने का विधान है. इस दिन मां पार्वती के मंगल स्वरूप की पूजा की जाती है. इस दिन मंगला गौरी का व्रत रखकर उनकी विधिवत पूजा से जीवन के सारे संकट मिट जाते हैं. इस साल अधिक मास के चलते सावन का महीना 59 दिन का हो गया है. आज सावन का छठा मंगलवार है. आइए आपको मंगला गौरी व्रत की पूजन विधि और चमत्कारी मंत्रों के बारे में बताते हैं.
मंगला गौरी व्रत का महत्व
ज्योतिषियों की मानें तो मंगला गौरी व्रत का संकल्प लेने से जीवन में खुशहाली और घर में सुख-समृद्धि आती है. सावन के सभी मंगलवार को मंगला गौरी की उपासना करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है. ऐसे साधकों के देवी सारे विघ्न हर लेती हैं. इनकी उपासना से अविवाहित युवतियों के विवाह में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं और मनचाहे वर की प्राप्ति होती है.
मंगला गौरी व्रत करने की विधि
मंगला गौरी व्रत का संकल्प लेने वाले ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें. स्नानादि के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें. इस व्रत में एक ही समय अन्न ग्रहण करके पूरे दिन माता पार्वती की आराधना की जाती है. मां मंगला गौरी (पार्वतीजी) का एक चित्र अथवा प्रतिमा लें. फिर 'मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये’ इस मंत्र के साथ व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए.
इसके बाद शिवालय या घर मंदिर जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें. शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा पर जल अर्पित करें. फिर देवी को कुमकुम, अक्षत, फल और फूल सहित 16 श्रृंगार अर्पित करें. इसके बाद देवी पार्वती से हाथ जोड़कर सुख-संपन्नता की प्रार्थना करें. मंगला गौरी व्रत का पारण अगले दिन यानी बुधवार सुबह करें.
मां मंगला गौरी के चमत्कारी मंत्र
1. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके। शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
2. कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
3. ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा।