शनि जयंती आज मनाई जा रही है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, शनि देव यदि क्रोधित हो जाएं तो इंसान का जीवन दुखों से भर देते हैं. हालांकि राशिनुसार कुछ विशेष उपाय कर शनि देव की कृपा पाई जा सकती है. राशि गुण तत्व और प्रभाव अलग होते हैं. किस राशि वालों को शनि की कृपा पाने के लिए क्या उपाय करना चाहिए? इस बारे में बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य डॉ. अरुणेश कुमार शर्मा.
मेष- इस राशि का स्वभाव चर है. मस्तिष्क की प्रतिनिधि इस राशि के जातक शनि ग्रह को बौद्धिक प्रयासों से प्रसन्न करने पर जोर दें. शनि देव के मंत्रों का जाप करें. विधिपूर्वक समर्पण भाव से पूजा-अर्चना करें. शनि की अप्रसन्नता में जातकों को मतिभ्रम और मानसिक तनाक पैदा हो सकता है. इस राशि में स्वयं शनिदेव नीचत्व प्रभाव पाते हैं. सूर्य देव उच्चता को धारण करते हैं. शनिदेव के प्रभाव को संतुलित रखने के लिए इस राशि को वालों को निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए. मेष राशि के स्वामी मंगल देव होने के नाते हनुमान भक्ति से भी शनिदेव सहज होते हैं.
वृष- मुख-चेहरे की प्रतिनिधि इस राशि के जातकों को शनिदेव की असहजता से कलंक लगने का डर होता है. जातक को चेहरा छिपाने को मजबूर होना पड़ सकता है. हालांकि शुक्र-शनि की मित्रता इस राशि वालों को राहत देती है. शुक्र देव इस राशि के स्वामी हैं. शनिदेव की सहजता और प्रसन्नता की स्थिति में जातक खूब तरक्की भी करता है. भूमि, भवन, धन-धान्य, पशुधन और जन समर्थन को प्राप्त करता है. शनिदेव की शुभता के लिए उपलब्ध धन-धान्य में एक निश्चित अंश का दान करना चाहिए. शनिदेव की प्रिय वस्तुओं का दान करना चाहिए. इनमें चना, तिल, तेल, मसाले और अन्य विभिन्न प्रकार की दैनिक उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं.
मिथुन- शरीर में कंधों और छाती की प्रतिनिधित्वकर्ता इस राशि के जातकों को शनि की प्रसन्नता के लिए समाज में श्रेष्ठ विचारों का प्रचार करना चाहिए. शुभ कर्मों पर जोर देना चाहिए. कमजोर को सताना नहीं चाहिए. चालाकी और अनीति के प्रयोग से बचना चाहिए. सबसे प्रेमभाव रखना चाहिए. विशेषकर छोटों को भाई समान स्नेह देना चाहिए. सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए. कार्य व्यापार में बड़प्पन रखना चाहिए. विश्व कल्याण की भावना को बनाए रखकर आगे बढ़ना चाहिए. लोभ-लालच में नहीं पड़ना चाहिए. स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रखनी चाहिए.
कर्क- हृदय स्थान की प्रतिनिधि इस राशि के जातकों को व्यर्थ क्रोध और उच्च रक्तचाप से बचने के लिए शनिदेव के धैर्य धारण करने के गुण को आत्मसात करना चाहिए. विपरीत परिस्थितियों में संतुलित रहकर लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहना सीखना चाहिए. शनि की सहजता के लिए भक्तिभाव पर जोर देना चाहिए. आस्था और विश्वास को प्रबल रखना चाहिए. राशि स्वामी चंद्रमा सब पर शीतलता बरसाते हैं. ऐसे ही इस राशि वालों को सबके प्रति सेवा प्रेम और नेह का भाव रखना चाहिए. शनिदेव की सहजता के लिए मीठे से परहेज करना चाहिए. रुष्ट शनि की अवस्था में ऐसे जातक घोर शारीरिक कष्टों से जूझ सकते हैं. इसलिए जीवनभर अनुशासन अपनाए रहना चाहिए.
