Shardiya Navratri 2021: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 7 अक्टूबर से हो चुकी है. शुभ मुहूर्त में घटस्थापना के साथ पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है और कलश के सामने जौ को मिट्टी के पात्र में बोया जाता है और इसका पूजन भी किया जाता है. आखिर नवरात्रि में जौ बोने का क्या महत्व है और इसका पूजन क्यों किया जाता है, आइये बताते हैं....
सृष्टि की पहली फसल
ज्योतिर्विद करिश्मा कौशिक ने बताया कि नवरात्रि में सृष्टि की शुरुआत में सबसे पहली फसल जौ की ही थी. जौ को पूर्ण फसल भी कही जाती है. जौ बोने का मुख्य कारण है कि अन्न ब्रह्म है, इसलिए अन्न का सम्मान करना चाहिए. नवरात्रि की पूजा में केवल जौ बोने का ही महत्व नहीं है, बल्कि यह कितनी तेजी के साथ बढ़ता है, ये भी अहम होता है. नौ दिनों में जौ कितनी तेजी से उगते हैं या नहीं उगते हैं. इसके बढ़ने की गति कितनी रहती है. ये सभी बातें हमारे आने वाले साल का भविष्य भी बताती हैं.
ऐसे मिलते हैं शुभ-अशुभ संकेत
यदि जौ बोये हैं और वे किसी कारण उग नहीं पाई हैं, तो ये संकेत देती है कि आने वाले साल में धनहानि होगी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होगी. यदि बोने के तीन दिन में जौ उगने लग जाती हैं और छह दिन में अच्छी और हरी हो जाती हैं, तो ये शुभ हैं और संकेत देती हैं कि आने वाले साल में आपको धनलाभ होगा, और जो बच्चे विवाह योग्य हैं, उनके विवाह में आने वाली रुकावटें दूर होंगी. इसके अलावा ये बताता है कि आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा.
वहीं जब जौ उग रहे होते हैं और उसकी जड़ों के पास आपको सफेदी दिखाई देती है, यानि ये लाइट ग्रीन कलर में बढ़ते हुए दिखाई दें, तो ये संकेत देता है कि शुरुआती साल कष्ट में रहेगा, लेकिन धीरे-धीरे आपके जीवन की परेशानियां कम होती चली जाएंगी. सातवें और आठवें दिन जौ उगकर नीचे की ओर झुकने लगती हैं, तो ये दर्शाता है कि शुरुआती साल तो अच्छा रहेगा, लेकिन साल के अंतिम समय में आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, आपका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है. अगर जौ काले रंग के टेढ़े–मेढ़े उगते हैं तो अशुभ माना जाता है. अगर जौ घनी और हरी उगती है तो पूरा वर्ष अच्छा बीतने का संकेत मिलता है.