टी-रेक्स के जीवाश्मों से मिले प्रोटीन टुकड़ों के आधार पर जेनेटिक इंजीनियरिंग से तैयार कोलेजन से एक खास ‘लेदर’ हैंडबैग बनाया गया है. एम्स्टर्डम म्यूजियम में प्रदर्शित इस बैग की कीमत करोड़ों में बताई जा रही है, हालांकि कई वैज्ञानिक इसके दावों पर सवाल भी उठा रहे हैं.
दिल्ली-NCR में आई धूल भरी आंधी के पीछे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस, गर्म-ठंडी हवाओं की टक्कर और थार रेगिस्तान की धूल जिम्मेदार है. तेज हवाओं से विजिबिलिटी कम हुई और धुंध छाई. IMD के अनुसार यह प्री-मॉनसून पैटर्न है, जिस पर क्लाइमेट चेंज का असर भी बढ़ता दिख रहा है.
दिल्ली-NCR में शुक्रवार को आई तेज धूल भरी आंधी और धुंध का मुख्य कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है. भूमध्य सागर से आने वाली ठंडी नम हवा गर्म सूखी हवा से टकराई, जिससे 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं चलीं. राजस्थान के थार रेगिस्तान से भारी धूल उड़ी और दिल्ली तक पहुंच गई. इससे वायुमंडल अस्थिर हुआ. धूल के कण हवा में भर गए.
वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे खतरनाक टी-रेक्स डायनासोर के जीवाश्म से निकाले गए कोलेजन प्रोटीन का इस्तेमाल कर अनोखा चमड़े का हैंडबैग तैयार किया है. यह हल्का नीला बैग एम्स्टर्डम के आर्ट जू म्यूजियम में पेश किया गया. 11 मई तक प्रदर्शनी में रहेगा. फिर नीलामी में बिकेगा. शुरुआती कीमत 4.63 करोड़ रुपये से ज्यादा.
नासा ने आज 2 अप्रैल 2026 को आर्टेमिस 2 मिशन की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग कर दी है. फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से भारतीय समयानुसार सुबह 3:54 बजे विशाल SLS रॉकेट ने आसमान में उड़ान भरी. यह 54 साल बाद इंसानों को चांद की ओर ले जाने वाला पहला मानव मिशन है. लॉन्च पूरी तरह सफल रहा और चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गए हैं.
IMD Weather Forecast: अप्रैल 2026 के पहले हफ्ते में उत्तर भारत में एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव होगा. मौसम विभाग के अनुसार, 3 से 5 अप्रैल के बीच यह सिस्टम गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में विशेष रूप से प्रभावी होगा.
नासा के आर्टेमिस II मिशन में इस्तेमाल होने वाला ओरियन स्पेसक्राफ्ट गहरे अंतरिक्ष के लिए बना आधुनिक कैप्सूल है. इसमें 4 अंतरिक्ष यात्री बैठ सकते हैं. इसे बनाने में करीब 20 साल और हजारों करोड़ रुपये लगे. इसमें खाने-पीने का पैक्ड फूड, पानी रिसाइक्लिंग और प्रॉपर स्पेस टॉयलेट की व्यवस्था है. यह बहुत सुरक्षित है. सोलर पैनल से ऊर्जा लेता है.
चंद्रयान मिशनों ने NASA के आर्टेमिस कार्यक्रम को वैज्ञानिक डेटा देकर मदद की है. चंद्रयान-1 ने चांद पर पानी की खोज में योगदान दिया, जबकि चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 ने दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई. इस डेटा से NASA को Artemis III के लैंडिंग साइट चुनने और चांद पर संसाधनों की योजना बनाने में सहायता मिली है.
नासा के आर्टेमिस 2 मिशन में वेट टेस्टिंग (Wet Dress Rehearsal) नहीं की गई. मुख्य वजह यह थी कि आर्टेमिस 1 के दौरान फ्यूलिंग सिस्टम की काफी जांच हो चुकी थी. फरवरी में हुई वेट टेस्टिंग में लीक की समस्या आई थी, लेकिन फ्यूल टैंक कंप्रोमाइज नहीं हुए थे. समस्या अम्बिलिकल कनेक्शन में थी, जिसे बाद में ठीक कर लिया गया.
नासा ने 2 अप्रैल 2026 को आर्टेमिस 2 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया. SLS रॉकेट ने फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री — रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन - ओरियन कैप्सूल में बैठकर चांद के पास जाएंगे. यह 54साल बाद इंसानों की चांद की पहली यात्रा है. मिशन 10 दिन का परीक्षण उड़ान है.
नासा आर्टेमिस II मिशन के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली SLS (Space Launch System) रॉकेट का इस्तेमाल कर रहा है. यह 98 मीटर लंबा रॉकेट है जो अपोलो के सैटर्न-V से15% ज्यादा थ्रस्ट पैदा करता है. SLS ओरियन स्पेसक्राफ्ट को चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ चांद से 4.5 लाख किलोमीटर दूर तक ले जा सकता है. इसे बनाने में 11 साल और हजारों करोड़ रुपये लगे.
