गुजरात के जामनगर में भारतीय वायुसेना का जगुआर फाइटर जेट क्रैश हुआ. हादसे में एक पायलट शहीद हो गया. इस फाइटर जेट का इस्तेमाल भारत ने कई जंगों में किया है. खासतौर से कारगिल में. आइए जानते हैं इसकी ताकत...
साहसी निजी अंतरिक्ष यात्रियों का एक जत्था अंतरिक्ष की सैर पर गया हुआ है. इनमें से ही एक ने साउथ पोल ऑर्बिट से पहली बार अंटार्कटिका का बेजोड़ वीडियो बनाया, जिसे एलन मस्क ने भी अपने अकाउंट से शेयर किया है.
स्पेस जाने वाली इन महिलाओं में कैटी पेरी के अलावा पत्रकार गेल किंग, नासा की पूर्व रॉकेट साइंटिस्ट आयशा बॉवे, बायोएस्ट्रॉनोटिक्स रिसर्च साइंटिस्ट और सिविल राइट एक्टिविस्ट अमांडा न्यूगेन, फिल्ममेकर कैरिन फ्लिन और जर्नलिस्ट एवं हेलीकॉप्टर पायलट लॉरेन सांचेज शामिल हैं. लॉरेज दरअसल जेफ बेजोस की मंगेतर भी हैं.
शुभांशु शुक्ला की भागीदारी ग्लोबल स्पेस रिसर्च में भारत की बढ़ती भूमिका को दिखाती है, जो राकेश शर्मा के नक्शेकदम पर चल रही है, जिन्हें 1984 में अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव हासिल है.
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने 2032 में पृथ्वी के पास से गुजरने वाले क्षुद्रग्रह 2024 वाईआर4 को देखा. उसकी गणना के अनुसार पृथ्वी सुरक्षित है, लेकिन चंद्रमा खतरे में हो सकता है. अगर चांद में कोई फर्क पड़ता है तो उसका असर धरती पर भी दिखाई देगा.
India Earthquake Risk: म्यांमार जैसे भूकंप का खतरा भारत में भी नकारा नहीं जा सकता, यह बात आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक ने कही है. उनका कहना है कि हमें बड़े भूकंपों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि भारत में जोन 5 को ध्यान में रखना चाहिए.
भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्षयात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर ने अंतरिक्ष से वापस लौटने के बाद पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की. देखिए क्या कहा…
अंतरिक्ष मे फंसे होने की वजह से मीडिया में चल रहे अलग-अलग तरह के नैरेटिव पर विलियम्स ने कहा कि यह एक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन प्रोग्राम था. हमें पता था कि चीजें गलत हो सकती है तो हम इसके लिए तैयार थे. बहुत सारे लोग प्रोग्राम पर नजर बनाए हुए थे. उन्हें पता था कि हमारी वापसी का सही वक्त कौन सा है. हम उसी फैसले का हम इंतजार कर रहे थे, जो बिल्कुल सही है.
सुनीता विलियम्स ने स्पेस से लौटने के बाद अपने पहले इंटरव्यू में कहा कि हमें घर पहुंचाने के लिए मैं नासा, बोइंग, स्पेसएक्स और इस मिशन से जुड़े सभी लोगों का आभार जताना चाहूंगी. हमें धरती पर लौटे हुए लगभग दो हफ्ते हो गए हैं. अब हमसे पूछा जा रहा है कि हम क्या कर रहे हैं? तो बता दूं कि हम नई चुनौतियों के लिए तैयारी कर रहे हैं. नए मिशन की तैयारी कर रहे हैं. मैं कल ही तीन मील दौड़ी हूं तो अपनी पीठ तो थपथपा ही सकती हूं.
Surya Grahan 2025 date, timing in India: कब लगेगा सूर्य ग्रहण? जानिए सूतक काल मान्य होगा या नहीं
बिग बैंग के बाद महज 30 करोड़ साल में बनी आकाशगंगा JADES-GS-z14-0 में ऑक्सीजन की अधिकता पाई गई है. अब सवाल यह उठ रहा है कि इतने कम समय में यहां ऑक्सीजन कैसे आया? वैज्ञानिक अबूझ पहेली में फंसे हुए है.
महीनों से स्पेस में फंसी सुनीता विलियम्स को वापस लाने में नासा के साथ एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने भी खूब काम किया. अब मस्क पूरी तरह से मिशन मार्स पर ध्यान दे सकते हैं. वे काफी समय से मंगल पर इंसानी बस्ती की बात करते रहे, और इसके लिए एक टर्म भी इस्तेमाल करते हैं- टाइप 1 सिविलाइजेशन. हम अभी टाइप जीरो पर ही हैं.