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पूजापाठ

Diwali 2020: दिवाली की रात दीपक से क्यों बनाया जाता है काजल? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

काजल बनाने की परंपरा
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आज दिवाली (Diwali 2020)  का त्योहार मनाया जा रहा है. आज के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है और दीयों से घरों को रौशन किया जाता है. लोग मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाते हैं. दिवाली के दिन लोग तरह-तरह के उपायों से मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं.

दिवाली की परंपरा
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दिवाली को लेकर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं चली आ रही हैं. इनमें से एक है दिवाली के दिन काजल बनाने की परंपरा. इसके लिए रातभर घर में दीया जलाया जाता है. दीए की लौ जलने पर जो कालापन इकठ्ठा होता है, उससे काजल बनाया जाता है. 
 

दीए से बनता है काजल
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काजल बनाने का ये काम रात को लक्ष्मी-गणेश पूजा के बाद किया जाता है. पूजा में इस्तेमाल बड़े दीपक से घर की महिलाएं काजल बनाती हैं. इस काजल को घर के सभी सदस्य अपनी आंखों में लगाते हैं. 
 

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घर में आती है समृद्धि
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इसके अलावा इस काजल को घर की महत्वपूर्ण जगहें जैसे अलमारी, तिजोरी, खाना बनाने के चूल्हे पर भी लगाया जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से सभी तरह की बाधाएं दूर हो जाती हैं और घर में समृद्धि आती है. 
 

बुरी नजर से बचाता है काजल
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ये भी माना जाता है कि काजल या काला टीका लगाने से व्यक्ति बुरी शक्तियों से बचा रहता है. मान्यताओं के अनुसार दिवाली के दीपक से बनाया हुआ काजल लगाने से बुरी नजर नहीं लगती और घर की सारी दिक्कतें दूर होती हैं.
 

आंखों को ठंडक पहुंचाता है काजल
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इसके अलावा दिवाली पर काजल लगाने का वैज्ञानिक महत्व भी है. दिवाली पर प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा होता है. प्रदूषण का असर लोगों की आंखों पर बहुत ज्यादा पड़ता है. कई बार प्रदूषण का स्तर ज्यादा होने पर कुछ लोगों की आंखें लाल हो जाती है, आंखों से पानी निकलने लगता है, जलन होती है.
 

आखों की जलन होती है दूर
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ऐसे में काजल लगाने से प्रदूषण और ठंडी हवाओं से होने वाले नुकसान से आंखें सुरक्षित रहती हैं. इस बात की पुष्टि आयुर्वेद में भी हो चुकी है.
 

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