scorecardresearch
 

जानिए क्यों इतना खास है वसंत पंचमी...

वसंत पंचमी को लेकर देश के हर भाग में रौनक देखी जा रही है. ज्‍यादातर जगह के स्‍कूलों व कॉलेजों के अलावा घरों में भी विद्या की देवी की आराधना की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है.

Advertisement
X

वसंत पंचमी को लेकर देश के हर भाग में रौनक देखी जा रही है. ज्‍यादातर जगह के स्‍कूलों व कॉलेजों के अलावा घरों में भी विद्या की देवी की आराधना की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है.

Advertisement

महाकुंभ में भी वसंत पंचमी को लेकर रौनक
साथ ही प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में भी वसंत पंचमी को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्‍साह है. हर किसी की चाहत है कि वह वसंत पंचमी के मौके पर संगम में डुबकी लगाकर पवित्र हो जाए. माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है. इस साल 15 फरवरी (शुक्रवार) को यह पर्व मनाया जा रहा है.

वसंत पंचमी क्‍यों है खास...
माना जाता है कि इसी दिन शब्दों की शक्ति मनुष्य की झोली में आई थी. इस दिन बच्चों को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है. इस दिन पितृ-तर्पण किया जाता है और कामदेव की पूजा की जाती है. सबसे महत्वपूर्ण विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. इस दिन पहनावा भी परंपरागत होता है. मसलन पुरुष लोग कुर्ता-पाजामा पहनते हैं, तो महिलाएं पीले रंग के कपड़े पहनती हैं. इस दिन गायन-वादन सहित अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं, जो कि देवी सरस्वती को अर्पित किए जाते हैं.

Advertisement

विद्या की देवी हैं सरस्‍वती
सरस्वती को साहित्य, संगीत, कला की देवी माना जाता है. सरस्वती की वीणा संगीत की, पुस्तक विचार की और मयूर वाहन कला की अभिव्यक्ति है. आम भाषा में सरस्वती को शिक्षा की देवी माना गया है. पशु को मनुष्य बनाने का श्रेय शिक्षा को दिया जाता है. मान्यता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना करने के बाद मनुष्य की रचना की. मनुष्य की रचना के बाद उन्होंने अनुभव किया कि मनुष्य की रचना मात्र से ही सृष्टि की गति को संचालित नहीं किया जा सकता. उन्होंने अनुभव किया कि नि:शब्द सृष्टि का औचित्य नहीं है, क्योंकि शब्दहीनता के कारण विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं था और अभिव्यक्ति के माध्यम के नहीं होने के कारण ज्ञान का प्रसार नहीं हो पा रहा था. इसके बाद उन्‍होंने विष्णु से अनुमति लेकर एक चतुर्भुजी स्त्री की रचना की, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था. अन्य दोनों हाथों में पुस्तक और माला थी.

माधुर्य व रस के कारण नाम पड़ा सरस्‍वती
शब्द के माधुर्य और रस से युक्त होने के कारण इनका नाम सरस्वती पड़ा. सरस्वती ने जब अपनी वीणा को झंकृत किया, तो समस्त सृष्टि में नाद की पहली अनुगूंज हुई. चूंकि सरस्वती का अवतरण माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हुआ था, अत: इस दिन को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है.

Advertisement

जानिए सरस्वती पूजन की विधि...
सरस्वती पूजा के दिन लोग अपने-अपने घरों में माता की प्रतिमा की पूजा करते हैं. विभिन्न पूजा समितियों द्वारा भी सरस्वती पूजा के अवसर पर पूजा का भव्य आयोजन किया जाता है.

सरस्वती पूजा करते समय सबसे पहले सरस्वती माता की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखना चाहिए. इसके बाद कलश स्थापित करके गणेश जी तथा नवग्रह की विधिवत पूजा करनी चाहिए. इसके बाद माता सरस्वती की पूजा करनी चाहिए.

सरस्वती माता की पूजा करते समय उन्हें सबसे पहले आचमन और स्नान कराएं. इसके बाद माता को फूल, माला चढ़ाएं. सरस्वती माता को सिन्दुर, अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए. बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित किया जाता है. देवी सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं अत: उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं. सरस्वती पूजन के अवसर पर माता सरस्वती को पीले रंग का फल चढ़ाएं. प्रसाद के रूप में मौसमी फलों के अलावा बूंदिया अर्पित करना चाहिए. इस दिन सरस्वती माता को मालपुए और खीर का भी भोग लगाया जाता है.

सरस्वती पूजा में हवन
सरस्वती पूजा करने बाद सरस्वती माता के नाम से हवन करना चाहिए. हवन के लिए हवन कुण्ड अथवा भूमि पर सवा हाथ चारों तरफ नापकर एक निशान बना लेना चाहिए. अब इस भूमि को कुशा से साफ करके गंगा जल छिड़क कर पवित्र करें और यहां पर हवन करें. हवन करते समय गणेश जी, नवग्रह के नाम से हवन करें. इसके बाद सरस्वती माता के नाम से 'ओम श्री सरस्वतयै नम: स्वहा' इस मंत्र से एक सौ आठ बार हवन करना चाहिए. हवन के बाद सरस्वती माता की आरती करें और हवन का भभूत लगाएं.

Advertisement

सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन
माघ शुक्ल पंचमी के दिन सरस्वती की पूजा के बाद षष्टी तिथि को सुबह माता सरस्वती की पूजा करने के बाद उनका विसर्जन कर देना चाहिए. संध्या काल में मूर्ति को प्रणाम करके जल में प्रवाहित कर देना चाहिए.

अक्षराभ्यास का दिन है वसंत पंचमी
वसंत पंचमी के दिन बच्चों को अक्षराभ्यास कराया जाता है. अक्षराभ्यास से तात्पर्य यह है कि विद्या अध्ययन प्रारम्भ करने से पहले बच्चों के हाथ से अक्षर लिखना प्रारम्भ कराना. इसके लिए माता-पिता अपने बच्चे को गोद में लेकर बैठें. बच्चे के हाथ से गणेश जी को पुष्प समर्पित कराएं और स्वस्तिवचन इत्यादि का पाठ करके बच्चे को अक्षराभ्यास करवाएं. मान्यता है कि इस प्रक्रिया को करने से बच्चे की बुद्धि तीव्र होगी.

वसंत पंचमी एक नजर में...
यह दिन वसंत ऋतु के आरंभ का दिन होता है. इस दिन देवी सरस्वती और ग्रंथों का पूजन किया जाता है. छोटे बालक-बालिका इस दिन से विद्या का आरंभ करते हैं. संगीतकार अपने वाद्ययंत्रों का पूजन करते हैं. स्कूलों और गुरुकुलों में सरस्वती और वेद पूजन किया जाता है. हिन्दू मान्यता के अनुसार वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है. इस दिन बिना मुहूर्त जाने शुभ और मांगलिक कार्य किए जाते हैं.

Advertisement
Advertisement