चीन ने पहली बार ऐसा यूरेनियम तैयार किया है, जो दुनिया के लिए नया और बेहद दुर्लभ है. यह यूरेनियम अब तक का सबसे हल्का परमाणु स्रोत है. चीन के वैज्ञानिकों ने यह काम दुनिया से छिपाकर किया है. साथ ही यह भी खुलासा नहीं किया गया है कि इस यूरेनियम का उपयोग वह किस तरीके से करेंगे. इस यूरेनियम का नाम है Uranium-214. जबकि, प्राकृतिक तौर पर मिलने वाले यूरेनियम को Uranium-238 कहते हैं. (फोटोःगेटी)
प्राकृतिक तौर पर मिलने वाले 99 फीसदी यूरेनियम-238 में 146 न्यूट्रॉन्स होते हैं, जबकि चीन ने जो यूरेनियम-214 बनाया है, उसमें सिर्फ 122 न्यूट्रॉन्स हैं. किसी भी एलिमेंट के आइसोटोप्स में प्रोटॉन्स की संख्या बराबर होती है. यूरेनियम के मामले में ये 92 फिक्स होते हैं. लेकिन न्यूट्रॉन्स की संख्या बदलती रहती है. यूरेनियम के आइसोटोप्स को उनके प्रोटॉन्स और न्यूट्रॉन्स की संख्या के आधार पर नाम दिया जाता है. (फोटोःगेटी)
चाइनीज एकेडेमी ऑफ साइंसेस (Chinese Academy of Sciences) के साइंटिस्ट झियुआन झांग और उनकी टीम ने नया और दुर्लभ यूरेनियम-214 बनाया है. इसे बनाने के लिए झियुआन झांग ने टंगस्टन के सैंपल पर ब्लास्टिंग की गई. उसपर आर्गन और कैल्सियम की बीम छोड़ी गई. जब दोनों के एटम फ्यूज्ड हो गए तब उन्होंने यूरेनियम-214 के कणों को उसमें डाला. इसके बाद इन्हें एक चुबंकीय यंत्र में डाला गया, जिसे सेपरेटर कहते हैं. (फोटोःगेटी)
Physicists have created a new and extremely rare kind of uranium https://t.co/bU4gSQfWm5 pic.twitter.com/DJuYeU9pok
— New Scientist (@newscientist) April 20, 2021
झियुआन झांग ने कहा कि ऐसे तत्वों के एटम का उत्पादन करना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है. क्योंकि यह जरूरी नहीं हर कोलिजन वहीं चीज उत्पादित करे जो हम चाहते हैं. झांग ने बताया कि हमने जो यूरेनियम-214 बनाया है, उसका रेडियोएक्टिवली खत्म होने का समय मात्र 0.52 मिलीसेकेंड हैं. जबकि यूरेनियम-216 और यूरेनियम-218 का 2.25 मिलीसेकेंड और 0.65 सेकेंड है. (फोटोःगेटी)
झियुआन ने बताया कि यूरेनियम-214 और यूरेनियम-216 का रेडियोएक्टिवली खत्म होने की प्रक्रिया को अल्फा डिके कहते हैं. यानी एक बार में दो प्रोटॉन्स और दो न्यूट्रॉन्स खत्म होते हैं. इसका मतलब ये है कि इन दोनों यूरेनियम में प्रोटोन्स और न्यूट्रॉन्स के बीच का संबंध बेहद मजबूत और ताकतवर है. (फोटोःगेटी)
झियुआन ने कहा कि हो सकता है कि हमारे प्रयोग के परिणाम शुरुआती हों लेकिन यह चीज तो पता चल गई है कि यूरेनियम-214 के प्रोटॉन्स और न्यूट्रॉन्स के बीच गहरा मजबूत और ताकतवर संबंध है. साथ ही अल्फा डिके होते हैं. हालांकि झांग ने यह नहीं बताया कि इस तरह के यूरेनियम का उपयोग चीन की सरकार किस तरह से करेगी. (फोटोःगेटी)