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साइंस न्यूज़

Comet Leonard Death: सबसे चमकीले धूमकेतु की हुई मौत, पिछले साल धरती के बगल से गुजरा था

Comet Leonard Death
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पिछली साल धरती के बगल से सबसे ज्यादा चमकीला धूमकेतु (Brightest Comet) गुजरा था. इसे लेकर वैज्ञानिक और अंतरिक्ष की दुनिया में रुचि रखने वाले लोग बेहद खुश थे. अब इस धूमकेतु ने सूरज की सबसे दूर वाली कक्षा को पार कर लिया है. यह लगातार और दूर होता जा रहा है. यह धुंधला हो गया है. यह अब धूल में बदल चुका है. असल में इस धूमकेतु की मौत हो चुकी है. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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इस धूमकेतु का नाम है कॉमेट लियोनॉर्ड (Comet Leonard). जिसे वैज्ञानिक भाषा में Comet C/2021 A1 (Leonard) बुलाया जाता है. वैज्ञानिकों ने देखा है कि इसके दो प्रमुख हिस्से यानी केंद्र (Nucleus) और कोमा (Temporary Atmosphere) यानी अस्थाई वायुमंडल पूरी तरह से बिखर गए हैं. वो लापता हो चुके हैं. धरती के दक्षिण गोलार्ध से देखने पर इसके अवशेष दिखते हैं...लेकिन ताकतवर दूरबीन की मदद से. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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Earthsky नाम की साइट के अनुसार इस धूमकेतु को खोजने वाले ग्रेगरी लियोनार्ड (Gregory Leonard) ने कहा कि Comet C/2021 A1 की लीगेसी अब खत्म होती दिख रही है. उसमें निश्चित समय अंतराल पर विस्फोट हो रहे थे. वह टूटता जा रहा था. ग्रेगरी लियोनार्ड ने इस धूमकेतु को 3 जनवरी 2021 को एरिजोना के टकसन स्थित कैटेलिना स्काई सर्वे के जरिए खोजा था. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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जब इसे खोजा गया था तब भी यह सूरज के सबसे नजदीकी प्वाइंट से बहुत दूर था. आखिरकार एक समय आया, जब यह धूमकेतु लियोनॉर्ड (Comet Leonard) धरती और शुक्र ग्रह की कक्षा से होते हुए वापस सूरज की ओर चला गया. ऐसी उम्मीद थी कि यह बिना किसी यंत्र की मदद से दिख जाएगा. लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया. हालांकि साल के अंत में इसे लोगों ने अपने छोटे-बड़े टेलिस्कोप से देखा. इसकी तस्वीरें शेयर की. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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धूमकेतु लियोनॉर्ड (Comet Leonard) ऊर्ट क्लाउड (Oort Cloud) से आया था. यह एक ऐसा इलाका है जो बर्फीले और पथरीले वस्तुओं से भरा हुआ है. यह क्लाउड धरती से सूरज की दूरी से 2000 गुना ज्यादा दूर हमारे सौर मंडल के बाहर स्थित है. धूमकेतु लियोनॉर्ड (Comet Leonard) उन 13 धूमकेतुओं में से एक है, जिन्हें पिछली साल दिसंबर तक खोजा गया है. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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मजेदार बात ये है कि धूमकेतु लियोनॉर्ड (Comet Leonard) धरती के इतनी नजदीक आ गया था कि आप इसे दूरबीन या टेलिस्कोप से देख सकते थे. यह 12 दिसंबर 2021 को धरती के सबसे नजदीक से गुजरा था. इसे सूरज के पास पहुंचने पर तेज चमक के साथ गर्म होना चाहिए था. इसके गैस और धूल सतह से बाहर निकलने चाहिए थे. लेकिन यह नवंबर 2021 से ही मद्धम होने लगा था. इसमें कार्बन डाईऑक्साइड की जगह पानी उबल रहा था. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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पहले लगा कि यह धरती के पास पहुंचने से पहले खत्म हो जाएगा. लेकिन यह फिर से जीवित हो उठा. चमकती हुई पूंछ बनाकर धरती के बगल से गुजर गया. यह पूंछ तब बनी जब सूरज से आने वाले आवेषित कण इसकी सतह से निकल रहे धूल और गैस से टकराए. 3 जनवरी 2022 को यह सूरज के सबसे नजदीक पहुंच कर अपनी दिशा से भटकने लगा. इसकी चमक फिर से कम होने लगी. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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23 फरवरी 2022 को चेक एकेडमी ऑफ साइंसेस टेलिस्कोप ऑरपरेटर मार्टिन मासेक ने देखा कि इसका केंद्र पूरी तरह से टूट गया है. वह गायब हो चुका है. हालांकि पिछले साल के अंत में यह टूटना शुरु हो गया था. लेकिन इतनी जल्दी 1.6 किलोमीटर व्यास वाले केंद्र के खत्म होने की उम्मीद नहीं थी. थोड़ी देर बाद ही अंधेरा हो गया और टेलिस्कोप की स्क्रीन पर किसी भी तरह के अवशेष नहीं बचे. धूमकेतु लियोनॉर्ड (Comet Leonard) लापता हो चुका था. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)

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