ऐसा क्या और क्यों है कि पवित्र कुरआन जैसी किताब और दुनिया के सबसे बड़े मजहबों में से एक इस्लाम के बारे में इक्कीसवीं सदी में भी तरह-तरह के सवाल और शंकाएं कायम हैं? 'वो इस्लाम जो हम से कहीं छूट गया' किताब के जरिये इस्लाम से जुड़े तमाम बिंदुओं को संदर्भों के साथ समझाने की कोशिश की है रिटायर्ड जज रज़ी अहम चिश्ती ने. वे बलिया (यूपी) की हजरत सूफी मुहिउद्दीन चिश्ती पशुहारी शरीफ दरगाह के गद्दीनशीन भी हैं.
हिंदी उपन्यास का फलक वर्ष 2024 में नए कथाकारों की दस्तक से समृद्ध रहा. विषयों की विविधता, भाषा की सरसता और शिल्प के साथ अपने कथ्य से लंबे समय तक प्रभावी बने रहने वाले ये उपन्यास साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' में वर्ष 2024 की श्रेष्ठ कृतियों में शामिल है
प्रेम, संबंध, संघर्ष, मानवता, प्रकृति, पुराण, समाज और जीवन इस वर्ष कथाकारों के प्रिय विषय रहे. 'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' में वर्ष 2024 की श्रेष्ठ कहानी संग्रहों का चयन यह बताता है कि हमारे कथाकारों के लिए अब भी मनुष्यता के प्रश्न सबसे अहम हैं. देखिए यह सूची, और पढ़िए, जानिए उन कथा-संग्रहों के बारे में जिन्होंने यहां जगह बनाई. कथाकारों, प्रकाशकों, संपादकों और अनुवादकों को बधाई ...
पूछता है कवि, सरहदें किसने बनाईं, किसने सिखाया हिंसक खेल, विजय किसकी, किस पर और क्यों?... कवियों के लिए वर्ष 2024 युद्ध के विरुद्ध, मानवता, प्रकृति और जीवन के पक्ष में खड़ा रहने का वर्ष रहा. इस वर्ष कई श्रेष्ठ कविता संग्रह आए. 'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' में वर्ष 2024 की श्रेष्ठ संग्रहों की सूची में किन्हें जगह मिली, देखिए यहां...
'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' में वर्ष 2024 की श्रेष्ठ English Books में 'The Asura Way', 'We and the world around', 'Never Never Land', 'What Went Wrong With Capitalism', 'Purple Lotus' और 'The Personal is Political'के अलावा और कौन सी कृतियां ...
'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' में वर्ष 2024 की 'लोकप्रिय' श्रेणी की पुस्तकों में शामिल किताबें ऐसी थीं जिन्होंने प्रकाशित होते ही पाठकों का दिल चुरा लिया. ये किताबें बिकने के साथ-साथ सोशल मीडिया और साहित्यिक मेलों में भी चर्चा के केंद्र में रहीं. इस सूची से जानें वर्ष के सबसे कामयाब लेखकों और उनकी कृतियों को...
'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' में वर्ष 2024 की श्रेष्ठ अनूदित पुस्तकों में 'आजतक साहित्य जागृति भारतीय भाषा सम्मान 2024' से सम्मानित कृति 'चरु, चीवर और चर्या' के अलावा शशि थरूर, हरीश भट्ट, अरुंधति सुब्रमण्यम, तसलीमा नसरीन और गाब्रिएल गार्सीया मार्केस की अनूदित पुस्तकें भी शामिल हैं. देखें पूरी सूची...
'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' में वर्ष 2024 की 'कथेतर' श्रेणी की पुस्तकों में अंग्रेजी में प्रकाशित पुस्तकों की भरमार है. यह और बात है कि इनमें डॉ अरुणा कालरा, चेतन भगत, राहुल भाटिया और डॉ सुरेश पंत के अलावा डॉ पल्लव की नंद चतुर्वेदी रचनावली भी शामिल है. देखें पूरी सूची...
