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Swami Vivekananda Jayanti 2024: स्वामी विवेकानंद जयंती है आज, जानें उनके जीवन से जुड़े 8 प्रेरणादायक विचार

Swami Vivekananda Jayanti 2024: स्‍वामी विवेकानंद का जन्‍म 12 जनवरी 1863 को हुआ था. भारत में उनके जन्‍मदिन को युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है. उन्‍होंने रामकृष्‍ण मठ, रामकृष्‍ण मिशन और वेदांत सोसाइटी की नींव रखी थी. स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं.

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स्वामी विवेकानंद जयंती 2024
स्वामी विवेकानंद जयंती 2024

Swami Vivekananda Jayanti 2024: अपने विचारों से लोगों की सोच बदलने वाले स्वामी विवेकानंद की आज जयंती है. स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था. साथ की आज के दिन युवा दिवस भी मनाया जाता है. स्वामी विवेकानंद श्रीरामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे.

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विवेकानंद बहुत कम उम्र में ही संन्यासी बन गए थे. पश्चिमी देशों को योग-वेदांत की शिक्षा से अवगत कराने का श्रेय स्वामी जी को ही जाता है. स्वामी विवेकानंद ने 19वीं शताब्दी के अंत में विश्व मंच पर हिंदू धर्म को एक मजबूत पहचान दिलाई थी. स्वामी विवेकानंद का असली नाम नरेंद्रनाथ दत्त था, जिन्हें नरेन के नाम से भी जाना जाता है. बहुत कम उम्र में ही उनका झुकाव अध्यात्म की तरफ हो गया था.

बचपन से ही बुद्धिमान थे विवेकानंद

स्वामी जी बचपन से ही बहुत बुद्धिमान थे. कहा जाता है कि मां के आध्यात्मिक प्रभाव और पिता के आधुनिक दृष्टिकोण के कारण ही स्वामी जी को जीवन अलग नजरिए से देखने का गुण मिला. स्वामी जी के पिता कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक वकील थे. उनके दादा दुर्गाचरण दत्त संस्कृत और फारसी भाषा के विद्वान थे और 25 वर्ष की आयु में साधु बन गए थे. पारिवारिक माहौल ने उनकी सोच को आकार देने में मदद की. नरेन बचपन से ही बहुत चंचल स्वभाव के थे. जैसे-जैसे वो बड़े होते गए, उनमें व्यावहारिक ज्ञान और पौराणिक समझ गहरी होती गई.

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रामकृष्ण मिशन की स्थापना 

विवेकानंद ने अपने शिष्यों के साथ मिलकर रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी. अतीत से जुड़ाव और भारत की विरासत के साथ विवेकानंद जीवन की समस्याओं के प्रति अपने दृष्टिकोण में बहुत आधुनिक थे. भारत के अतीत और उसके वर्तमान के बीच वह एक तरह का सेतु थे. शिष्टता और गरिमा से परिपूर्ण, अपने मिशन के बारे में सुनिश्चित वह एक गतिशील और ज्वलंत ऊर्जा से भरपूर व्यक्ति थे जिनमें भारत को आगे बढ़ाने का जुनून था. 

विवेकानंद अर्थहीन आध्यात्मिक चर्चाओं और तर्कों की निंदा करते थे, विशेष रूप से उच्च जातियों के छुआछूत वाले विचार की. वह बार-बार स्वतंत्रता और समानता की आवश्यकता पर जोर देते थे. वो कहते थे, 'विचार और कर्म की स्वतंत्रता ही जीवन, विकास और कल्याण की एकमात्र शर्त है. भारत की एकमात्र आशा जनता से है. यहां का उच्च वर्ग शारीरिक और नैतिक रूप से मृत हैं.'

स्वामी विवेकानंद के विचार

स्वामी विवेकानंद एक सच्चे राष्ट्रभक्त थे और उनका देशप्रेम किसी से छिपा नहीं है. वह लोगों की मदद करने से कभी भी पीछे नहीं हटते थे, बल्कि लोगों की सेवा करने को वह ईश्वर की पूजा करने के बराबर मानते थे. स्वामी विवेकानंद आज भी करोड़ों युवाओं को प्रेरणा देते हैं. उनके अनमोल विचारों से इंसान काफी कुछ सीख सकता है. इनके विचारों में जीवन जीने की कला और कामयाब होने के सूत्र छिपे हैं. आइए जानते हैं कि स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक विचारों के बारे में. 

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1. जिस समय जिस काम का संकल्प करो, उस काम को उसी समय पूरा करो, वरना लोग आप पर विश्वास नहीं करेंगे. 
2. जीवन में ज्यादा रिश्ते होना जरूरी नहीं हैं, बल्कि जो रिश्ते हैं उनमें जीवन होना जरूरी है. 
3. दिन में एक बार खुद से जरूर बात करो, वरना आप दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति से बात करने का मौका खो देंगे. 
4. दिल और दिमाग के टकराव में हमेशा अपने दिल की बात सुनो.
5. खुद को कभी कमजोर न समझो, क्योंकि ये सबसे बड़ा पाप है. 
6. उठो, जागो और तब तक नहीं रुको, जब तक तुम अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लेते. 
7. जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी. 
8. लोग तुम्हारी स्तुति करें या निन्दा, लक्ष्य तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहांत आज हो या युग में, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो.

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