NASA के ह्यूमन रोवर एक्स्प्लोरेशन चैलेंज में पहली बार भारत के हाईस्कूल के बच्चों का रोवर भेजा जाएगा. ये रोवर तैयार किया है यंग टिंकर और नवोमेष प्रसार फाउंडेशन के युवा वैज्ञानिकों ने. ओडिशा के कटक स्थित इस संस्थान के बच्चों ने नासा के इस चैलेंज के लिए ऐसा रोवर तैयार किया है जिसे दो एस्ट्रोनॉट मिलकर चला सकते हैं. यह मंगल के ऊबड़-खाबड़ जमीन पर चलने के लिए बेहतरीन है. (फोटोः नवोमेष प्रसार फाउंडेशन)
यंग टिंकर और नवोमेष प्रसार फाउंडेशन (Young Tinker and Navonmesh Prasar Foundation) में ज्यादातर बच्चे हाईस्कूल के हैं. ये लोग NASA Human Rover Exploration Challenge 2021 में पहली बार शामिल हो रहे हैं. इस टीम को उम्मीद है कि ये नासा के चैलेंज में अवॉर्ड जीतकर लाएंगे. (फोटोः नवोमेष प्रसार फाउंडेशन)
नवोमेष प्रसार फाउंडेशन ने बताया कि हमें हमारे रोवर के सेलेक्शन को लेकर नासा से 6 नवंबर 2020 को चिट्ठी आई थी. फाउंडेशन के 10 बच्चों ने 8 महीने लगातार दिन-रात एक करके यह रोवर बनाया है. इनके रोवर का नाम है NaPSAT 1.0 है. इसका पूरा नाम है Navonmesh Prasar Student Astronomy Team. (फोटोः नवोमेष प्रसार फाउंडेशन)
HERC Fact: High school students are an integral part of #HERC. Each year, dozens of high school teams from around the launch into the world of engineering and take on the challenge. pic.twitter.com/AzIpKDcKti
— NASA Rover Challenge (@RoverChallenge) April 10, 2021
NaPSAT 1.0 का वजन करीब 65 किलोग्राम है. यह 4.5 फीट लंबा, 4.2 फीट ऊंचा और 4.4 फीट चौड़ा है. अगर यह रोवर चैलेंज जीतता है तो नासा के अर्टेमिस मिशन (Artemis Mission) के तहत चंद्रमा पर 2024 में भेजे जाने वाले प्रोग्राम का हिस्सा बनेगा. इसके बाद इसे अपग्रेड करके 2028 में होने वाले मंगल मिशन में भी भेजा जा सकता है. (फोटोः नवोमेष प्रसार फाउंडेशन)
NaPSAT 1.0 रोवर को इस तरह से बनाया गया है कि यह मंगल की पथरीली, ऊंची-नीची जमीन पर आसानी से चलाया जा सकता है. इस रोवर में एक खास तरह का क्रैंक आर्म सिस्टम है जो तीन गियर का उपयोग करता है. जबकि आमतौर पर ऐसे रोवर्स में 2 ही गियर का उपयोग होता है. (फोटोः नवोमेष प्रसार फाउंडेशन)
इस टीम ने रोवर में स्टीयरिंग के लिए बार्स का उपयोग न करके त्रिकोण प्लेट लगाया है. ताकि ताकत का बंटवारा सही तरह से हो. इस तरह के इनोवेशन की वजह से इस टीम का रोवर अब तक चैलेंज में चयन किए गए अन्य रोवर्स की तुलना में अलग और खास है. (फोटोः नवोमेष प्रसार फाउंडेशन)
𝗣𝗮𝘁𝗵-𝟭 𝗰𝗹𝗲𝗮𝗿... 𝗥𝗲𝗮𝗱𝘆 𝟭,𝟮,𝟯.. 𝗢𝗙𝗙!! 😎✌
— NaPSAT- Navonmesh Prasar Student Astronomy Team (@NaPSATindia) April 7, 2021
Our team testing the rover on various terrains to check the compatibility of the rover!
Putting through it's paces to launch the rover to it's heights! And it was amazing 😍😍!@RoverChallenge pic.twitter.com/0KxI5N59dM
NASA ने NaPSAT 1.0 के साथ इसे बनाने वाली टीम की फोटो भी अपने ट्विटर हैंडल से शेयर की है. इससे इस टीम के बच्चों का प्रोत्साहन हुआ है. इस टीम का कहना है कि हम सिर्फ 10 लोग नहीं है, हमारे साथ पूरे भारत के छात्रों का सपोर्ट है. इससे उन सभी छात्रों को प्रेरणा मिलेगी जो विज्ञान के लिए कुछ नया करना चाहते हैं. (फोटोः नवोमेष प्रसार फाउंडेशन)
इस टीम के एक सदस्य कैलाश ने बताया कि वो पहले अपने पिता की साइकिल मैकेनिक शॉप पर काम करते थे. अब वह इस टीम के लीडर हैं. इसी तरह बेंगलुरु के रहने वाले स्टूडेंट दाती दंडा वेल्डिंग का काम करते हैं. उन्होंने इस टीम के रोवर के ढांचे को जोड़ने और बनाने में महत्वपूर्ण किरदार निभाया है. इनके साथ मदद कर रही थीं रीना नाम की छात्रा. लेकिन जब रीना इस टीम में शामिल हुईं तो वो मैन्यूअल मेटल आर्क वेल्डिंग एक्सपर्ट के तौर पर जुड़ीं. (फोटोः नवोमेष प्रसार फाउंडेशन)
कोरोना महामारी की वजह से यह टीम इस बार अप्रैल में अलबामा नहीं जा सकी. इसके बावजूद इनके रोवर को नासा ने चुना है. उन्हें उम्मीद है कि अगर नासा का यह चैलेंज भारतीय टीम जीतती है तो इससे देश का नाम ऊंचा होगा और देश के अन्य बच्चों को ऐसे काम करने की प्रेरणा मिलेगी. (फोटोः नवोमेष प्रसार फाउंडेशन)
"The rover has been designed for Artemis Mission 2024 (Moon mission) where the first woman & next man will be sent to Moon. The rover is capable of travelling on different kinds of martian terrains," a member of NaPSAT said in Cuttack yesterday. https://t.co/iriREGkdd5
— ANI (@ANI) April 11, 2021