Pitru Paksha 2024: पितृ पक्ष की 17 सितंबर से शुरुआत हो चुकी है. पितृ पक्ष के दौरान पितरों की तिथि के अनुसार तर्पण किया जाता है और उनका मनपंसद भोजन तैयार किया जाता है. पितृ पक्ष में पितरों के रूप में कौवे को भी भोजन कराया जाता है. हिंदू धर्म में कौओं को पितरों का दर्जा दिया गया है. पितृ पक्ष हो या कोई भी शुभ कार्य पितरों को याद करते हुए लोग कौओं को भोजन कराते हैं. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर पितृ पक्ष में कौओं को ही भोजन क्यों कराया जाता है और इसका क्या महत्व होता है.
क्यों कौवे को पितरों के रूप में पूजा जाता है?
हिंदू धर्म में कौवों को पितरों का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि यह मान्यता है कि पितरों की आत्माएं कौए के रूप में आकर अपने वंशजों से भोजन और पूजा ग्रहण करती हैं. यह मान्यता श्राद्ध और पितृ पक्ष के दौरान विशेष रूप से प्रचलित है. कौए बिना थके लंबी दूरी की यात्रा तय कर सकते हैं. ऐसे में किसी भी तरह की आत्मा कौए के शरीर में वास कर सकती है और एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकती है. इन्हीं कारणों के चलते पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति की मौत होती है तो उसका जन्म कौआ योनि में होता है.
कौवे को पितर मानने के पीछे की कथा
पौराणिक कथा के मुताबिक, इंद्र देव के बेटे जयंत ने कौए का रूप धारण किया था. राम जी ने जब कौए की एक आंख में तिनका चला दिया, तो कौए ने श्रीराम से माफी मांगी. इसके बाद, भगवान राम ने उसे आशीर्वाद दिया कि पितृ पक्ष में कौए को दिया गया भोजन पितरों को मिलेगा. ऐसा माना जाता है कि कौवे को भविष्य में होने वाली घटनाओं का थोड़ा-थोड़ा आभास हो जाता है. कौवे को अतिथि के आगमन का संकेत भी माना जाता है.
पितृ पक्ष में इन्हें भी कराया जाता है भोजन
पितृ पक्ष में गाय, कुत्त और चींटी को भी भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है. पितृ पक्ष में गाय को भोजन कराने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है. इसके अलावा, पितृ पक्ष में कुत्ते को भोजन कराने से पितरों की आत्मा को संतुष्टि मिलती है.