चीन के नास्त्रेदमस कहे जाने वाले जियांग ज्यूकिन ने ट्रंप द्वारा UFO फाइल्स जारी करने पर चेतावनी दी है कि इससे समाज बंटेगा और बड़े अत्याचार होंगे. उन्होंने लोगों को वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकने की चेतावनी दी.
तिब्बत के 5000 मीटर ऊंचे इलाके में फोटोग्राफर शूचांग ने हाई-स्पीड कैमरे से रेड स्प्राइट्स की शानदार तस्वीरें कैद कीं. ये ऊपरी वायुमंडल में तूफानों से बनने वाली बिजली हैं, जो लाल जेलीफिश जैसे दिखते हैं.
विश्व मौसम विज्ञान संगठन की नई चेतावनी ने दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा दी हैं. रिपोर्ट के अनुसार, अल-नीनो की परिस्थितियां तेजी से विकसित हो रही हैं और इसका असर वैश्विक मौसम पैटर्न पर पड़ सकता है. कई क्षेत्रों में तापमान बढ़ने, सूखे और असामान्य बारिश की आशंका जताई गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में मौसम से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं, जिसके लिए समय रहते तैयारी जरूरी होगी.
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने कन्फर्म किया है कि इस साल मजबूत अल-नीनो डेवलप हो रहा है. इससे दुनिया भर में गर्मी और सूखे का खतरा होगा. भारत में मॉनसून कमजोर होगा.
पूर्व अमेरिकी इंटेलिजेंस अफसर ने दावा किया है कि अलास्का, ऑस्ट्रेलिया, जिम्बाब्वे और पाइरेनीज के पहाड़ों में एलियंस के 4 सीक्रेट अड्डे हैं. ये ठिकाने UFO की मरम्मत, एलियंस के प्रवेश द्वार जैसे काम करते हैं.
दिल्ली गर्मी के बाद रात में खुद को ठंडा करने की क्षमता खो रही है. 25 मई 2026 को पिछले 14 साल की सबसे गर्म रात दर्ज की गई, जो गरीब लोगों के लिए जानलेवा हो रही है.
कांगो में इबोला के 'बुंडिबुग्यो' स्ट्रेन के 321 मामले सामने आने और 48 मौतों के बाद हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया गया है. नई वैक्सीन के लिए भारतीय कंपनी सहित 3 समूहों को 570 करोड़ रुपये मिले हैं.
मौसम विभाग के अनुसार अगले 2-3 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून केरल पहुंचेगा. अल-नीनो के असर के कारण इस साल कुल बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है. इससे कृषि क्षेत्र को दिक्कत हो सकती है.
ओले बड़े होते जा रहे हैं. अंगूर के आकार से लेकर बेसबॉल जितने. क्लाइमेट चेंज के कारण इनका आकार बढ़ रहा है. भारत में राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में भी ज्यादा खतरा है.
इस बार देश में बारिश कम हो रही है, लेकिन आंधी-तूफान और तेज हवाएं ज्यादा आ रही हैं. मुख्य कारण अल-नीनो, जलवायु परिवर्तन और वायुमंडलीय अस्थिरता है. इससे छिटपुट बारिश के साथ आंधियां बढ़ गई हैं.
दिल्ली में मई में जमीन का तापमान 60°C तक पहुंच रहा है. हीट मैप दिखाता है कि शहर का 76% क्षेत्र गंभीर हीट-स्ट्रेस में है. गरीब, मजदूर, स्ट्रीट वेंडर और झुग्गीवासी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.
व्हाइट हाउस ने एलियंस वेबसाइट लॉन्च की. हेडलाइन THEY WALK AMONG US के साथ एरिया 51 स्टाइल में शुरू होकर ये असल में अवैध प्रवासियों पर केंद्रित है. इमिग्रेशन सख्ती और गिरफ्तारियों को हाइलाइट करने वाला अभियान है.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 2026 के मॉनसून को लेकर नया पूर्वानुमान जारी किया है. इसके अनुसार, इस साल देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. जून से सितंबर के दौरान कुल वर्षा लंबी अवधि के औसत के 90 प्रतिशत तक रह सकती है. अल नीनो के प्रभाव और जून में कमजोर बारिश की आशंका ने किसानों और जल प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों की चिंता बढ़ा दी है.
दिल्ली-NCR में आज शाम से फिर तेज तूफानी हवाएं और गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट है. 50-70 किमी/घंटा तक हवाएं चल सकती हैं. मौसम विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है.
मौसम विभाग ने 2026 के मॉनसून का पूर्वानुमान जारी किया है. पूरे देश में बारिश सिर्फ 90% ही रहने की संभावना है. जून में सबसे कम बारिश (92%) होने की आशंका है.
उत्तर भारत में आज शाम से गरज-चमक के साथ बारिश और तेज धूल भरी आंधी का अलर्ट जारी किया है. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी UP में 70 किमी/घंटा तक हवाएं चल सकती हैं.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार अगले 5 साल में पृथ्वी कई बार 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा पार करेगी. गर्मी के रिकॉर्ड टूटेंगे. आर्कटिक तेजी से गर्म होगा. अमेजन में सूखा पड़ सकता है. प्राकृतिक आपदाएं आएंगी.
हिमाचल के कसौली में 15 घंटे से अधिक चली भयंकर जंगल की आग को भारतीय सेना और वायु सेना ने सफलतापूर्वक काबू कर लिया गया. हेलीकॉप्टरों ने बांबी बकेट से पानी डाला. उत्तराखंड में भी आग लगी है.
भारत में 4 में से 3 लोग अब 'आग की भट्टी' बने जिलों में रह रहे हैं. 57% जिलों (76% आबादी) में गर्मी का खतरा बहुत ज्यादा है. दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्य सबसे प्रभावित हैं.
नौतपा की तपिश अब कम होने वाली है. मौसम विभाग के अनुसार आज से वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव होने से उत्तर भारत में बारिश, आंधी और तेज हवाओं का नया दौर शुरू हो रहा है.
ISRO के चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने चांद के साउथ पोल पर सतह के नीचे 'वॉटर-आइस' दबे होने के पुख्ता संकेत का पता लगाया है. यह खोज माइनस 248°C तापमान वाले बेहद ठंडे और डार्क क्रेटर्स में एडवांस रडार तकनीक (DFSAR) के जरिए की गई है. चांद पर मौजूद इस बर्फ का इस्तेमाल आगे के मानव मिशनों में पीने के पानी, ऑक्सीजन और रॉकेट ईंधन बनाने के लिए किया जा सकेगा.