सिंह- देह में पेट भाग की प्रतिनिधि राशि है. ऐसे जातकों को गरीबों, कमजोरों को संरक्षण देना चाहिए और उनकी सबलता के लिए प्रयास करना चाहिए. उनके लिए भोजन का प्रबंध करना चाहिए. सिंह राशि के जातकों को समाज, सत्ता और आम लोगों का समर्थन शक्ति प्रदान करता है. इन सबके जुड़ाव के लिए ऊर्जा संरक्षण और पोषण ही सर्वश्रेष्ठ उपाय हो सकता है. असहज शनि की अवस्था में ये जातक कुपोषण, भूख न लगना या अतिभोजन की बीमारी जैसे रोगों से घिर सकते हैं. सामाजिक स्तर पर प्रभावहीनता और अकेलेपन को झेलने को मजबूर भी हो सकते हैं. जिम्मेदारियों से मुक्त किए जा सकते हैं. इन्हें अहंकार से बचकर विनम्र भाव बढ़ाना चाहिए.
कन्या- यह राशि कमर का प्रतिनिधित्व करती है. इस राशि के जातकों को शनि देव की सहजता के लिए धैर्य, अनुशासन और नियमित दिनचर्या पर जोर देना चाहिए. संबंधों में जिद और अतिवादी रवैये से बचना चाहिए. मित्रों और करीबियों की कमियों को छिपाए रखने पर जोर देना चाहिए. असहज शनि की स्थिति में इस राशि के जातक समय से पहले बूढ़े और तेज हीन दिखाई देने लगते हैं. स्मृति का ह्रास होने लगता है. औरों की नापसंदगी इन्हें घोर निराशा तक पहुंचा सकती है. इन्हें शनि की प्रिय वस्तुओं का दान भी करना चाहिए. इनमे विशेषकर दाल, मसाले और तेल शामिल हैं. भू तत्व की यह राशि भौतिक रूप से मदद करने पर जोर देने वाली है.
तुला- यह चर राशि है. पेडू, श्रोणि, वस्ति-प्रदेश का प्रतिनिधित्व करती है. शनि इस राशि में उच्चता प्राप्त करते हैं. पद-प्रतिष्ठा और मान-सम्मान इस राशि वालों को सर्वाधिक प्रिय होता है. जो शनि देव का भी मूल स्वभाव है. अत्यधिक संघर्ष के बाद शनिदेव ने देवताओं के मध्य प्रभावशाली स्थान अर्जित किया था. ऐसे जातकों को कभी कोई हल्की बात और व्यवहार नहीं करना चाहिए. अपनी भूमिका का पूरी ईमानदारी और क्षमता से निर्वहन करना चाहिए. छोटे लाभों के आकर्षण से बचना चाहिए. जल्दी-जल्दी स्थान परिवर्तन से परहेज करना चाहिए. सामाजिक जिम्मेदारियों में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी करना चाहिए. आत्मसम्मान से कभी समझौता नहीं करना चाहिए. शनिदेव को मंत्रजाप से प्रसन्न करना चाहिए.
वृश्चिक- शरीर में यह लिंग प्रदेश की प्रतिनिधि है. ऐसे जातक आत्ममुग्ध रहते हैं. खुद से प्रेम करते हैं. साहसिक कार्यों में बढ़चढ़ कर हिस्सेदारी करते हैं. दिखावा प्रिय और आदर्शवादी होते हैं. गुरुजनों और वरिष्ठों के प्रति वचनबद्ध और आज्ञाकारी होते हैं. करीबियों के प्रति इनका व्यवहार अक्सर कठोर और दमनात्मक हो सकता है. शनि की सहजता के लिए इन्हें उन्हीं तथ्यों का अनुपालन करना चाहिए जो सत्य को समर्पित हों. नैतिक हों. इसके लिए महत्वपूर्ण और प्रियजन के विरोध से भी पीछे नहीं हटना चाहिए. देश भक्ति और सर्वोच्च सत्ता को ही अपना आदर्श मानना चाहिए. यज्ञकर्म से शनिदेव को प्रसन्न करना सहज होता है.
