Vastu Tips: इस दिशा में हैं खिड़की-दरवाजे तो होगा नुकसान, ऐसे करें बचाव
अगर आपके घर और उसके अंदर की चीजों की दिशा ठीक न हो तो उसमें रहने वाले लोगों की दशा बिगड़ जाती है. कई बार प्रभाव इतना बुरा होता है कि लोग तो क्या घर के घर बर्बाद हो जाते हैं.
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Vastu Shastra Tips For Main Gate, Vastu For Window
- नई दिल्ली,
- 10 सितंबर 2020,
- (अपडेटेड 10 सितंबर 2020, 9:01 AM IST)
वास्तुशास्त्र में दिशा का सबसे ज्यादा महत्व माना गया है. अगर आपके घर और उसके अंदर की चीजों की दिशा ठीक न हो तो उसमें रहने वाले लोगों की दशा बिगड़ जाती है. कई बार प्रभाव इतना बुरा होता है कि लोग तो क्या घर के घर बर्बाद हो जाते हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि घर के खिड़की दरवाजों की सही दिशा क्या होती है. साथ ही अगर आपके घर में चीजों की दिशा ठीक नहीं है तो उस नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए क्या उपाय हो सकते हैं.
- दक्षिण-पश्चिम दिशा को 'नैऋत्य दिशा' भी कहते हैं. घर की इस दिशा में खुलापन नहीं होना चाहिए. यानी आपके घर की इस दिशा में खिड़की, दरवाजे नहीं होने चाहिए.
- ईश्वरीय शक्ति ईशान कोण से प्रवेश करती है और नैऋत्य कोण (पश्चिम-दक्षिण) से बाहर निकलती है. इसलिए अगर ये संभव न हो तो पश्चिम दिशा में मंदिर बनवा सकते हैं, लेकिन दक्षिण दिशा में मंदिर बनवाने से बचना चाहिए.
- दक्षिण-पश्चिम दिशा में घर के मालिक का कमरा रख सकते हैं. इसके अलावा अगर आपकी दुकान है तो इस दिशा में कैश काउंटर, मशीनें आदि रख सकते हैं.
- घर के दक्षिण पश्चिम दिशा में स्टोर रूम, मास्टर बेडरूम बनाया जा सकता है. इस दिशा को पितरों का स्थान भी माना जाता है.
- वास्तुशास्त्र के मुताबिक घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में हरे पौधे नहीं रखने चाहिए. वास्तु की दृष्टि से पौधों के लिए ये जगह अशुभ मानी जाती है. साथ ही इन दिशाओं में सूर्य की पर्याप्त रोशनी भी नहीं मिल पाती. अगर आप इन दिशाओं में पौधे रखते हैं तो आपको आर्थिक परेशानी होने का खतरा रहेगा.
- अगर आपके घर की दक्षिण पश्चिम दिशा में ज्यादा खिड़की और दरवाजे हैं तो भगवान हनुमान की मूर्ति इस तरह लगाए कि उनकी दृष्टि दक्षिण की दिशा में हमेशा पड़ती रहे. इससे आप खतरों से बच जाएंगे.
- घर का दक्षिण-पश्चिम कोना हमेशा भरा हुआ होना चाहिए. वास्तु के मुताबिक इस दिशा में भारी सामान रखना उचित माना जाता है, इससे राहु ग्रह को शांत रखने में मदद मिलती है.
- दक्षिण-पश्चिम दिशा में शौचालय नहीं होना चाहिए, ऐसा होना पितृ दोष भी माना जाता है. यही कारण है कि जिन घरों में दक्षिण-पश्चिम दिशा में शौचालय होते हैं उसमें राहु और पितृदोष के कारण हमेशा नकारात्मक ऊर्जा रहती है.