हिन्दू धर्मशास्त्रों में शरीर और मन को संतुलित करने के लिए व्रत और उपवास के नियम बनाए गए हैं. तमाम व्रत और उपवासों में सर्वाधिक महत्व एकादशी का है जो माह में दो बार पड़ती है- शुक्ल एकादशी और कृष्ण एकादशी. एकादशी व्रत के मुख्य देवता भगवान विष्णु, कृष्ण या उनके अवतार होते हैं जिनकी पूजा इस दिन की जाती है. चैत्र मास में एकादशी उपवास का विशेष महत्व है जिससे मन और शरीर दोनों ही संतुलित रहते हैं. खासतौर से गंभीर रोगों से रक्षा होती है. पाप नाश के लिए और अपनी तमाम मनोकामनाओं की पूर्ति के चैत्र मास की कामदा एकादशी का विशेष महत्व है. इस बार कामदा एकादशी का पर्व मंगलवार, 12 अप्रैल को है.
कामदा एकादशी पर कैसे करें पूजा
इस दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद पहले सूर्य को अर्घ्य दें. इसके बाद भगवान कृष्ण की आराधना करें. उनको पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें. फल भी अर्पित कर सकते हैं. इसके बाद भगवान कृष्ण का ध्यान करें तथा उनके मन्त्रों का जप करें. इस दिन पूर्ण रूप से जलीय आहार लें अथवा फलाहार लें तो इसके श्रेष्ठ परिणाम मिलेंगे. अगर केवल एक वेला का उपवास रखते हैं तो दूसरी वेला में वैष्णव भोजन ही ग्रहण करें. अगले दिन सुबह एक वेला का भोजन या अन्न किसी निर्धन को दान करें. इस दिन मन को ईश्वर में लगाएं, क्रोध न करें.
संतान की कामना के लिए क्या करें?
पति पत्नी संयुक्त रूप से भगवान कृष्ण को पीला फल और पीले फूल अर्पित करें. एक साथ संतान गोपाल मंत्र का कम से कम ११ माला जाप करें. संतान प्राप्ति की प्रार्थना करें. फल को पति पत्नी प्रसाद के रूप में ग्रहण करें.
आर्थिक लाभ के लिए क्या करें?
भगवान कृष्ण को पीले फूलों की माला अर्पित करें. इसके बाद "ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः" का कम से कम 11 माला जाप करें. आर्थिक लाभ की प्रार्थना करें. ये प्रयोग वर्ष में एक बार जरूर करें.
पाप नाश के लिए क्या उपाय करें?
भगवान कृष्ण को चन्दन की माला अर्पित करें. इसके बाद "क्लीं कृष्ण क्लीं" का 11 माला जाप करें. अर्पित की हुयी चन्दन की माला को अपने पास रखें. पापों का प्रायश्चित होगा, पाप वृत्ति से छुटकारा मिलेगा. आपके नाम यश में वृद्धि होगी.
पितरों की आत्मा की शांति के लिए क्या करें
एकादशी की शाम को या रात्रि को भगवान कृष्ण के समक्ष बैठें. उनको पीले फूल और चन्दन अर्पित करें. इसके बाद गीता के 11वें अध्याय का पाठ करें. पितरों की आत्मा की शांति के लिये प्रार्थना करें.