हरितालिका तीज सुहागनों के लिए सबसे उत्तम व्रत है. इस दिन शिव-पार्वती की संयुक्त उपासना से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. हरतालिका तीज व्रत भगवान शिव और मां पार्वती के पुनर्मिलन के पर्व के रूप में मनाया जाता है. इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और विवाह योग्य कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है. हरतालिका तीज का व्रत इस बार 21 अगस्त को रखा जा रहा है. आइए जानते हैं इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
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1. हरतालिका तीज की तृतीया तिथि ही में पूरे विधि-विधान से कार्य किए जाते
हैं. हरतालिका तीज प्रदोष काल में किया जाता है. सूर्यास्त के बाद के तीन
मुहूर्त को प्रदोष काल कहा जाता है. यह दिन और रात के मिलन का समय होता है.
चतुर्थ तिथि पूजा का कोई महत्व नहीं रह जाता. चतुर्थ तिथि में पारण किया
जाता है.
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2. इस व्रत में आपने एक बार जो नियम और संकल्प ले लिए, आगे भी उन्हीं नियमों और संकल्पों के साथ इस व्रत को रखना होगा. अगर आपने
पहले निर्जला ही यह व्रत रखा था तो हमेशा निर्जला ही व्रत रखें.
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हरतालिका तीज के व्रत में 24 घंटे की अवधि में जल, फल और अन्न का त्याग
करना पड़ता है. अगर आप किसी साल बीमार हैं या किसी वजह से इस व्रत को नहीं
कर रही हैं तो आपको उद्यापन करना होगा या अपनी सास और देवरानी को व्रत करने
के लिए कहना होगा.
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4. व्रत रखने वाली महिलाओं को इस दिन पूरे 16
श्रृंगार करने चाहिए. इसके बाद व्रत का पूरी श्रद्धा के साथ पालन करें.
हरतालिका तीज व्रत में जल ग्रहण नहीं किया जाता है. व्रत के बाद अगले दिन
जल ग्रहण करने का विधान है.
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5. हरतालिका तीज व्रत कुंवारी कन्या,
सौभाग्यवती स्त्रियां करती हैं. हरतालिका तीज व्रत के दिन रात्रि जागरण
करना जरूरी है. रात में भजन-कीर्तन करना चाहिए.
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6. हरतालिका तीज पर
सुहाग की पिटारी में सुहागिन की सारी वस्तुओं को रखकर माता पार्वती को
चढ़ाने की परंपरा होती है. साथ ही भगवान शिव शिव को धोती और अंगोछा अर्पित
किया जाता है.
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7. विधि-विधान से पूजा के बाद के बाद कथा सुनना ना
भूलें और रात्रि जागरण जरूर करें. आरती के बाद सुबह माता पार्वती को सिंदूर
चढ़ाएं व ककड़ी-हलवे का भोग लगाकर व्रत खोलें.