Vastu Tips: नवरात्रि में इस दिशा में करें मूर्ति की स्थापना, मिलेगी सफलता
नवरात्रि के दिनों में मूर्तियों की सही दिशा में स्थापना और विधिवत तरीके से पूजन आपको तरक्की की ऊंचाइयों पर ले जा सकता है, तो आइए जानते हैं कि इन नवरात्रों में किन मूर्तियों की स्थापना शुभ रहेगी और वास्तु के अनुसार किन उपायों से घर में खुशहाली बढ़ेगी...
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Vastu tips for Goddess Durga idol
- नई दिल्ली,
- 22 अक्टूबर 2020,
- (अपडेटेड 22 अक्टूबर 2020, 8:14 AM IST)
नवरात्रि के नौ दिनों में हम देवी के नौ रूपों का आह्वान करते हैं, घर में शक्ति का आह्वान करने से हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है. नवरात्रि के दिनों में मूर्तियों की सही दिशा में स्थापना और विधिवत तरीके से पूजन आपको तरक्की की ऊंचाइयों पर ले जा सकता है, तो आइए जानते हैं कि इन नवरात्रों में किन मूर्तियों की स्थापना शुभ रहेगी और वास्तु के अनुसार किन उपायों से घर में खुशहाली बढ़ेगी...
- देवी भगवती की प्रतिमा घर के उत्तर पूर्व की दिशा में स्थापित करें.
- पूजा घर या मंदिर में जहां भी आप प्रतिमा की स्थापना कर रहे हैं, उसके बाहर हल्दी या सिंदूर से स्वास्तिक का चिह्न जरूर बनाएं.
- घर में 3 इंच से बड़ी प्रतिमा नहीं रखनी चाहिए, साथ ही प्रतिमा का रंग या पूजा घर का रंग हल्का पीला, हरा या गुलाबी ही रखना चाहिए.
- अगर घर में खुशहाली नहीं रहती तो नवरात्र के 9 दिन घर में हवन जरूर कराएं जिसमें साधक का चेहरा पूर्व दिशा की ओर हो और हवन करा रहे आचार्य का चेहरा उत्तर की ओर होना चाहिए.
- घर में वास्तु दोष के निवारण के लिए नवमी और दशहरा वाले दिन 10 दीपक 10 दिशाओं में जलाने चाहिए.
- इन्हें दस दिग्पाल कहते हैं, इन दिशाओं और इनके देवताओं के नाम हैं- पूर्व में इंद्र, आग्नेय कोण में अग्निदेव, दक्षिण में यम, दक्षिण-पश्चिम में निऋति, पश्चिम में वरुण देव, वायव्य अर्थात उत्तर-पश्चिम में मारुत या वायु देव, उत्तर दिशा में कुबेर और उत्तर-पश्चिम में शिव.
- सनातन संस्कृति में इन 8 दिशाओं के अलावा 2 अन्य दिशाएं भी हैं, पहली दिशा आकाश की ओर है, यहां ब्रह्मा जी का आधिपत्य है, उनके नाम का दीप पूर्व व ईशान के बीच में जलाना चाहिए. अंतिम और दसवीं दिशा पाताल की ओर है, इसके अधिपति अनंत देव हैं, इनके नाम का दीपक दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम के बीच में जलाना चाहिए.
- नवरात्र में वातावरण को शुद्ध और पवित्र करने के लिए घर में गुग्गुल, लोबान, कपूर, देशी घी का प्रयोग करें.
- उत्तर-पूर्व दिशा में क्रिस्टल या पिरामिड जरूर रखें.
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