शार्क का नाम सुनते ही भयावह और शिकारी मछली की तस्वीर दिमाग में बनती है. बननी भी चाहिए...क्योंकि शार्क समुद्र की सबसे बड़ी शिकारियों में से एक है. लेकिन इसके अलावा दुनिया में शार्क की कई ऐसी प्रजातियां हैं, जिनके बारे में न तो आपने सुना होगा...न ही देखा होगा...क्योंकि ये बेहद विचित्र हैं. आइए जानते हैं ऐसी ही 20 विचित्र शार्क मछलियों के बारे में. उनकी तस्वीरों को देखते हुए जानिए उनकी खासियतें...(फोटोः गेटी)
20. हॉर्न शार्क (Horn Shark): रग-रग में भरा है आलस
हॉर्न शार्क (Horn Shark) को वैज्ञानिक भाषा में हेटेरोडोन्टस फ्रैंसिसि (Heterodontus francisci) कहते हैं. यह आकार में बेहद छोटी होती है. ये 40 फीट से ज्यादा गहराई में नहीं जा सकती. ये रात में अपने खाना खोजती हैं. ये बेहद आलसी शार्क होती है. बहुत आराम पसंद. कई बार तो ये गोता लगाने या तैरने के बजाय अपने फिन्स के जरिए पत्थरों के सहारे रेंगती हैं. इसके रेंगने की क्षमता ही इसे शार्क मछलियों की अन्य प्रजातियों से अलग करती है. (फोटोः गेटी)
19. पॉकेट शार्क (Pocket Shark): इनकी क्यूटनेस पर फिदा होते हैं लोग
पॉकेट शार्क (Pocket Shark) सिर्फ आपकी हथेली के बराबर ही नहीं होतीं. ये छोटी स्पर्म व्हेल जैसी दिखती हैं. इनकी क्यूटनेस पर लोग फिदा हो जाते हैं. वैज्ञानिक भाषा में इसे मोलिसक्वामा मिसिसिपिंयेंसिस (Mollisquama mississippiensis) कहते हैं. इसका आकार बीयर के केन जितना होता है. पॉकेट नाम इसलिए नहीं पड़ा कि ये जेब में रखी जा सकती है, बल्कि इनके पिछले फिन के पास एक पॉकेट बना होता है. वैज्ञानिक इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते क्योंकि ये बेहद दुर्लभ है. लेकिन इसके पॉकेट से फेरोमोन या प्रकाश छोड़ने वाला रसायन निकलता है. (फोटोः NOAA)
18. व्हेल शार्क (Whale Shark): आंखों के चारों तरफ होते हैं दांत
व्हेल शार्क (Whale Shark) अधिकतम 33 फीट लंबी हो सकती है. यह मछलियों की दुनिया की सबसे बड़ी मछलियों में शामिल हैं. असल में इस सूची में इसे शामिल करने की वजह इसकी लंबाई नहीं, बल्कि आंखों के चारों तरफ मौजूद दांत हैं. हैरान हो गए न. पिछले साल ही यानी 2020 में जापानी जीव विज्ञानियों ने व्हेल शार्क की आंखों के चारों तरफ डर्मल डेंटिकल्स यानी छोटे दांत खोजे थे. ये खबर Phys.org में प्रकाशित भी हुई थी. ये डर्मल डेंटिकल्स शार्क की आईबॉल को संभालती हैं और उन्हें सुरक्षित रखती हैं. ताकि इन बड़ी आंखों में कोई छोटा समुद्री जीव हमला न कर सके. (फोटोः गेटी)
17. गॉडजिला शार्क (Godzilla Sharks): गॉडजिला की तरह शक्ल
गॉडजिला शार्क (Godzilla Sharks) अब देखने को नहीं मिलती. क्योंकि ये विलुप्त हो चुकी है. ये प्राचीन शार्क की प्रजाति है. ये 30 करोड़ साल पहले उस समुद्र में मिलती थी, जहां आज न्यू मेक्सिको उभर कर बाहर आ गया है. गॉडजिला शार्क 6.8 फीट लंबी होती थी. इसका वैज्ञानिक नाम है हॉफमैन्स ड्रैगन शार्क या ड्रैकोप्रिसटिस हॉफमैनोरम (Dracopristis hoffmanorum). इसके ब्लेड जैसे दांतों के 12 लेयर होते थे. 2.5 फीट लंबे फिन्स होते थे. (फोटोः गेटी)
