अयोध्या में राम जन्मभूमि की लेकर लंबे समय से विवाद है.इसी के चलते विवादित स्थल में रामलला परिसर की सुरक्षा काफी चाकचौंबद रहती है. अब इसी सुरक्षा को तकनीक की मदद से और मजबूत किया जाएगा.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की मदद से रामलला परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक किया जाएगा. परिसर को सुरक्षा कवच देने के लिए नो-फ्लाइंग जोन पर नए सिरे से कार्य शुरू किया गया है.परिसर की सुरक्षा के लिए डिजिटल मैप बनवाया जा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, इस डिजिटल मैप से अधिग्रहित परिसर के आस-पास होने वाले निर्माण व अन्य गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी.
इस परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए सॉफ्टवेयर खरीदने की प्रक्रिया चल रही है. डिजिटल मैप के जरिए काम करने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है.
गौरतलब है कि 5 जुलाई 2005 को अयोध्या के रामलला परिसर पर हुए आतंकवादी हमले के बाद केंद्र सरकार ने डिजिटल मैप बनाने की योजना को मंजूरी दी थी. इसमें अधिग्रहीत परिसर (रेड जोन) एवं अधिग्रहीत परिसर से सटा बाहरी इलाके (यलो जोन) की निगरानी भी शामिल थी. तब इस योजना की लागत करीब पांच लाख रुपये रखी गई थी लेकिन अब इसकी लागत 20 लाख रुपये तक हो गई है.