'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' में वर्ष 2024 की 'इतिहास-गल्प' श्रेणी की पुस्तकों में विक्रम संपत की ज्ञान वापी पर, प्रो राजकुमार की आर्य, पवन के वर्मा की महान हिंदू सभ्यता, आभास मलदहियार बाबर, मैनेजर पाण्डेय की दारा शुकोह और युगल जोशी की मलिक काफ़ूर के अलावा और किनकी, किन पर पुस्तकें...
'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' में आज 'देशभक्ति' श्रेणी के पुस्तकों की बारी है. वर्ष 2024 की 'देशभक्ति' श्रेणी की 'साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10' पुस्तकों में चन्द्रशेखर आज़ाद पर प्रताप गोपेंद्र, अनजाने स्वतंत्रता सेनानियों पर पी साईनाथ, सुधीर विद्यार्थी और मंज़र अली सोख़्ता के अलावा और किनकी पुस्तकें शामिल हैं...
वर्ष 2024 की 'जीवनी-संस्मरण' श्रेणी की 'साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10' पुस्तकों में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की जीवनी, गुलज़ार पर यतीन्द्र मिश्र, तलत महमूद और मेघा परमार के अलावा और किनकी जीवनियां और संस्मरण शामिल हैं... पूरी सूची
'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' में आज 'विचार-आंदोलन' श्रेणी के पुस्तकों की बारी है. वर्ष 2024 की 'विचार-आंदोलन' श्रेणी की 'साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10' पुस्तकों में राजमोहन गांधी, रामचन्द्र गुहा, नासिरा शर्मा, मकरंद परांजपे और हिलाल अहमद के अलावा और किनकी पुस्तकें...
'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' पुस्तकों की शृंखला आज से जारी हो रही है. वर्ष 2024 में कुल 12 श्रेणियों की टॉप 10 पुस्तकों की यह शृंखला 31 दिसंबर तक जारी रहेगी. आज 'राजनीति' श्रेणी के पुस्तकों की बारी है. वर्ष 2024 की 'राजनीति' श्रेणी की साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10 पुस्तकों में राजदीप सरदेसाई, ज्ञान प्रकाश, हरजिंदर, अरविंद मोहन, प्रकाश पात्रा और रशीद किदवई के अलावा और किनकी पुस्तकें...
तारीख़, विरासत, हुकूमत, आतंक, फ़ौज़, गोलीबारी, दहशत और वहशत के बीच मोहब्बत की कहानियां शायद कहीं खो जाती हैं. लेकिन स्मिता चंद की क़लम से निकलकर किताब की शक्ल में आई ‘लव इन बालाकोट’ कहानी इस बात की तस्दीक़ करती है कि प्यार अगर सच्चा हो तो सरहदों को पीछे छोड़ता हुआ कहीं भी परवान चढ़ सकता है.
जब भी राजनीतिक मुद्दे गर्माते हैं तो विभाजन की उस दहलीज तक जरूर जाते हैं जहां हिंदुस्तान से पाकिस्तान काटा जा रहा था. मगर उन चंद लोगों के दिमागों में क्या चल रहा था जो करोड़ों लोगों की तकदीर तय करने बैठे थे? सोनी लिव का नया शो 'फ्रीडम एट मिडनाईट' यही कहानी दिखाता है.
‘हिंदी सिनेमा में राम’ बॉलीवुड के प्रारंभ से मूक और सवाक् फ़िल्मों से होते हुए विराट रंगीन परदे तक की यात्रा का सजीव चित्रण जान पड़ता है. यह पुस्तक इस अर्थ में भी उल्लेखनीय है कि यह सिनेमा के पौराणिक संदर्भ में भगवान राम पर आधारित हिन्दी सिनेमाई संसार का प्रामाणिक दस्तावेज़ है.
कुल 352 पेज की इस किताब में 35 अध्याय हैं. खास बात ये है कि एक अध्याय से दूसरे अध्याय का कोई सीधा कनेक्शन नहीं है और वो 35 अलग-अलग कहानियां लगती हैं.