Shri Govardhan Aarti: गोवर्धन महाराज की पूजा उत्तर भारत में, खासकर ब्रज भूमि मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, गोकुल और बरसाना में इसका एक खास महत्व है, जिसका कारण है, भगवान श्री कृष्ण. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को भगवान इंद्र के प्रकोप से बचाया था इसके साथ ही इंद्र को उनकी गलती का एहसास भी करवाया था. तो चलिए सुनते हैं महाराज गोवर्धन की आरती.
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े दूध की धार।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरी सात कोस की परिकम्मा, और चकलेश्वर विश्राम
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरे गले में कण्ठा साज रहेओ,
ठोड़ी पे हीरा लाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
तेरे कानन कुण्डल चमक रहेओ,
तेरी झांकी बनी विशाल।
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण।
करो भक्त का बेड़ा पार
तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।