धनु- अग्नि तत्व की यह राशि देह में जांघों की प्रतिनिधि है. इस राशि के जातक प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में बहुत अंतर रखते हैं. इनमें गजब का आकर्षण होता है. व्यवहारिक होते हैं. नई-पुरानी संस्कृतियों और संस्कारों का इनमें बेहतरीन संतुलन देखने को मिलता है. शनि की सहजता के लिए इन्हें घर-बाहर सभी जगह नैतिकता का पक्षधर बने रहना चाहिए. स्वार्थों के वशीभूत होने और चरित्र पतन से बचना चाहिए. शनि समर्पित मंत्रों का जाप करना चाहिए. अप्रसन्न शनि इन्हें कठोरतम दंड देने से भी नहीं हिचकते हैं. अपयश और धन हानि से लेकर स्वास्थ्य और आत्मबल तक हर लेते हैं.
मकर- पृथ्वी तत्व की चर राशि है. घुटने का प्रतिनिधित्व करती है. इस राशि के जातक पेशेवर और हुनर के धनी होते हैं. अपना काम बखूबी करते हैं. हस्तक्षेप इन्हें कम ही पसंद होता है. नई जिम्मेदारियों से घबराते नहीं हैं. एक ही प्रकार का काम लगातार करते रहने से ऊब महसूस करते हैं. शनिदेव की सहजता बनाए रखने के लिए इन्हें सामाजिक सेवाओं में रहने की जरूरत है. सार्वजनिक स्थानों पर यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ानी चाहिए. शनि इस राशि के स्वामी भी हैं. अतः ऐसे जातकों विशेष लाभ के लिए सम्पूर्ण अनुष्ठानिक तौर तरीकों से शनि देव की पूजा करनी चाहिए.
कुम्भ- वायु तत्व की अचर राशि है. पिंडली और टखने का प्रतिनिधित्व करती है. कुम्भ राशि के जातक संवेदनशील और संघर्ष में अडिग रहने में सक्षम होते हैं. सटीकता और सरलता से आगे बढ़ना पसंद करते हैं. स्वच्छता और सौन्दर्य प्रिय होते हैं. अनोखी और आकर्षक वस्तुओं के संग्रह में रूचि लेते हैं. विचारवान और बुद्धिजीवी होते हैं. शनि इस राशि के स्वामी भी हैं. सहजता और प्रसन्नता के लिए इस राशि के जातकों को शनि देव के आदर्शों और ज्ञान का प्रचार-प्रसार करना चाहिए. समाज के अंतिम तबके तक के कल्याण के लिए यथासंभव प्रयास करना चाहिए. गलत के विरोध में सदैव खुद को समर्पित रखना चाहिए.
मीन- जल तत्व की राशि है. पगतल और उंगलियां की प्रतिनिधि है. इस राशि के जातकों की स्थापित आदर्शों और संवैधानिक नियमों में गहरी आस्था होती है. ये अच्छे प्रशासक और नियंत्रणकर्ता होते हैं. अधिकांश सत्ता से जुड़ी जिम्मेदारियों का ये ही शुशोभित करते हैं. आम लोगों के थोड़े कम प्रिय होते हैं. सम्मान भरपूर प्राप्त होता है. अनुशासित और सभ्य होते हैं. शनि की सहजता के लिए इन जातकों को गलत के समर्थन से बचना चाहिए. छोटे लाभ में फंसकर ओछे काम नहीं करना चाहिए. बाहरी और आंतरिक स्वच्छता का पूरा ख्याल रखना चाहिए. शनिदेव की प्रसन्नता के लिए विधिविधान से यज्ञ जाप करना चाहिए.