52 गुरुवार का तप बेरोजगारी खत्म करता है. ये सुनकर आपको हैरानी हो सकती है, लेकिन गुजरात के दत्त मंदिर में भक्तों को ऐसा ही चमत्कार देखने को मिलता है. यहां त्रिदेव एक साथ भक्तों को आशीर्वाद देते हैं. ये मंदिर त्रिदेवों के अवतार भगवान दत्तात्रेय का है. मान्यता है कि अगर यहां गुड़ और मूंगफली चढ़ा दी जाए तो बेरोजगारी से मुक्ति मिलते देर नहीं लगती.
आरती की लौ दिखाती है उम्मीद की ऐसी रौशनी, जिससे अंधेरे, निराशा में डूबे मन को मिल जाता है सहारा. आरती की गूंज धीरे-धीरे उतरने लगती है भक्तों के तन-मन में और छंटने लगते हैं चिंताओं और कष्टों के बादल. गुजरात के भगवान दत्त मंदिर में हर आरती पर कुछ ऐसी ही तस्वीर देखने को मिलती है. भक्त भगवान दत्त की प्रतिमा के आगे सिर झुकाते हैं, उनसे आशीर्वाद मांगते हैं. खास बात ये है कि उन्हें एक साथ त्रिदेवों का आशीर्वाद मिल जाता है. माना जाता है कि भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु, महेश के अवतार हैं.
भगवान दत्त औघड़दानी जितने भोले हैं, विष्णु जैसे दूरदर्शी और चतुर, और ब्रह्मा जैसे ज्ञानी. यही वजह है कि उन्हें प्रसन्न करना भी है बेहद आसान. यहां भगवान को चढ़ाया जाता है मूंगफली और गुड़ का प्रसाद. ये मान्यता है कि अगर 52 गुरुवार कोई भक्त मूंगफली और गुड़ चढ़ा दे तो उसकी कोई इच्छा अधूरी नहीं रहती. हर सपने, हर कामना को मिल जाता है परमेश्वर का सहारा. बेरोजगारों को नौकरी मिलती है, प्रमोशन की राह की अड़चनें दूर हो जाती हैं. यही नहीं व्यापार चमकाने में भी भगवान मदद करते हैं.
नौकरी के अलावा त्वचा के रोगों से परेशान श्रद्धालुओं के लिए भी ये मंदिर किसी वरदान से कम नहीं. आरती के बाद पुजारी भक्तों पर छिड़कते हैं पवित्र जल और भक्तों का ये यकीन है कि इस जल से चर्म रोगों के इलाज में मदद मिलती है. इस मंदिर की स्थापना स्वामी वासुदेवानंद महाराज नाम के संत ने नर्मदा किनारे की थी. वही रोज़ भगवान को गुड़, मूंगफली का भोग लगाया करते थे, बाद में जैसे-जैसे भक्तों की संख्या बढ़ी, दत्त भगवान के चमत्कार बढ़े, मंदिर की प्रसिद्धि बढ़ती गई. यही वजह है कि यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं और अपनी खाली झोली भरकर ले जाते हैं.
भक्तों के भक्त हनुमान किसी का दुख नहीं देख सकते, पल भर में उनका ह्रदय पिघल जाता है. चाहे कोई दुख दूर करना हो या कोई इच्छा पूरी करनी हो, बजरंगबली तुरंत दे देते हैं अपना आशीर्वाद. चित्रकूट में अंजनिपुत्र बेरोजगारी से छुटकारा दिलाते हैं.
चित्रकूट में अनादि हनुमान मंदिर है. यहां बजरंगबली भक्तों के कष्ट हरते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. अनादि हनुमान मंदिर में बजरंगबली भक्तों को देते हैं अच्छी नौकरी पाने का आशीर्वाद. कहते हैं यहां आने के बाद भक्त कभी बेरोजगार नहीं रहते. नौकरी की चिंता से उन्हें हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाता है. यही वजह है यहां भक्त बजरंगबली को नौकरी वाले हनुमान के नाम से पुकारते हैं और उनकी आराधना करते हैं.
