बेसमेंट यानी तहखानों का निर्माण व्यावसायिक स्थानों के साथ ही अब घरों में भी बड़े पैमाने पर होने लगा है. वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार घर या भवन के बेसमेंट का इस्तेमाल सावधानियों के साथ करना चाहिए जिससे आर्थिक तंगी समेत कई परेशानियों का सामना ना करना पड़े. आइए जानते हैं अगर घर में बेसमेंट (Basement) बनाने का विचार है तो किन खास बातों का ध्यान रखना चाहिए.
वास्तु में नियम सूर्य की किरणों और ऊर्जा के आधार पर बनाए गए हैं. सूर्य की प्राकृतिक रोशनी ना पहुंच पाने की वजह से बेसमेंट ना बनाने का सुझाव दिया जाता है.
बेसमेंट पर पूरे घर-भवन की नींव होती है. वास्तु के अनुसार, बेसमेंट का प्रवेश द्वार हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए. अन्यथा नकारात्मकता (Negativity) रहेगी तो इसका व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर पड़ेगा. वहीं, नेगेटिव एनर्जी दूर होने से आर्थिक तंगी समेत कई परेशानियों से निजात मिलती है.
बेसमेंट के अंदर गुलाबी या हरे रंग का पेंट करवाना अच्छा माना जाता है. जबकि काला और लाल रंग करवाने से हमेशा बचना चाहिए. सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) के स्तर को बढ़ाने के लिए बेसमेंट में सफेद या हल्के गुलाबी रंग का पेंट होना चाहिए.
-बेसमेंट की सीलिंग 9 से 10 फीट ऊंची बनवाएं. साथ ही ऊपर की तरफ पूर्व दिशा में खिड़कियां बनवाएं, जिससे रोशनी एवं हवा का प्रवाह बना रहे.
-बेसमेंट की दक्षिण पश्चिम दिशा का उपयोग भारी सामान के स्टोरेज के रूप में किया जाना चाहिए.
-उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम भाग नौकरों के रहने या कार पार्किंग के लिए उपयोग किया जाना चाहिए.
-वास्तु के अनुसार बेसमेंट में आने-जाने के लिए सीढ़ियां ईशान कोण या पूर्व दिशा से शुभ मानी जाती हैं.