केदारनाथ मंदिर में पूजा शुरू होने में अभी करीब एक हफ्ते का समय और लग सकता है. मंदिर में तुरंत पूजा कराने की मांग पर अड़े शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती भी शवों के दाह संस्कार होने तक वहां पूजा नहीं कराने की बात मान गए हैं.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के आश्वासन के बाद शंकराचार्य ने मंदिर में पूजा करने के लिए दल-बल सहित केदारनाथ जाना फिलहाल स्थगित कर दिया है. दरअसल, शंकराचार्य ने राज्य सरकार से केदारनाथ जाकर पूजा कराने की इजाजत मांगी थी और सरकार ने हामी भी भर दी थी.
शंकराचार्य ने शुक्रवार को अपने शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अगुवाई में 11 सदस्यीय दल के साथ वहां जाने की तैयारी कर ली थी. लेकिन अब सरकार से आश्वासन मिलने पर उन्होंने अपना कार्यक्रम टाल दिया है.
शंकराचार्य का कहना है कि मुख्यमंत्री ने उनसे कहा है कि शवों के बीच पूजा कराने से वहां पूजा में लगे लोगों के बीमार होने का खतरा भी है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि शवों का दाह-संस्कार होने के बाद साफ-सफाई कराई जाएगी. इसके बाद वहां पूजा शुरू कराई जाएगी. शंकराचार्य ने मुक्यमंत्री की बात मानते हुए केदारनाथ जाना टाल दिया है.
शंकराचार्य का कहना है कि मुख्यमंत्री ने उनकी इस बात को भी मान लिया है कि केदारनाथ मंदिर की सभी प्रतीकात्मक मूर्तियों को वहां से नहीं हटाया जाएगा और जो मूर्तियां हटाई भी गईं हैं उन्हें वहां वापस लाकर उनकी पूजा की जाएगी. केदारनाथ मंदिर से बाबा केदार की उखीमठ ले जाई गई प्रतिमा को भी वापस लाया जाएगा.
गौरतलब है कि जल प्रलय के 12 दिन बीत जाने के बाद भी केदार मंदिर में पूजा-पाठ और शिव का जलाभिषेक नहीं हुआ है.