वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार लिविंग रूम यानी बैठक घर का अहम हिस्सा होता है. लिविंग रूम देखकर लोग आपके वैभव, सम्पन्नता और मानसिकता का अंदाज़ा लगा सकते हैं. आम तौर पर लोग अपने लिविंग रूम की साज-सजावट का विशेष ध्यान रखते हैं लेकिन फिर भी अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां हो जाती हैं जिसका सीधा असर व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है. लिविंग रूम में वास्तु (Vastu) के नियमों का ध्यान रखकर कई तरह की परेशानियों से बचा जा सकता है.
वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार यदि मकान पूर्व या फिर उत्तरमुखी है तो बैठक यानी लिविंग रूम को पूर्वोत्तर दिशा अर्थात ईशान कोण में होना चाहिए. यदि मकान पश्चिममुखी है तो लिविंग रूम को उत्तर-पश्चिम दिशा अर्थात वायव्य कोण में होना चाहिए. इसके अलावा यदि मकान दक्षिण मुखी है तो बैठक को दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए.
लिविंग रूम के पूर्व या उत्तर दिशा में खिड़कियां होना बहुत लाभकारी माना जाता है. इस रूम की दीवारों का रंग सफेद, हल्का पीला, आसमानी या हल्का हरा होना चाहिए. लाल, गहरे नीले या तेज रंगों की दीवारें नहीं होनी चाहिए. साथ ही रूम में खिड़की और दरवाजे के पर्दे मिलते-जुलते रंगों में ही प्रयोग करें.
लिविंग रूम में हंस की तस्वीर लगाना सुख-समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है. वहीं, वैचारिक मतभेद से बचने के लिए हंसते-मुस्कुराते संयुक्त परिवार की फोटो लगाना लाभकारी है. आइए जानते हैं लिविंग रूम में वास्तु की किन छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है.