Dussehra 2022: आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है. इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानकर मनाया जाता है. दशहरा को विजयदशमी और आयुध पूजा के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने रावण का वध किया था. इस दिन हर जगह रावण, मेघनाद, कुंभकरण का पुतला जलाया जाता है. लेकिन, इलाहाबाद एक ऐसी जगह है, जहां दशहरा आने से पहले रावण की बारात निकाली जाती है. आइए जानते हैं कि इस अनोखी बारात के बारे में.
रावण की अनोखी बारात
पूरे भारत में भले ही रावण को बुराई के प्रतीक के रूप में देखा जाता हो, लेकिन गंगा यमुना के मिलन स्थल इलाहाबाद से रावण की अनोखी बारात निकली जाती है. इस बारात में रावण बडे़ से हाथी पर बैठकर शोभा यात्रा निकालते हुए पुरे शहर में घूमता है. इसके पीछे हजारों बाराती रावण का जयकारा लगाते हुए चलते हैं. यह बारात अपने आप में बेहद खास होती है. साथ ही इस बारात में बैंड बाजा, हाथी घोडे़ और हजारों की संख्या में रावण के भक्त भी शामिल होते हैं.
इस बारात के पीछे एक पुरानी मान्यता है कि जब भगवान राम रावण वध कर के अयोध्या लौट रहे थे तो उनका पुष्पक विमान यही प्रयागराज में भारद्वाज मुनि के आश्रम में रुका था. जब राम ने माता सीता के साथ भारद्वाज मुनि से मिलने का प्रयास किया तो ऋषि ने उनसे मिलने के लिए मना कर दिया था, क्योंकि राम से एक ब्राह्मण की हत्या हो गई थी. उनके ऊपर एक ब्राह्मण की हत्या का पाप था.
इस पर भगवान राम ने भारद्वाज ऋषि से क्षमा मांगी. भगवान राम ने इस पाप को मिटाने के लिए प्रयाश्चित स्वरूप प्रयागराज के शिव कुटी घाट पर एक लाख बालू के शिव लिंगों की स्थापना की. साथ ही राम ने इस जगह पर रावण से हत्या की क्षमा भी मांगी. तब रावण को यह वरदान मिला कि प्रयागराज में रावण की पूजा होगी. साथ ही उसकी बारात और शोभा यात्रा भी निकाली जाएगी. तब से इलाहाबाद में इसी तरह रावण की बारात निकाली जाती है.