छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के गायत्रीनगर, टूरी हटरी, सदरबाजार, आमापारा स्थित जगन्नाथ मंदिरों में शुक्रवार को भगवान का स्नान पूर्णिमा पर्व मनाया गया और अभिषेक के पश्चात भगवान को भोग अर्पित करके सभी जगन्नाथ मंदिरों के पट 15 दिनों के लिए बंद कर दिए गए.
पंडितों ने विधि-विधान व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान जगन्नाथ को स्नान कराया. भगवान को गंगाजल, यमुना जल सहित पांच नदियों के जल से स्नान कराया गया. अब मंदिर के पट 28 जून को खोले जाएंगे और उस दिन नयन उत्सव की परंपरा निभाई जाएगी. भगवान का आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा. इसके अगले दिन 29 जून को रथयात्रा निकलेगी और भगवान जगन्नाथ, बलदेव व सुभद्रा रथ पर सवार होकर अपने भक्तों को दर्शन देने राजधानी का भ्रमण करेंगे.
जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष पुरन्दर मिश्रा ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को स्नान उत्सव मनाने की परंपरा है. मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ पूर्णिमा के दिन ज्यादा स्नान करने से बीमार पड़ जाते हैं. इसके बाद उनका इलाज किया जाता है और जब वे ठीक हो जाते हैं तो अपनी प्रजा को दर्शन देने स्वयं नगर भ्रमण पर निकलते हैं.
इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए अवंति विहार स्थित जगन्नाथ मंदिर में भी स्नान पूर्णिमा का पर्व मनाया गया. नित्य होने वाली पूजा के बाद सुबह 10 बजे भगवान के प्रतिकात्मक रूप को एक बड़े थाल में विराजित कर पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ भगवान को स्नान कराया.
महाआरती के बाद मंदिर के पट बंद करने से पहले सैकड़ों भक्तों ने भगवान के दर्शन किए. प्रसाद वितरण के पश्चात पट को बंद करने की परंपरा निभाई गई. 15 दिनों तक पट बंद रखने के दौरान भगवान को विभिन्न जड़ी-बूटी से बनी औषधि (काढ़ा) का भोग लगाया जाएगा.
औषधि के सेवन से जब भगवान स्वस्थ हो जाएंगे तो रथयात्रा से एक दिन पहले पट खोले जाएंगे और नयन उत्सव संस्कार किया जाएगा. नयन उत्सव के दूसरे दिन मंदिर परिसर से धूमधाम से रथयात्रा निकाली जाएगी और भगवान को उनकी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर ले जाया जाएगा, जहां वे 9 दिन विराम करेंगे और फिर पुन: एकादशी के दिन उन्हें मूल मंदिर में वापस लाया जाएगा.