01 जनवरी 2025
राहत इंदौरी को अदबी दुनिया में दिलचस्पी रखने वालों ने अपनी पलकों पर बिठाकर सुना, ये दुनिया का कमाल नहीं था, ये राहत इंदौरी की क़लम, लहज़ा, ज़िंदादिली, हाज़िर-जवाबी और वाक्पटुता का कमाल था. उनकी आवाज़ के असर से मुशायरों में शामिल लोगों में पागलपन की बयार बह जाया करती थी.