सोमवार को माघी पूर्णिमा है. इस मौके पर कुंभ में स्नान करने के लिए भारी संख्या में लोग जुटे हैं. महाकुंभ के साथ माघी पूर्णिमा का अवसर कुछ ज्यादा ही खास है. सोमवार का दिन होने के कारण आज इस पर्व की अहमियत तिगुनी है. तिगुनी अहमियत वाले इस खास दिन पर कुंभ से लेकर देश भर की नदियों में पवित्र स्नान के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है.
जो लोग लोक और परलोक में भरोसा रखते हैं, उनके लिए माघ मास की पूर्णिमा का दिन बहुत खास है. इस तिथि को चंद्रमा अपने पूरे चेहरे के साथ आसमान में खिलखिलाकर हंसता है. कहा जाता है कि अगर आज आपने गंगा में डुबकी लगा ली, तो आपके सारे कष्ट दूर समझिए. समझिए की आपने मोक्ष के लिए राह तैयार कर ली.
वैसे तो आम बरसों में भी इस तिथि का खास महत्व है. लेकिन महाकुंभ के बरस में तो माघी पूर्णिमा का अवसर कुछ ज्यादा ही खास है. मान्यता है कि जो कोई भी आज सच्चे हृदय से स्नान-दान करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है.
ज्योतिषियों के मुताबिक रविवार देर रात एक बजकर इकतीस मिनट से सोमवार देर रात एक बजकर चालीस मिनट तक पूर्णिमा की तिथि है. ब्रह्म मुहूर्त में इस स्नान का सबसे ज्यादा महत्व है. सबसे फलदायी स्नान का समय तो सुबह 4 बजकर 4 मिनट से 5 बजकर 53 मिनट तक ही था. लेकिन पूर्णिमा तिथि के दौरान किसी भी वक्त पर स्नान और दान करने से इसका जरुर पुण्य मिलेगा.
माघी पूर्णिमा स्नान के साथ कुंभ में एक माह से चल रहा कल्पवास भी खत्म हो जाएगा. घर-गृहस्थी से दूर संगम के तीरे जप-तप करनेवाले लोग गंगा में डुबकी लगाने के बाद अपने घर लौट जाएंगे.
वैसे तो देश के अलग-अलग शहरों में भी इस खास स्नान का बड़ा महत्व है. लेकिन इस दिन के स्नान के लिए कुंभ क्षेत्र में विशेष तैयारियां की गई हैं. कुंभ के दौरान पिछले हादसे से सतर्क प्रशासन किसी भी चूक के लिए तैयार नहीं है. यूपी के मुख्य सचिव ने तैयारियों की विभागवार जानकारी ली है. मेला के नोडल अधिकारी को खास निर्देश दिए गए हैं. मेला प्रशासन और रेलवे के बीच लगातार तालमेल रखा गया है.
साधु संतों का कहना है कि पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणें पूरी लौकिकता के साथ पृथ्वी पर पड़ती हैं. स्नान के बाद मानव शरीर पर उन किरणों के पड़ने से शांति की अनुभूति होती है और इस लिहाज से भी माघी पूर्णिमा का स्नान खास है.