दिवाली के ठीक बाद गोवर्धन व अन्नकूट पूजा की जाती है. इस दिन शाम के समय खास पूजा का आयोजन किया जाता है. गोवर्धन पूजा करने के पीछे धार्मिक मान्यताएं हैं. इसके मुताबिक इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का मानमर्दन कर गिरिराज की पूजा की थी. इस दिन मंदिरों में अन्नकूट किया जाता है.
गाय के गोबर से गोवर्धन की प्रतिमा को तैयार कर शाम के समय इसकी पूजा की जाती है. पूजा में धूप, दीप, जल, फल, खील, बताशे आदि का इस्तेमाल किया जाता है.
अन्नकूट
अन्नकूट शब्द का अर्थ होता है अन्न का समूह. विभिन्न प्रकार के अन्न को समर्पित और वितरित करने के कारण ही इस उत्सव या पर्व का नाम अन्नकूट पड़ा है. इस दिन अनके प्रकार का पकवान, मिठाई से भगवान को भोग लगाया जाता है.
दुकानों की पूजा
इस दिन दुकानों और औजारों की पूजा भी की जाती है. जिन लोगों का लोहे का काम होता है वो खासकर इस दिन अपने औजारों की पूजा करते हैं. आज के दिन वह औजारों से कोई काम नहीं करते हैं.
अन्नकूट व गोवर्धन पूजा पर कैसे करें तैयारी
इन शहरों में की जाती है नए वर्ष की शुरुआत
गुजरात, महाराष्ट्र राज्यों में इसी दिन से नव वर्ष की शुरुआत होती है. यह वैष्णवों का मुख्य पर्व है और इसका आयोजन कृष्ण मंदिरों एंवऔर आस्तकि गृहस्थों के घर में किया जाता है. यह पर्व व्रज क्षेत्र में अधिक लोकप्रिय है.
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
सुबह का मुहूर्त - सुबह 06:28 बजे से 08:43 बजे तक
शाम का मुहूर्त - 03:27 बजे से सायं 05:42 बजे तक
प्रतिपदा - रात 00:41 बजे से शुरूप्रतिपदा तिथि समाप्त - रात्रि 1:37 बजे तक (21 अक्तूबर 2017)