16. सुअर की शक्ल वाला शार्क (Pig-Faced Sharks): खतरे में है प्रजाति
सुअर की शक्ल वाला शार्क (Pig-Faced Sharks) को वैज्ञानिक भाषा में ऑक्सीनोटस सेंट्रिना (Oxynotus centrina) कहते हैं. इसके अलावा इसे एंगुलर रफशार्क भी कहा जाता है. इसकी शक्ल सुअर जैसी होती है क्योंकि इसके नथुने सुअर की तरह निकले होते हैं. पानी से बाहर निकालने पर यह सुअरों की तरह आवाज भी निकालती है. भूमध्यसागर के मछुआरे इसे पिग फिश भी कहते हैं. ये 3.4 फीट लंबी होती है. इसकी प्रजाति खतरे में हैं. (फोटोः गेटी)
15. गॉबलिन शार्क (Goblin Shark): इलेक्ट्रिक चार्ज को पहचानती है ये मछली
गॉबलिन शार्क (Goblin Shark) थोड़ी सी डरावनी दिखती है. इसे वैज्ञानिक भाषा में मित्सुकुरीना ओवस्तोनी (Mitsukurina owstoni) कहते हैं. गॉबलिन शार्क के दांत काफी ज्यादा नुकीले और आगे की तरफ से निकले होते हैं. इसका गुलाबी-बैंगनी रंग इसे अन्य शार्क मछलियों से अलग करता है. ये आमतौर पर 3930 फीट की गहराई में तैरती हैं. गॉबलिन शार्क कभी इंसानों के लिए खतरा नहीं रही हैं. इनके आगे निकले हुए नथुनों पर लोरेंजिनी नाम का छोटे-छोटे छेद होते हैं, जो हल्के से इलेक्ट्रिक चार्ज को भी पकड़ लेते हैं. ये चार्ज छोटे जीवों के शरीर से आते हैं. इनसे ही ये मछलियां अंदाजा लगाती हैं कि गहरे और अंधेरे समुद्र में खाना कहां है. (फोटोः गेटी)
14. कूकीकटर शार्क (Cookiecutter Sharks): सामने जो आए, उसे काटना ही है
कूकीकटर शार्क (Cookiecutter Sharks) को वैज्ञानिक भाषा में इसिसटियस ब्रैसिलिएनसिस (Isistius brasiliensis) बहुत बड़ी नहीं होती. ये आमतौर पर बढ़कर 20 इंच लंबी ही हो सकती है. लेकिन ये अपने सामने आने वाले किसी भी जीव को काटने के लिए हमला कर देती हैं. ये जिसे काटती हैं, उसका बड़ा मांस का हिस्सा निकाल लेती हैं. छोटे जीव तो सीधे चटनी बन जाते हैं. इस शार्क का नाम इसके जबड़े की वजह से ही पड़ा है. (फोटोः गेटी)
13. फ्रिल्ड शार्क (Frilled Shark): 8 करोड़ साल से जिंदा, 300 दांत जबड़े में
फ्रिल्ड शार्क (Frilled Shark) के शरीर पर बने झालर यानी फ्रिल्स ही खतरनाक होते हैं. ये किसी को भी मार सकते हैं. इस शार्क को वैज्ञानिक भाषा में क्लेमाइडोसिलेचस एंजुईनियस (Chlamydoselachus anguineus) कहते हैं. इसका ये कठिन नाम इसकी दांतों की वजह से पड़ा है. क्योंकि इस शार्क के मुंह में 300 दांत होते हैं. ये किसी फ्रिल की तरह मुंह में अरेंज होते हैं. ये शार्क मछली 5 फीट लंबी होती है. ये मछली शिकार के समय अपने वजन और दांतों का तगड़ा उपयोग करती है. ये कई बार अपने आकार से दोगुनी बड़ी शार्क का भी शिकार कर लेती है. ये शार्क मछली 8 करोड़ सालों से ऐसी की ऐसी ही है. ये 65 फीट से 4900 फीट की गहराई तक रहती है. ये अटलांटिक और प्रशांत महासागर में पाई जाती हैं. (फोटोः गेटी)
12. स्किनलेस ब्लैकमाउथ कैटशार्क (Skinless Blackmouth Catshark): नंगी शार्क भी कहते हैं इसे
