हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाता है. इस बार मासिक दुर्गाष्टमी आज यानी 29 जनवरी 2023 रविवार के दिन है. मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा की उपासना की जाती है. जिस प्रकार चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है उसी प्रकार अष्टमी तिथि मां दुर्गा की उपासना का दिन होता है. देवी दुर्गा की उपासना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस साल 21 जनवरी से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हुई थी. ऐसे में 29 जनवरी को दुर्गाष्टमी है.
दुर्गाष्टमी शुभ मुहूर्त (Masik Durgashtam Shubh Muhurat)
माघ, शुक्ल अष्टमी
प्रारम्भ - जनवरी 28, सुबह 08 बजकर 43 मिनट से शुरू
समाप्त - जनवरी 29, सुबह 09 बजकर 05मिनट पर खत्म
दुर्गाष्टमी पूजा विधि (Masik Durgashtam Puja Vidhi)
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और फिर पूजा के स्थान पर गंगाजल छिड़क कर शुद्धि कर लें. इसके बाद घर के मंदिर में दीप जलाएं. मां दुर्गा का गंगाजल से अभिषेक करें. इसके बाद मां को अक्षत, सिंदूर, लाल फूल अर्पित करें फिर प्रसाद के तौर पर फल और मिठाई चढ़ाएं. इसके बाद दीये और धूप को जलाएं और मां दुर्गा की पूजा और आरती करें.
दुर्गाष्टमी कथा (Masik Durgashtam Katha)
शास्त्रों के अनुसार, सदियों पहले पृथ्वी पर असुर बहुत शक्तिशाली हो गए थे और वे स्वर्ग पर चढ़ाई करने लगे. उन्होंने कई देवताओं को मार डाला और स्वर्ग में तबाही मचा दी. इन सबमें सबसे शक्तिशाली असुर महिषासुर था. भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा ने शक्ति स्वरूप देवी दुर्गा को बनाया. हर देवता ने देवी दुर्गा को विशेष हथियार प्रदान किया. इसके बाद आदिशक्ति दुर्गा ने पृथ्वी पर आकर असुरों का वध किया. मां दुर्गा ने महिषासुर की सेना के साथ युद्ध किया और अंत में उसे मार दिया. उस दिन से दुर्गाष्टमी का पर्व प्रारम्भ हुआ.
मां दुर्गा की आरती (Maa Durga Aarti)
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी.
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को.
उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै.
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी.
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती.
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती.
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे.
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी.
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ.
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता.
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी
भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी.
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी
कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती..
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै.
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी
मासिक दुर्गाष्टमी के दिन इन नियमों का करें पालन (Masik Durgashtami Niyam)
इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
इस दिन मांस, मदिरा या प्याज-लहसुन वाला भोजन नहीं करना चाहिए.
व्रत के दिन व्यक्ति को झूठ नहीं बोलना चाहिए और ना ही किसी को अपशब्द बोलने चाहिए.
व्रत के दिन बार-बार पानी पीने और गुटका, सिगरेट आदि का सेवन करने से बचना चाहिए.