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साइंस न्यूज़

बैटरी से चलने वाली ट्रेन का ट्रायल सफल, प्रणाली पर हो रहा विवाद

Battery Powered Train
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प्रदूषण मुक्त यात्रा के लिए जरूरी है कि जीवाश्म ईंधनों का उपयोग कम किया जाए. दोपहिया, कार, बस, जहाज और प्लेन के बाद अब बात चल रही है बैटरी से चलने वाली ट्रेन की. अमेरिका में जितने 4400 हॉर्सपॉवर के रेलवे इंजन हैं, वो सालाना 3.5 बिलियन गैलन यानी 1.59 करोड़ किलोलीटर डीजल का उपयोग करते हैं. इनसे भारी मात्रा में वायु प्रदूषण होता है. इसे कम करने के लिए अब बैटरी से चलने वाली ट्रेनों की उपयोगिता पर बातचीत चल रही हैं. (प्रतीकात्मक फोटोःगेटी)

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अमेरिका के बार्स्टो और स्टॉकटन के बीच BNSF ट्रेन कंपनी ने हाल ही में बैटरी संचालित इंजनों का उपयोग करके ट्रेन को दौड़ाया. इस प्रयोग के दौरान उन्हें बेहतरीन परिणाम मिले. बैटरी से चलने वाली ट्रेन में सपोर्ट के लिए डीजल इंजन लगाया गया था, लेकिन वह ऑन नहीं था. इससे उन्होंने 11 फीसदी ईंधन की बचत की और भारी मात्रा में प्रदूषण होने से रोका. लेकिन रेल एक्सपर्ट कह रहे हैं कि बैटरी पावर्ड इंजन के जरिए बुलेट ट्रेन को नहीं चलाया जा सकता. क्योंकि उसे बहुत ज्यादा ताकत की जरूरत होती है. (प्रतीकात्मक फोटोःगेटी)

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BNSF के प्रयोग से बैटरी चालित वाहनों की इंडस्ट्री में काफी ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है. क्योंकि इससे नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे खतरनाक प्रदूषण तत्वों में काफी कमी आती है. इस रेल कंपनी का कहना है कि वह बैटरी वाले इंजन को और सुधार रही है, इससे उन्हें 30 फीसदी ईंधन की बचत होगी. साथ ही वायु प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा कम होगा.  (प्रतीकात्मक फोटोःगेटी)
 

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उत्तरी पेंसिलवेनिया के लेक एरी के पास स्थित Wabtec के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर एरिक गेबहार्ट ने कहा कि हम इन बैटरी संचालित इंजनों की मदद से मालवाहक ट्रेनों को चला सकते हैं. इससे कुछ सालों में जीरो एमिशन लोकोमोटिव की संख्या बढ़ जाएगी. साथ ही प्रदूषण का स्तर भी काफी कम हो जाएगा. भविष्य में बैटरी और हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली ट्रेन ही एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं. हालांकि अभी यह नहीं पता कि इस टेक्नोलॉजी में कितनी लागत आएगी. (प्रतीकात्मक फोटोःगेटी)

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ट्रेनों के एक्सपर्ट माइकल इडेन कहते हैं कि अमेरिका के कैलिफोर्निया पोर्ट और रेल यार्ड्स में जल्द ही बैटरी संचालित ट्रेनों का परीक्षण किया जाएगा. कॉमर्शियल स्तर पर बैटरी लोकोमोटिव का खर्च कितना आएगा यह बता पाना अभी मुश्किल है, क्योंकि अलग-अलग ट्रेनों को अलग-अलग तरह के ताकत वाले बैटरी संचालित इंजनों की जरूरत होगी. ये वैसा ही है कि एक दिन इंसान मंगल ग्रह पर घर तो बनाएगा लेकिन उसमें कितना समय लगेगा, यह किसी को नहीं पता. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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अमेरिका में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में यातायात प्रणाली की 29 फीसदी हिस्सेदारी है. इस हिस्सेदारी का 40 फीसदी हिस्सा सिर्फ रेलवे का है. इनमें भी ज्यादा प्रदूषण कार्गो ट्रेन करती हैं. वहीं, प्रदूषण फैलाने के मामले में शहरी इलाकों में चलने वाले ट्रकों का भी योगदान है. सबसे ज्यादा प्रदूषण का स्तर आपको बंदरगाहों पर देखने को मिलेगा. क्योंकि यहां पर जहाज, ट्रेन और ट्रक तीनों तरह की यातायात प्रणाली का समावेशन होता है.  (प्रतीकात्मक फोटोःगेटी)

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यूएस बर्कले के हास स्कूल ऑफ बिजनेस के एनर्जी एक्सपर्ट और प्रोफेसर सेवेरिन बोरेन्स्टीन ने कहा कि रेल प्रणाली प्रदूषण कम करने के मामले में इतनी जल्दी विकसित नहीं हो सकती. क्योंकि ये दुनिया की सबसे प्रभावी यातायात और मालवाहक प्रणाली है. इसे चलाने के लिए भारी मात्रा में ईंधन की जरूरत होती है. हमें ये भी पता है कि प्रदूषण कम करना है लेकिन इतनी जल्दी सारी ट्रेनों को बैटरी से चलाना बहुत मुश्किल है. यह आर्थिक रूप से भी आसाना नहीं होगा. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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अमेरिका में 1.59 करोड़ किलोलीटर डीजल का उपयोग सालाना ट्रेनों के लिए होता है. यह मात्रा इतनी है कि इससे लॉस एंजिल्स से लेकर फीनिक्स तक 600 किलोमीटर लंबी, 10 फीट गहरी और 25 फीट चौड़ी नदी बनाई जा सकती है. अमेरिका में हर दिन 23 हजार लोकोमोटिव चलते हैं. इनमें से आधे सिर्फ कैलिफोर्निया में चलते हैं. अब ऐसे में सभी ट्रेनों में बैटरी ऊर्जा प्रणाली को विकसित करना आसान काम नहीं है. (प्रतीकात्मक फोटोःगेटी)

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