स्किनलेस ब्लैकमाउथ कैटशार्क (Skinless Blackmouth Catshark) को साल 2019 में भूमध्यसागर से निकाला गया था. इसे नंगी शार्क भी कहते हैं. यह कोई नहीं प्रजाति नहीं है लेकिन इसकी त्वचा और दांत नहीं होते. इसे वैज्ञानिक भाषा में गैलियस मेलास्टोमस (Galeus Melastomus) कहते हैं. इसकी लंबाई 2.4 फीट होती है. इससे ज्यादा जानकारी वैज्ञानिकों के पास नहीं है. (फोटोः गेटी)
11. वाइपर डॉगफिश (Viper Dogfish): किसी और ग्रह से आई है धरती पर
वाइपर डॉगफिश (Viper Dogfish) का वैज्ञानिक नाम ट्रिगोनोगनैथस काबियेई (Trigonognathus kabeyai) है. वैज्ञानिक मजाक में कहते हैं कि ये किसी और ग्रह से धरती पर आई है. गहरे समुद्र में रहने वाली इस शार्क की खोज 1986 में की गई थी. लेकिन उसके बाद यह दुर्लभ तौर पर ही दिखाई दी है. ये 7 से 21 इंच लंबी होती है. ये रात में चमकती हैं. इनके शरीर में फोटोफोर्स नाम के अंग होते हैं, जो चमकने की प्रक्रिया को पूरी करते हैं. (फोटोः गेटी)
10. भूत शार्क (Ghost Shark): इसकी शक्ल कंकाल की तरह है
भूत शार्क (Ghost Shark) समुद्र में 1640 मीटर नीचे यानी करीब डेढ़ किलोमीटर नीचे रहती है. असल में ये नुकीली नाक वाली इस शार्क को ब्लू रैटफिश कहा जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम हाइड्रोलैगस ट्रोली (Hydrolagus trolli) है. इसकी शक्ल की वजह से इसे भूत शार्क या घोस्ट शार्क भी कहा जाता है. इस मछली को आधिकारिक पहचान 2002 में मिली थी. नर घोस्ट शार्क के सिर पर सेक्स के लिए अंग होता है, जिसका उपयोग सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने के लिए होता है. (फोटोः गेटी)
9. साइक्लोप्स डस्की शार्क (Cyclops Dusky Shark): एक आंख वाली शार्क
साइक्लोप्स डस्की शार्क (Cyclops Dusky Shark) को साल 2011 में कैलिफोर्निया की खाड़ी में कुछ मछुआरों ने पकड़ा था. इसका वैज्ञानिक नाम कैरचारहिनस ऑब्सक्यूरस (Carcharhinus obscurus) है. जब मछुआरों ने इसकी जांच की तो पता चला कि ये मछली गर्भवती है. लेकिन इसका भ्रूण कुछ अलग था. यह अल्बीनो थी. इसकी एक आंख थी. वह भी नथुने की ठीक ऊपर. (फोटोः गेटी)
8. जिनी डॉगफिश शार्क (Genie's Dogfish Shark): कार्टून की तरह बड़ी आंखें
जिनी डॉगफिश शार्क (Genie's Dogfish Shark) मेकिस्को की खाड़ी और पश्चिमी अटलांटिक में पाई जाती हैं. ये 20 से 28 इंच लंबी होती हैं. वैज्ञानिक भाषा में इन्हें स्क्वेलस क्लारके (Squalus clarkae) कहते हैं. इनकी आंखें इन्हें किसी कार्टून कैरेक्टर की तरह दिखाती हैं. इसलिए इन्हें जिनी डॉगफिश कहा जाता है. इनकी खोज साल 2018 में हुई थी. इसलिए अभी इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. (फोटोः गेटी)
7. स्वेल शार्क (Swell Sharks): पानी पीकर दोगुने आकार में सूज जाती है
शार्क को भी शिकार से डर लगता है. इसलिए स्वेल शार्क अपना ज्यादातर दिन का समय पत्थरों की बीच बनी दरारों में छिपकर बिता देती हैं. ये शिकारियों से बचने के लिए ढेर सारा समुद्री पानी पीकर दोगुने आकार में सूज जाती है. इसलिए इनका नाम स्वेल शार्क (Swell Shark) पड़ा है. ये आमतौर पर कैलिफोर्निया के तटों के नीचे और फिलिपींस के पास पाई जाती हैं. इनके सूजने की वजह से शिकारी इन्हें दरारों के बीच से खींचकर निकाल नहीं पाता. (फोटोः गेटी)
