श्रीकृष्ण के साथ राधा का नाम हमेशा लिया जाता रहा है. श्रीकृष्ण के भक्तों की जुबान पर राधा-कृष्ण अमूमन एक साथ ही आता है, क्योंकि ये दो शब्द या दो नाम एक-दूसरे के लिए ही बने हैं और इन्हें कोई अलग नहीं कर सकता. हिंदू पौराणिक शास्त्रों के अनुसार राधा का नाम जपने से श्रीकृष्ण यानी बिहारी जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं. इस बार 26 अगस्त को राधा अष्टमी भी मनाई जा रही है. आइए आपको राधा अष्टमी पर उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें और प्रेम में सफलता के अचूक उपाय बताते हैं.
कौन हैं श्रीराधा?
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बरसाने में राधा जी का जन्म हुआ था. इस तिथि को राधाष्टमी के नाम से मनाया जाता है. राधा का जन्म कृष्ण के साथ सृष्टि में प्रेम भाव मजबूत करने के लिए हुआ था. कुछ लोग मानते हैं कि राधा एक भाव है, जो कृष्ण के मार्ग पर चलने से प्राप्त होता है. वैष्णव तंत्र में राधा और कृष्ण का मिलन ही व्यक्ति का अंतिम उद्देश्य माना जाता है.
राधाष्टमी पर जो भी सच्चे मन और श्रद्धा से राधा की आराधना करता है, उसे जीवन में सभी सुख-साधनों की प्राप्ति होती है. जन्माष्टमी की ही तरह राधाष्टमी पर खासी धूम रहती है, लेकिन इस बार कोरोना की वजह से बृज भूमि में राधा रानी का जन्मदिन उतनी धूम धाम से नहीं मनाया जा रहा, जितना हर साल मनाया जाता है. ऐसे में जन्माष्टमी की ही तरह लोग घर में भी राधिका का जन्मोत्सव मना रहे हैं.
राधा अष्टमी पर कैसे करें पूजा?
राधाष्टमी के मौके पर विशेष भोग लगाने से आपको कृपा प्राप्त होती है. शहद, मिश्री सहित खीर बनाकर देवी राधा और कृष्ण को भोग लगाएं. आइए अब जानते हैं कि प्रेम में सफलता पाने के लिए इस दिन क्या खास ज्योतिषीय उपाय करना चाहिए.
प्रेम में सफलता के लिए करें ये उपाय
राधा अष्टमी के दिन राधा कृष्ण की संयुक्त पूजा करें. श्रीकृष्ण को पीला और राधा को गुलाबी वस्त्र अर्पित करें. इसके अलावा "राधावल्लभाय नमः" मंत्र का जाप करना ना भूलें.