हनुमान के चमत्कार तो अनूठे हैं ही साथ ही उनका रूप भी कुछ कम अनोखा नहीं. बजरंगबली की प्रतिमा का एक पैर धरती पर है तो दूसरा पाताल लोक में. संकटमोचन की ये प्रतिमा यहां कैसे आई ये किसी को नहीं पता.
एक मान्यता ये है कि ये मूर्ति स्वयंभू है. कहते हैं जब गांववालों को इस अद्भुत प्रतिमा के बारे में पता चला तो वो इसे गांव ले जाने के लिए उठाने लगे. लेकिन मूर्ति टस से मस नहीं हुई. काफी गहरी खुदाई करने के बाद मूर्ति का पैर निकलने की जगह रक्त निकलने लगा. गांववाले भयभीत हो उठे और वो वहां से चले गए. बाद में हनुमानजी ने एक भक्त को दर्शन देकर कहा कि मैं जहां पर हूं वहां से कहीं नहीं जाऊंगा. औऱ यहीं रहकर भक्तों की इच्छा पूरी किया करुंगा.
कहा जाता है कि तभी से बजरंगबली चित्रकूट में भक्तों का कल्याण करते आ रहे हैं. ये मान्यता है कि मंगलवार को बजरंगबली की पूजा करने के बाद जो भी मन्नत मांगी जाती है वो जरूर पूरी होती है. मनोकामना मांगने के लिए भक्तों को एक नारियल चढ़ाना होता है और फिर इक्कीस हफ्ते तक लगातार मंगलवार का व्रत रखकर उन्हें श्रीराम का गुणगान सुनाना होता है.
राम का नाम बजरंगबली को प्रसन्न करता है औऱ वो खुश होकर भक्तों को मनचाहा वरदान दे देते हैं. मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त भीगी हुई चने की दाल और गुड़ का प्रसाद चढ़ाते हैं.
अनादि हनुमान की महिमा अनंत है. कहते हैं इन्होंने ही चित्रकूट के रामघाट में तुलसीदास को भगवान राम और लक्ष्मण के दर्शन कराए थे. तुलसीदास जब राम और लक्ष्मण को पहचान नहीं पाए तब हनुमान जी ने तोते का रूप धर के चौपाई सुनाकर उन्हें राम के बारे में बताया था. यही वजह है कि आज भी भक्त जब संकटमोचन के दर्शन करते हैं, तो उन्हें बजरंगबली के साथ श्रीराम के दर्शनों का अहसास होने लगता है.
मंदसौर के गणपति सेठ रूप में देते हैं भक्तों को दर्शन. बाप्पा का ये रूप बेहद निराला है. माथे पर पगड़ी और हाथों से बरसता धन. कहते हैं सेठ गणपति के इस रूप के दर्शन मात्र से कर्ज से छुटकारा मिल जाता है और कारोबार में मिलती है सफलता.
विघ्नहर्ता की मोहिनी मूरत की एक झलक पाने, उनकी आरती की मधुर गूंज सुनने के लिए भक्त घंटो खड़े रहते हैं बप्पा के दरबार में. जो हरते हैं सबके कष्ट, जिनके दर्शन मात्र से संवर जाता है जन्म, ऐसे हैं मंदसौर के द्विमुखी गणेश.
मंदसौर के गणपति मंदिर में भगवान विराजते तो हैं एक शिला पर लेकिन दो अलग-अलग रूपों में. आगे पांच सूंड वाले गणपति के रूप में भक्तो को दर्शन देते हैं तो ठीक पीछे हैं सेठ गणपति. जी हां सेठ गणपति जिसमें उनके सिर पर मुकुट की जगह सजती है पगड़ी. ठीक किसी सेठ या साहूकार की पगड़ी की तरह.
मध्यप्रदेश के मंदसौर में बप्पा को उनके अनोखे रूप की वजह से द्विमुखी गणेश के नाम से पुकारा जाता है. बप्पा के दोनों मुख के चमत्कार भी कुछ अलग ही होते हैं. पांच सूंड वाले गणपति भक्तों की चिंता हरते हैं. कोई कलेश या परेशानी हो, किसी की शादी हो या रिश्ते की बात, पढाई हो या एडमिशन, इन सभी चिंताओं को हरते हैं पांच सूंड वाले चिंतामणि गणेश.