6. वेलवेट बेली लैंटर्नशार्क (Velvet Belly Lanternshark): पेट में लालटेन
वेलवेट बेली लैंटर्नशार्क (Velvet Belly Lanternshark) को वैज्ञानिक भाषा में एटमॉपटेरस स्पिनैक्स (Etmopterus spinax) कहते हैं. ये एक तरह की डॉगफिश हैं जो अटलांटिक और भूमध्यसागर की गहरे इलाकों में पाई जाती हैं. इनके शरीर से खासतौर से पेट वाले हिस्से से रोशनी निकलती रहती है. जो रात में दिखती है. या फिर गहरे अंधेरे समुद्र में. खतरा महसूस होने पर भी इनका लालटेन जलने लगता है. इनकी लंबाई 2 फीट तक होती है. इनका शरीर बेहद सख्त होता है, ताकि बड़े शिकारी इनका शिकार न कर सकें. (फोटोः गेटी)
5. फोबोडस शार्क (Phoebodus Shark): शार्क की नानी-दादी के जमाने की मछली
फोबोडस शार्क (Phoebodus Shark) 35 करोड़ साल पहले हमारे समुद्र में तैरा करती थी. यह चार फीट लंबी होती थी. यह शार्क मछलियों की नानी-दादी की कैटेगरी में आती है. इसके तीन भयानक नुकीले दांत होते थे. शरीर ईल जैसा लंबा होता था. इसके नथुने भी लंबे होते थे. ये फ्रिल्ड शार्क की तरह ही शिकार करती थी. इसके जीवाश्म से इतनी ही जानकारी मिल पाई है. (फोटोः यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख)
4. निंजा लैंटर्नशार्क (Ninja Lanternshark): तेज हमला खासियत
निंजा लैंटर्नशार्क (Ninja Lanternshark) को दो भाइयों ने खोजा था. दोनों भाइयों ने इसके शरीर के काले रंग और तेज हमले के पैटर्न को देख कर इसका नाम निंजा लैंटर्नशार्क रख दिया. इसके शरीर से हल्की रोशनी भी निकलती है. ये अधिकतम 1.6 फीट लंबी होती हैं. आमतौर पर मध्य अमेरिका के समुद्री तटों के नीचे पाई जाती हैं. (फोटोः गेटी)
3. वॉबेगॉन्ग शार्क (Wobbegong Shark): सतह के मुताबिक बदलती है रंग
वॉबेगॉन्ग शार्क (Wobbegong Shark) को देखकर लगता है कि ये कोई पुराना पत्थर या दरी है. ये आमतौर पर समुद्री सतह पर रहती है. ये सतह के मुताबिक अपने शरीर का रंग बदल लेती हैं. इस शार्क की दर्जनों प्रजातियां हैं. ये आमतौर पर पूर्वी हिंद महासागर और पश्चिमी प्रशांत महासागर में पाई जाती हैं. इनकी अधिकतम लंबाई 10 फीट होती है. (फोटोः गेटी)
2. ईगल शार्क (Eagle Shark): 9.3 करोड़ साल पहले समुद्र पर था राज
ईगल शार्क (Eagle Shark) का 9.3 करोड़ साल पहले समुद्र पर राज हुआ करता था. इसके फिन ईगल के पंखों की तरह लंबे होते थे. इसे वैज्ञानिक भाषा में एक्वीलोलाम्ना मिलारके (Aquilolamna milarcae) कहते हैं. इसके फिन 6.2 फीट लंबे होते थे. जबकि, इनकी लंबाई 5.5 इंच होती थी. ये जिस समुद्र में ज्यादातर तैरती थी, आज वहां पर मेक्सिको देश है. (फोटोः गेटी)
1. हेलीकोप्रियॉन शार्क (Helicoprion sharks): नाक नहीं भाला है
हेलीकोप्रियॉन शार्क (Helicoprion sharks) का नाक भाले की तरह नुकीला होता था. साथ ही इसके दांत इसके जबड़े के बाहर आरी की तरह निकले होते थे. इनके जीवाश्म पहली बार 1800 में उराल पहाड़ों पर मिले थे. ये प्रजाति खत्म हो चुकी है. ये 27 करोड़ साल पहले समुद्र में तैरा करती थी. इसकी लंबाई 25 फीट तक होती थी. (फोटोः गेटी)