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Dhanteras 2020: धनतेरस पर कैसे करें कुबेर-धनवंतरि की पूजा? जानें विधि और शुभ मुहूर्त

धनतेरस पर विभिन्न धातुओं से बने बर्तन, सोना, चांदी खरीदने का बड़ा महत्व होता है. साथ ही शाम के वक्त परिवार की मंगलकामना के लिए यम नाम का दीपक भी जलाया जाता है. आइए धनतेरस पर पूजन की सही विधि और शुभ मुहूर्त जानते हैं.

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Dhanteras 2020: धनतेरस पर कैसे करें पूजा? जानें सही विधि और शुभ मुहूर्त
Dhanteras 2020: धनतेरस पर कैसे करें पूजा? जानें सही विधि और शुभ मुहूर्त
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कुबेर के वरदान से घर में अपार धन के भंडार लग सकते हैं
  • इस दिन यम नाम का दीपक भी जलाया जाता है

धनतेरस (Dhanteras 2020) के दिन महालक्ष्मी के सचिव कुबेर का पूजन होता है. कुबेर के वरदान से घर में अपार धन के भंडार लग सकते हैं. धनतेरस पर विभिन्न धातुओं से बने बर्तन, सोना, चांदी खरीदने का बड़ा महत्व होता है. साथ ही शाम के वक्त परिवार की मंगलकामना के लिए यम नाम का दीपक भी जलाया जाता है. आइए धनतेरस पर पूजन (Dhanteras pujan vidhi) की सही विधि और शुभ मुहूर्त (shubh muhurt) जानते हैं.

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धनतेरस पर कैसे करें पूजा?
धनतेरस पर शाम के वक्त उत्तर की ओर कुबेर और धनवंतरि की स्थापना करनी चाहिए. दोनों के सामने एक-एक मुख का घी का दीपक जरूर जलाना चाहिए. भगवान कुबेर को सफेद मिठाई और धनवंतरि को पीली मिठाई को भोग लगाया जाता है. पूजा के दौरान "ॐ ह्रीं कुबेराय नमः" का जाप करें. इसके बाद "धनवंतरि स्तोत्र" का पाठ करें. पूजा के बाद दीपावली पर कुबेर को धन स्थान पर और धनवंतरि को पूजा स्थान पर स्थापित करें.

धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर शाम 05 बजकर 28 मिनट से 08 बजकर 07 तक प्रदोष काल रहेगा. पूजा के लिए यही समय सबसे अधिक उत्तम रहेगा. पूजा की अवधि 2 घंटे 39 मिनट रहेगी. यदि आप शुभ मुहूर्त में कुछ नहीं खरीद पाए हैं तो प्रदोष काल में खरीद सकते हैं. वृषभ लग्न के लिए इस मुहूर्त में खरीदारी बहुत ही शुभ मानी जा रही है.

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ये उपाय करने से होगा लाभ
धनतेरस के दिन धनवंतरि का पूजन करना चाहिए. साथ ही नई झाड़ू और सूपड़ा खरीदकर उनकी पूजा करनी चाहिए. शाम के वक्त दीपक जलाकर घर, दुकान आदि को श्रृंगारित करना फलदायी साबित होता है. धनतेरस पर मंदिर, गोशाला, नदी के घाट, कुओं, तालाब, बगीचों में भी दीपक लगाएं.

क्यों मनाया जाता है धनतेरस?
धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है. माना जाता है कि इस दिन समुद्र मंथन के दौरान अमृत का कलश लेकर धनवंतरि प्रकट हुए थे. तभी से इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाने लगा. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, धनवंतरि के प्रकट होने के ठीक दो दिन बाद मां लक्ष्मी प्रकट हुईं थीं. यही कारण है कि हर बार दिवाली से दो दिन पहले ही धनतेरस मनाया जाता है.

 

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