अब सेठ गणपति की महिमा भी जान लीजिए. ऐसे लोग जो कर्ज के चंगुल में फंसे हुए हैं या जिनका धन कहीं रुका हुआ है वो सेठ गणपति का द्वार खटखटाते हैं. यहां ऐसे भक्त भी बड़ी तादाद में आते हैं जिनका व्यापार किसी वजह से नहीं चलता. कहते हैं गणपति के आशीर्वाद से डूबा हुआ व्यापार चमकते देर नहीं लगती.
गणपति की ये मूर्ति स्वयंभू है. भगवान मंदसौर के ही एक तालाब से प्रकट हुए थे. कहते है जब भक्तों ने भगवान को स्थापित करने के लिए सही जगह की तलाश करनी शुरू की तब उनकी बैलगाड़ी खुद ब खुद यहां रुक गई. लाख कोशिशों के बाद भी बैलगाड़ी जब टस से मस नहीं हुई तो भक्त समझ गए कि भगवान की मंशा क्या है और फिर यहां स्थापित कर दिया गया विघ्नहर्ता को.
मंदसौर में बप्पा सैकड़ों सालों से भक्तों के दुख हरते आ रहे हैं, दो रूपों में भगवान अपने भक्तों को कई तरह के चमत्कार दिखाते हैं, दुखियारों की झोली में खुशियां डाल देते हैं तो हर तरफ से निराश हो चुके भक्तों को नई राह दिखाते हैं. ये बप्पा की महिमा ही है कि भक्त यहां एक बार आकर अपनी फरियाद उन्हें सुना देते हैं और जीवन भर के लिए हर चिंता से मुक्ति पा लेते हैं.
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिल में हनुमान कुछ अलग ही रूप में देते हैं भक्तों को दर्शन. बजरंगबली के इस मंदिर पर छत है ना ही दरो दीवार. खुले आसमान के नीचे पीपल की छांव तले दर्शन देकर कर देते हैं भक्तों को निहाल और देते हैं रोजगार का वरदान.
सुबह की अलसायी किरणें जब सीधे पड़ती हैं पवनपुत्र के मुख मंडल पर तो निखर उठता है प्रभु का मुखमंडल. राम भक्त हनुमान का ये रुप जितना भव्य है उतना ही चमत्कारी भी. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के बड़ा गांव कस्बे में बना है भगवान हनुमान का ये मंदिर. कहते हैं कि कई बार भक्तों ने इस मंदिर की छत बनवाने की कोशिश की. लेकिन जिसने भी इसके बारे में सोचा या इस पर काम शुरू किया उसे सफलता नहीं मिल पाई. और आज भी बजरंगबली के खुले आसमान में विराजने पर रहस्य कायम है. भक्तों का मानना है कि स्वयं बजरंगबली भी खुले आसमान के नीचे रहना ही पसंद करते हैं.
खुले आसमान में रहकर हनुमान भक्तों पर असीम कृपा बरसाते हैं. जितना अनूठा ये मंदिर है उतना ही अनूठा यहां भक्तों की मन्नत मांगने का तरीका भी है. कोई यहां कपड़े में नारियल बांधकर मन्नत मांगता है तो कोई घंटा चढ़ाकर. मन्नत पूरी होने पर भक्त यहां आकर कपड़े में बांधे गए नारियल को भगवान के सामने फोड़ते हैं.
अगर भक्ति में शक्ति हो तो बजरंगबली भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं. कहते हैं कि जो भी यहां आता है वो खाली हाथ नही लौटता. हनुमान की कृपा से किसी के घर संतान की किलकारी गूंज उठती है तो किसी को रोजगार मिल जाता है. तभी यहां भक्तों की भारी भीड़ घंटों मंत्रोच्चारण कर बाबा को प्रसन्न करने की कोशिश करती हैं और मनोकामना पूरी होने पर उन्हें धन्यवाद करना नहीं भूलती.