भगवान शिव की आराधना करने से जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है और इनके मंत्रों का जाप करने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं. धार्मिक ग्रथों में भगवान शिव के कई स्वरूपों का वर्णन किया गया है. इसमें से भगवान शिव का एक स्वरूप महामृत्युंजय स्वरूप भी है. इस स्वरूप में भगवान शिव हाथों में अमृत लेकर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं. ऐसे में महामृत्युंजय मंत्र के जाप से व्यक्ति को लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है. आइए जानते हैं पंडित शैलेंद्र पांडेय से कि क्या है महामृत्युंजय मंत्र की महिमा और इसका जाप करते समय किन सावधानियों का पालन करना चाहिए.
महामृत्युंजय मंत्र की महिमा:
पंडित शैलेंद्र पांडेय कहते हैं कि भगवान शिव के अनेक स्वरूपों में एक महामृत्युंजय स्वरूप भी है. इसलिए महादेव को मृत्युंजय भी कहा जाता है. वहीं महामृत्युंजय मंत्र में भगवान शिव के महामृत्युंजय स्वरूप से आयु की रक्षा प्रार्थना की गई है. इस मंत्र के छोटे और लंबे दो स्वरूप हैं. मंत्र के इन दोनों स्वरूपों का जाप करने से व्यक्ति हमेशा सुरक्षित रहता है. महामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग कई तरह से किया जाता है. इसका प्रयोग सामान्य रूप और विशेष रूप से भी कर सकते हैं. ज्योतिष के अनुसार, कुंडली के कई विशेष दोष को दूर करने में ये मंत्र ही कारगर सिद्ध हो सकता है.
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय बरतें ये सावधानियां:
इस मंत्र को जपने की कई सावधानियां और नियम बताए गए हैं. इन नियमों का पालन करके अगर महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाए तो ये ज्यादा प्रभावशाली होता है. महामृत्युंजय मंत्र का जाप सुबह और शाम दोनों समय किया जा सकता है. अगर कोई संकट की स्थिति है तो इस मंत्र का जाप कभी भी किया जा सकता है. इस मंत्र का जाप शिवलिंग के सामने या भगवान शिव की मूर्ति के सामने करना ज्यादा बेहतर होता है. महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए. ऐसा करना शुभ माना जाता है. मंत्र का जाप करने से पहले भगवान शिव को जल और बेलपत्र अर्पित करें और फिर मंत्र का जाप करें. ऐसा करना ज्यादा उत्तम होता है.
कितनी तरह के होते हैं महामृत्युंजय मंत्र?
पंडित शैलेंद्र पांडेय बताते हैं कि अलग-अलग तरीके के महामृत्युंजय मंत्र होते हैं. इनका नियमित रूप से जाप करने से व्यक्ति को कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं. 'हौं' एक अक्षर का महामृत्युंजय मंत्र है जिसे एकाक्षरी महामृत्युंजय मंत्र कहते हैं. नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है. प्रात: काल उठकर अपने बिस्तर पर बैठकर भगवान शिव का ध्यान करें और 'हौं' महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. रोजाना ऐसा करने से आपकी आयु लंबी होगी और स्वास्थ्य अच्छा रहेगा.
'ऊं जूं स:' मंत्र को तीन अक्षर का महामृत्युंजय मंत्र यानी त्रयक्षरी महामृत्युंजय मंत्र कहते हैं. रात को सोने से पहले इस मंत्र का 27 बार जाप करने से आपको नियमित रूप से कोई भी बीमारी परेशान नहीं करेगी. 'ऊं हौं जूं स:' मंत्र चार अक्षरों का महामृत्युंजय मंत्र यानी चतुराक्षरी महामृत्युंजय मंत्र होता है. इसका नियमित रूप से जाप करने से शल्य चिकित्सा, दुर्घटना का खतरा कम हो जाता है. प्रात:काल भगवान शिव को जल अर्पित कर इस मंत्र की 3 माला का जाप करें.
इसके अलावा, 'ऊं जूं स: माम पालय पालय' दस अक्षरों वाला महामृत्युंजय मंत्र यानी दशाक्षरी महामृत्युंजय मंत्र है. इसे अमृत मृत्युंजय मंत्र कहा जाता है. जिस व्यक्ति के लिए इस मंत्र का जाप करें, उस व्यक्ति का नाम इस मंत्र में जरूर प्रयोग करें. तांबे के लोटे में जल भरकर इसके सामने इस मंत्र का जाप करें. इस जल को उस व्यक्ति को पिलाएं जिसे आयु या स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो.
महामृत्युंजय मंत्र जिसे मृत संजीवनी मंत्र भी कहते हैं. ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ। शास्त्रों के अनुसार, इस मंत्र का जाप करने से मरते हुए व्यक्ति को भी जीवन दान मिल सकता है. जब रोग असाध्य हो जाए और कोई आशा न बचे तब इस मंत्र का कम से कम 64 हजार या सवा लाख बार जाप करावाना चाहिए. इस मंत्र के जाप करते समय संपूर्ण अनुष्ठान में भाग लें. अगर किसी और के लिए इस मंत्र का जाप करवा रहे हैं तो रोज पूजा के बाद पूजा के फूल व्यक्ति के सिरहाने रखें. ऐसा करने से निश्चित रूप से लाभ की प्राप्ति होगी.