आसन शरीर की उर्जा को पृथ्वी मैं जाने से रोकता है और एक विशेष तरह के उर्जा मंडल का निर्माण करता है. देवी- देवताओं को विशेष तरह के आसन (Sthapna niyam) पर बैठकर उपासना करने से विशेष तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. देवी-देवता का आसन स्वयं के आसन से ऊंचा होना चाहिए. आसन रेशमी या धातु का होना चाहिए. स्वयं का आसन ऊनी या सूती होना चाहिए. पहले देवता को आसन देते हैं. फिर स्वयं के आसन पर बैठते हैं.
मां लक्ष्मी का आसन और इसका महत्व
इनकी स्थापना सोमवार, बुधवार या शुक्रवार को की जाती है. मां की प्रतिमा को हमेशा गुलाबी आसन या कमल के आसन पर स्थापित करना चाहिए. गुलाबी आसन पर स्थापित करने से धन,समृद्धि और सम्पन्नता की प्राप्ति होती है. कमल के आसन पर स्थापित करने से नौकरी की बाधाएं समाप्त होती हैं और मनचाही नौकरी मिलती है. स्थापना करने के बाद 'ॐ श्रीं महालक्ष्मये नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए.
शिवजी का आसन और इसका महत्व
शिवजी की मूर्ती और शिवलिंग की स्थापना में अंतर है. मूर्ति की स्थापना शुक्रवार को और शिवलिंग की स्थापना सोमवार को की जाती है. शिवलिंग की स्थापना हमेशा धातु के आसन पर करनी चाहिए. इससे वैवाहिक और पारिवारिक सुख मिलता है. शिव मूर्ति की स्थापना मोटे ऊनी या सफेद रेशमी वस्त्र के आसन पर करनी चाहिए. इससे स्वास्थ्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है. स्थापना करने के बाद 'नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना चाहिए.
मां दुर्गा या देवी का आसन और इसका महत्व
इनकी स्थापना बुधवार को की जाती है. मां दुर्गा को सदैव लाल आसन अर्पित करना चाहिए. आसन के साथ हमेश मां को लाल चुनरी अर्पित करनी चाहिए. लाल आसन अर्पित करने से शक्ति साहस और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. स्थापना के बाद 'ॐ दुं दुर्गाये नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए.
आसन देने के साथ जरूर पढ़ें ये मंत्र
किसी भी देवी-देवता की प्रतिमा को आसान देते वक्त 'त्वदीयं वस्तु गोविन्दम, तुभ्यमेव समर्पयेत' मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए.