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राहु-केतु 23 सितंबर को बदलेंगे राशि, जानें कैसे पड़ेगा आपके रोजगार पर असर

राहु-केतु का असर जिन पर हो, उनकी युवावस्था संघर्ष में बीतती है. ऐसे लोग सेहत और खान-पान का ख्याल भी बिल्कुल नहीं रखते. इसी कारण ये कई तरह की बीमारियों का शिकार भी होते हैं.

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23 सितंबर को राहु-केतु का राशि परिवर्तन, जानें जीवन पर इनके शुभ-अशुभ प्रभाव
23 सितंबर को राहु-केतु का राशि परिवर्तन, जानें जीवन पर इनके शुभ-अशुभ प्रभाव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कैसे इंसान की जिंदगी पर असर डालते हैं राहु-केतु?
  • क्या हैं राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय?

राहु-केतु (Rahu ketu rashi parivartan 2020) का जीवन के विभिन्न हिस्सों पर प्रभाव पड़ता है. इनका प्रभाव व्यक्ति को व्यावहारिक रूप से चालाक बनाता है. स्वार्थ के लिए लिए असत्य का रास्ता चुनने वाले और झूठ बोलने वालों पर ये ग्रह ज्यादा हावी रहते हैं. इनका असर जिन पर हो, उनकी युवावस्था संघर्ष में बीतती है. ऐसे लोग सेहत और खान-पान का ख्याल भी बिल्कुल नहीं रखते. इसी कारण ये कई तरह की बीमारियों का शिकार भी होते हैं.

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रोजगार पर असर
इसके प्रभाव में लोग आमतौर पर चमड़े, शराब, नशीले पदार्थ और कभी-कभी इलेक्ट्रोनिक्स का व्यवसाय करते हैं. इनका झुकाव अचानक धन कमाने की तरफ होता है. ये आम तौर पर शेयर बाजार, सट्टा लॉटरी और राजनीति में भी भाग्य आजमाते हैं. काम और रोजगार कितना भी अच्छा क्यों न हो, इनको जीवन में लगातार उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है.

परिवार पर असर
ऐसे लोगों का पारिवारिक जीवन अच्छा नहीं होता है. शादी-शुदा जिंदगी में तनाव रहता है. एक से ज्यादा विवाह होने की सम्भावना होती है. पारिवारिक संपत्ति या तो नहीं मिलती या मुकदमों में फंस जाती है. संतान उत्पत्ति में देरी होती है और एक संतान समस्या का कारण बनती है.

राहु का शुभ प्रभाव
व्यक्ति को नाम यश खूब मिलता है और व्यक्ति घर से दूर जाकर उन्नति करता है. मध्यायु के बाद व्यक्ति को राजनैतिक सफलता मिलती है. अगर चन्द्रमा कमजोर हो तो व्यक्ति के मन में वैराग्य पैदा होता है. व्यक्ति ईश्वर की उपलब्धि की ओर जाता है और मुक्ति मोक्ष के लिए प्रयास करता है. ऐसे लोगों को यदि सही दिशा मिले तो ये समाज को नई दिशा देते हैं.

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राहु केतु के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय

  • नशीले पदार्थ और उलटी सीधी चीजें खाना छोड़ दें
  • प्रातः काल खाली पेट तुलसी के पत्ते खाएं
  • सोना और चांदी मिश्रित अंगूठी जरूर पहन लें
  • गायत्री मंत्र या ईष्ट मंत्र का नियमित जाप करें
  • मस्तक पर चन्दन जरूर लगाएं

 

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