पहले कुम्भ को एक अवसर कहा जाता था लेकिन समय बीतने के साथ इसने एक महोत्सव का आकार ले लिया है. यह एक ऐसा धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है, जो पूरी दुनिया पर एक छाप छोड़ देता है, इस तरह का पर्व जो एक धर्म और संस्कृति के बारे में सोचता है.
इस तरह का एक पर्व जिसकी संस्कृति विष्णुपदी गंगा है. पहले, इस पर्व का आकार छोटा था, लेकिन अब 12वीं सदी से यह पर्व सबसे बड़े पर्व में विकसित हो गया है. इसका फैलाव परेड ग्राउंड से त्रिवेणी बांध तक, दारागंज से नागवासुकी की सीमा तक, झूंसी (प्रतिष्ठान्पुरी) से (अलर्कपुरी) अरैल तक फैला हुआ है.
कुम्भ या अर्धकुम्भ कोई साधारण पर्व नहीं है, यह ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का पर्व है. इस पर्व में धार्मिक माहौल बड़ा ही अनुपम होता है. आप जिस भी शिविर में जायेंगे यज्ञ (धार्मिक बलिदान) के धुएं के बीच में वेद मंत्रों की आवाज सुनाई देती है. व्याख्या, पौराणिक महाकाव्य, प्रार्थना, संतों और साधु के उपदेश पर आधारित नृत्य महमोहक होते हैं.
अखाड़ों की पारंपरिक जुलूस, हाथी, घोड़े, संगीत वाद्ययंत्र के बीच नागासंतों के शाही स्नान में तलवार (शाहीस्नान), घुड़-दौड़ लाखों भक्तों को आकर्षित करती है.
इस पर्व में विभिन्न धर्मों के धर्म-मुखिया हिस्सा लेते हैं. यह पर्व प्रयाग के सम्मान और गरिमा का पर्व है. यह लाखों कलाकारों के अत्यंत भक्ति का पर्व है. गरीबों और असहायों के भरण-पोषण की व्यवस्था यहां उचित ढंग से लिए जाती है. गंगा इस पर्व में सभी की मां हैं और सभी उसके बेटे हैं. ‘गंगेतवदर्शनातमुक्ति’ इस भावना के वशीभूत होकर ही यहां इतनी भारी भीड़ एकत्रित होती है और इस पवित्र पर्व का आयोजन प्रयाग की पावन भूमि पर होता है.
यह पर्व ईंटों और पत्थरों के घरों में नहीं बल्कि यह संगम की ठंड रेत पर आयोजित किया जाता है.यह पर्व टैंटों के घरों के साथ मनाया जाता है. यह मानव भक्ति की एक कठिन परीक्षा है. लोग पवित्र मन और पुण्य की भावना के साथ आते हैं. पाप का स्वतः ही अंत हो जाता है. यहां गायदान, सोने का दान, गुप्तदान/भेंट, पितृ के लिए दान सहित सभी दान का प्रावधान है.
‘गंगा मैया तोका पियरी चढक़इहौ, भरदे अचरवा हमार’
यह पर्व पवित्रता का पर्व है. विभिन्न धर्म सम्प्रदाय के साधु-संत, कलाकार इसमें सम्मिलित होते हैं. यह स्थान एक छोटे भारत का रूप ले लेता है. विभिन्न तरह की भाषा, वेश-भूषा, खान-पान इस पर्व पर एक साथ देखें जा सकतें हैं. इस पर्व पर भारी संख्या में लोग बिना किसी आमंत्रण के पहुंचते हैं.