हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दौरान पितरों के तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है. ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष में हमारे पितृ धरती पर आकर हमें आशीर्वाद देते हैं. इन दिनों पूर्वजों की ग्रहों की शांति के लिए दान-पुण्य और पूजा पाठ किए जाते हैं ताकि हम पर पूर्वजों की कृपा बनी रहे. कहा जाता है कि इन दिनों श्राद्ध कर्म से मनुष्य की आयु बढ़ती है और पितरगण वंश विस्तार का आशीर्वाद देते हैं. महालय श्राद्ध पक्ष 17 सितंबर को समाप्त होगा.
ऑनलाइन पिंडदान
जब तक किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका जन्म नहीं हो जाता वो सूक्ष्म लोक में रहता है. ऐसा माना जाता है कि इन पितरों का आशीर्वाद सूक्ष्मलोक से परिवारजनों को मिलता रहता है. पितृपक्ष में पितृ धरती पर आकर अपने लोगों पर ध्यान देते हैं और आशीर्वाद देकर उनकी समस्याएं दूर करते हैं. इस बार कोरोना के चलते पवित्र नदी किनारे श्राद्ध और पिंडदान नहीं कराया जा रहा है. इस दौरान देश-विदेश से लोग कर्मकांड करने आते हैं, इसलिए प्रयागराज से ऑनलाइन पिंडदान करने का फैसला किया गया है. कोरोना महामारी के कारण धार्मिक आयोजनों पर अभी रोक लगी हुई है.
कोरोना संक्रमण काल में घर में कैसे करें तर्पण
अगर आप भी घर से बाहर पिंडदान नहीं कर सकते हैं तो कोई बात नहीं. घर पर रहते हुए भी तर्पण कर पितरों को प्रसन्न किया जा सकता है. सबसे पहले दोपहर में स्नान करके दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके बैठें. हाथ में कुश ले लें. जल में काले तिल और सफेद फूल मिलाएं. ये जल पितरों को अर्पित करें, तर्पण के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति की प्रार्थना करें. संभव हो तो रोज भोजन का दान करें. जो कोई तर्पण करेगा वो सात्विक आहार ग्रहण करेगा. अगर दिन में समय नहीं तो सूर्यास्त के समय तर्पण करें.