Raksha Bandhan 2024: आज रक्षाबंधन है. यह त्योहार हर साल सावन पूर्णिमा पर मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई की रक्षा व सुख-संपन्नता के लिए उसे राखी बांधती हैं और उसके भाग्योदय की कामना करती है. भारत में रक्षाबंधन का त्योहार मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है. सतयुग और त्रेता युग में रक्षाबंधन मनाने के साक्ष्य शास्त्रों में वर्णित हैं. द्वापर युग में भी रक्षाबंधन की परंपरा से जुड़ी एक बेहद कारुणिक कहानी सुनने को मिलती है. आइए आज आपको द्वापर युग में रक्षाबंधन की एक कथा बताते हैं.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार श्रीकृष्ण का मान-सम्मान देखकर शिशुपाल ईष्या करने लगा और उसने भगवान को अपमानित किया. श्रीकृष्ण ने शिशुपाल को सौ बार क्षमा दी थी. जैसे ही शिशुपाल ने 101 बार गलती की, श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से दुराचारी राजा शिशुपाल का बध कर दिया. लेकिन सुदर्शन धारण करने के कारण उनकी उंगली से रक्त की धार निकल गई थी. जब वहां मौजूद द्रौपदी ने देखा कि कृष्ण की उंगली से रक्त बह रहा है तो उन्होंने तुरंत अपनी साड़ी का एक हिस्सा फाड़कर कृष्ण की उंगली पर बांध दिया. ताकि रक्त प्रवाह रुक जाए.
तब भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि तुम्हारे इस पवित्र बंधन में बंधकर मैं आजीवन तुम्हारा ऋणी हो गया हूं और सदैव तुम्हारी रक्षा का संकल्प लेता हूं. आगे चलकर जब कौरवों की भरी सभा में दुस्साशन द्रौपदी का चीर हरण करने लगा तो द्रौपदी ने करुण भाव से भगवान कृष्ण को पुकारा था.
भक्तों की करुण पुकार सुनकर विह्वल हो जाने वाले कृष्ण ने चीर (कपड़ा) को ऐसा बढ़ाना शुरू कर दिया कि दुस्साशन अपने नापाक मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाया. दुस्साशन के प्राण गले तक आ फंसे, लेकिन वो चीर हरण नहीं कर पाया.
कहते हैं कि उसी दिन से रक्षाबंधन का त्योहार मनाने की परंपरा चली आ रही है. इस दिन बहन द्रौपदी की तरह अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके लिए मंगलकामनाएं करती हैं. फिर भाई भगवान श्रीकृष्ण की तरह इस पवित्र रक्षा सूत्र के बदले आजीवन उसका ऋणी हो जाता है. इस दिन भाई बहन को उसकी रक्षा का वचन तो देता ही है. साथ ही साथ उसे अपने सामर्थ्य के अनुसार कोई खूबसूरत तोहफा भी भेंट कर सकता है.