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Hanuman Jayanti 2024: आखिर क्यों श्रीराम ने हनुमान जी को दिया था मृत्युदंड? वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

Hanuman Jayanti 2024: हर कोई जानता है कि हनुमान जी की भक्ति श्रीराम के प्रति असीम रही है, जिससे जुड़ीं कई कथाएं हमने सुनी हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि श्रीराम ने एक बार हनुमान जी को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी. तो आइए जानते हैं कि इसके पीछे की वजह.

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श्रीराम ने दिया था हनुमान जी को मृत्युदंड (pixabay)
श्रीराम ने दिया था हनुमान जी को मृत्युदंड (pixabay)

Hanuman Jayanti 2024: इस बार हनुमान जयंती 23 अप्रैल यानी आज मनाई जा रही है. हनुमान जयंती चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. हनुमान की श्रीराम भक्ति से जुड़ी से कई कथाएं आपने सुनी होंगी लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रीराम ने एक बार हनुमान जी को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी. श्रीराम ने अपने सबसे बड़े भक्त हनुमान को ही मृत्युदंड क्यों दिया था, आइए जानते हैं पूरी कहानी.

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श्रीराम ने दिया था हनुमान जी को मृत्युदंड

ये उस वक्त की बात है जब श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त कर ली थी और रावण का वध हो चुका था. श्रीराम लंका का राज्य विभीषण को सौंप कर वापस अयोध्या आ चुके थे. अयोध्या पहुंचने के बाद श्रीराम का राजतिलक किया गया और वह राजा बन गए. श्रीराम के राजा बनने के बाद एक बार जब दरबार स्थगित हुआ और नारद जी ने हनुमान जी से मुनि विश्वामित्र को छोड़कर सभी ऋषियों का अभिवादन करने के लिए कहा. हालांकि, नारद मुनि ने धोखे से हनुमान जी को ये विश्वास दिला दिया था कि उन्हें विश्वामित्र का अभिवादन नहीं करना चाहिए. 

हनुमान जी ने नारद मुनि की बातों को मानते हुए मुनि विश्वामित्र का अभिवादन नहीं किया. लेकिन, ऋषि विश्वामित्र का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. जब नारद जी ने देखा कि विश्वामित्र को कोई फर्क नहीं पड़ रहा तो वो ऋषि विश्वामित्र के पास पहुंच गए. नारद जी ने ऋषि विश्वामित्र को उकसाया, जिसके बाद वो इतने क्रोधित हुए कि वे सीधा श्रीराम के पास गए और उनसे हनुमान को मृत्युदंड देने के लिए कहा. क्योंकि श्रीराम ऋषि विश्वामित्र के ही छात्र थे, इसलिए अपने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए श्रीराम ने हनुमान जी को बाणों से मारने का आदेश दिया. 

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हनुमान जी मृत्युदंड से कैसे बच गए?

अगले दिन, हनुमान जी को दंड के लिए सबके सामने पेश किया गया. लेकिन, हैरान कर देने वाली बात ये थी कि बाण से उन्हें कुछ भी नहीं हुआ क्योंकि हनुमान जी लगातार राम नाम का जाप कर रहे थे. 

श्रीराम को अपने गुरु के वचन का पालन करना था और बाणों का कोई प्रभाव हनुमान जी पर पड़ नहीं रहा था इसलिए उन्होंने ब्रह्मास्त्र का उपयोग करने का निर्णय लिया. लेकिन, वहां मौजूद सभी लोग आश्चर्यचकित हो गए जब हनुमान जी के राम मंत्र ने सबसे शक्तिशाली ब्रह्मास्त्र को भी विफल कर दिया. यह देखकर नारद जी, ऋषि विश्वामित्र के पास गए और अपनी गलती स्वीकार कर हनुमान जी की अग्निपरीक्षा रोक दी.

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