Lakshmi Narayan Aarti: सनातन धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है. इस दिन विवाहित महिलाएं भगवान विष्णु के लिए व्रत रखती हैं. साथ ही कुंडली में गुरु ग्रह की मजबूती के लिए इस दिन व्रत किया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूरे विधि विधान के साथ पूजा उपासना की जाती है, साथ ही उनके मंत्रो का जाप और लक्ष्मी नारायण की आरती भी की जाती है.
लक्ष्मी नारायण जी की आरती
जय लक्ष्मी-विष्णो।
जय लक्ष्मीनारायण, जय लक्ष्मी-विष्णो।
जय माधव, जय श्रीपति, जय, जय, जय विष्णो॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...
जय चम्पा सम-वर्णेजय नीरदकान्ते।
जय मन्द स्मित-शोभेजय अदभुत शान्ते॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...
कमल वराभय-हस्तेशङ्खादिकधारिन्।
जय कमलालयवासिनिगरुडासनचारिन्॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...
सच्चिन्मयकरचरणेसच्चिन्मयमूर्ते।
दिव्यानन्द-विलासिनिजय सुखमयमूर्ते॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...
तुम त्रिभुवन की माता,तुम सबके त्राता।
तुम लोक-त्रय-जननी,तुम सबके धाता॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...
तुम धन जन सुखसन्तित जय देनेवाली।
परमानन्द बिधातातुम हो वनमाली॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...
तुम हो सुमति घरों में,तुम सबके स्वामी।
चेतन और अचेतनके अन्तर्यामी॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...
शरणागत हूं मुझ परकृपा करो माता।
जय लक्ष्मी-नारायणनव-मन्गल दाता॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...