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Buddha Purnima 2024: जब बुद्ध ने शिष्य को एक पत्थर को बेचने के लिए बाजार भेजा, दिलचस्प है कहानी

Buddha Purnima 2024: महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़ी कई ऐसी दिलचस्प कहानियां हैं जो कुछ न कुछ ज्ञान देती हैं. तो आइए जानते हैं उनमें से ऐसी एक कहानी के बारे में.

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बुद्ध पूर्णिमा 2024
बुद्ध पूर्णिमा 2024

Buddha Purnima 2024: इस बार बुद्ध पूर्णिमा 23 मई यानी आज मनाई जा रही है. इसे वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है. इसे बुद्ध पूर्णिमा इसलिए कहते हैं क्योंकि इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था. वहीं महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़ी कई ऐसी दिलचस्प कहानियां हैं जो कुछ न कुछ ज्ञान देती हैं. ऐसी एक कहानी में महात्मा बुद्ध ने बताया था कि आदमी की तुलना कैसे करें.

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एक बार एक व्यक्ति महात्मा बुद्ध के पास पहुंचा. उसने पूछा- ''प्रभु मुझे ये जीवन क्यों मिला है? इतनी बड़ी दुनिया में मेरी क्या कीमत है? महात्मा बुद्ध ने उस व्यक्ति की बात सुनी और उसे एक पत्थर देते हुए कहा, ''तुम पहले इस पत्थर की कीमत मालूम करके आओ, लेकिन कीमत मालूम करके इस पत्थर को वापस ले आना.''

सबसे पहले एक फल वाले से उस पत्थर की कीमत पूछी. फल वाले ने कहा, ''वैसे तो ये पत्थर मेरे किसी काम का नहीं, लेकिन इसकी चमक देखते हुए मैं तुम्हें इसके बदले 10 आम दे सकता हूं.'' आदमी वहां से चला गया और फिर एक सब्जीवाले के पास गया. जिसने कहा कि ''मैं तुम्हें इसके बदले 1 बोरी आलू दे सकता हूं.'' वह व्यक्ति समझ गया था कि पत्थर बहुत ही ज्यादा कीमती है. इसके बाद वह व्यक्ति एक हीरे के व्यापारी के पास पहुंचा. व्यापारी वह पत्थर देखते ही अचंभित रह गया और बोला कि ''मैं तुम्हें 10 लाख रुपये दे सकता हूं. वह व्यक्ति वहां से चल दिया, उस व्यापारी ने कहा कि मैं तुम्हें इस पत्थर के 50 लाख रुपये दूंगा. लेकिन, वो व्यक्ति नहीं रुका और तुरंत ही बुद्ध के पास लौट आया और पत्थर देते हुए उस व्यक्ति ने पूरी बात महात्मा बुद्ध को बताई. इसके बाद उसने फिर से बुद्ध से वही प्रश्न पूछा, 'अब आप बताइए, मेरे जीवन का क्या मूल्य है?'

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बुद्ध बोले, 'मैंने तुम्हें इस पत्थर की कीमत जानने के लिए भेजा था. सभी लोगों ने अपने अनुसार इस पत्थर की कीमत बताई. ठीक इसी प्रकार जीवन भी हीरे के समान ही होता है. यानी हर आदमी में कोई न कोई गुण छुपा होता है जिसको अपने आप ही तराशना पड़ता है. बस उसे पहचानना वाला कोई दूसरा होता है.

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