NASA Artemis 2 Moon Mission Live Updates: नासा का आर्टेमिस II मिशन आज 2 अप्रैल 2026 की सुबह 3:54 बजे फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है. यह ऐतिहासिक पल 54 साल से ज्यादा समय बाद आया है, जब इंसान चंद्रमा की ओर जा रहा है. इसमें जाने वाले चार एस्ट्रोनॉट हैं- मिशन कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन.
नासा का आर्टेमिस II मिशन 54 साल बाद इंसानों को चंद्रमा की ओर ले जाने वाला पहला क्रूड मिशन है. यह ओरियन स्पेसक्राफ्ट और SLS रॉकेट की परीक्षा करेगा. भविष्य में चांद पर लैंडिंग व स्थाई बेस बनाने की नींव रखेगा. इससे साइंस, अंतरिक्ष यात्रा और नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी. चीन की स्पेस दौड़ और चांद के संसाधनों पर दबदबा बनाने की रणनीति भी इसकी एक बड़ी वजह है.
आर्टेमिस II मिशन 54 साल बाद इंसानों को चांद की ओर ले जाने वाला बड़ा कदम है. 2 अप्रैल सुबह इसका लॉन्च होगा. इसे NASA YouTube, NASA+ और Prime Video पर फ्री में लाइव देखा जा सकता है. जानें पूरी डिटेल और टाइमिंग.
नासा का आर्टेमिस II मिशन 1 अप्रैल 2026 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा. भारतीय समयानुसार 2अप्रैल सुबह 3:54 बजे लॉन्च की संभावना है. आप इसे NASA YouTube चैनल, NASA+ ऐप और Amazon Prime Video पर मुफ्त लाइव देख सकते हैं. नासा के यूट्यूब चैनल पर आज शाम 5:15 बजे इन प्लेटफॉर्म पर लाइव कवरेज शुरू हो जाएगा.
नीतियां लागू हैं. करोड़ों रुपये खर्च भी हो रहे हैं. इसके बावजूद भारत का प्रदूषण संकट जारी है. दिल्ली और NCR में PM2.5 का स्तर WHO की सीमा से कई गुना ज्यादा है. NCAP के तहत ज्यादातर फंड सड़क की धूल पर खर्च हो रहा है, जबकि पॉल्यूशन के मेन सोर्स गाड़ियां, इंडस्ट्री और फसल जलाना है. फंड का कम उपयोग और कमजोर कार्रवाई के कारण स्थिति नहीं सुधर रही है.
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है. अब पता चल रहा है कि ईरान ने इस जंग की तैयारी 90 के दशक से ही शुरू कर दी थी और पिछले 3 दशकों में ईरान ने पाताल के नीचे पूरा शहर बसा लिया है. सुरंगों में मिसाइलों, ड्रोन का भंडार है. देखें ईरान की अंडर ग्राउंड मिसाइल सिटी.
दुबई में कुवैती ऑयल टैंकर पर हमले के बाद तेल रिसाव का खतरा बढ़ गया है. आग बुझाने और सफाई की कोशिशें जारी हैं. समंदर में तेल फैलने से समुद्री जीवों को भारी नुकसान होता है. पक्षी, मछलियां, डॉल्फिन और व्हेल मर जाती हैं. तेल पानी में ऑक्सीजन कम कर देता है. पूरी फूड चेन बिगाड़ देता है.
नासा का आर्टेमिस II मिशन 1 अप्रैल को लॉन्च होगा. यह 54 साल बाद इंसानों को चंद्रमा के पास ले जाएगा. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री 6 बड़े रिकॉर्ड बनाएंगे - पहला अश्वेत अंतरिक्ष यात्री, पहली महिला, पहला गैर-अमेरिकी, सबसे उम्रदराज व्यक्ति, पृथ्वी से सबसे दूर जाना और सबसे तेज री-एंट्री स्पीड. यह मिशन चंद्रमा की यात्रा को नया इतिहास देने वाला है.
नासा का आर्टेमिस II मिशन लॉन्च के लिए तैयार है. 1972 के बाद पहली बार चार अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और करीब 10 दिन में पृथ्वी पर लौटेंगे.
11 साल से हम लोग ज्यादा गर्मी झेल रहे हैं. बारिश के मौसम में गर्मी. सर्दी के वेदर में गर्मी. 2015 से 2025 तक पृथ्वी के लिए सबसे गर्म साल रहे हैं. 2025 तीसरा सबसे गर्म साल था. समंदर का तापमान हो या कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल, सब रिकॉर्ड तोड़ रहा है. इससे धरती की एनर्जी का बैलेंस बिगड़ गया है.