scorecardresearch
 
Advertisement
साइंस न्यूज़

Earth Core Temperature: ज्यादा तेजी से ठंडा हो रहा धरती का केंद्र, Mars बन जाएगी पृथ्वी!

Earths Core Cooling
  • 1/18

हमारी धरती तेजी से पथरीले ग्रहों के जैसी होती जा रही है. ये बुध या मंगल ग्रह की तरह बन जाएगी. वह भी उम्मीद से ज्यादा गति से. एक नए रिसर्च में पता चला है कि धरती का केंद्र यानी गर्म मैग्मा वाला इलाका अपनी तय गति की तुलना में ज्यादा तेज ठंडा हो रहा है. अगर ऐसा हो रहा है तो वैज्ञानिकों को फिर से धरती की परतों और उनकी गणित, केमिस्ट्री, जियोलॉजी आदि सब फिर से पढ़नी पढ़ेगी. आइए समझते हैं असल में धरती के केंद्र में हो क्या रहा है? (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 2/18

धरती के केंद्र के तेजी से ठंडा होने की प्रक्रिया को समझने के लिए वैज्ञानिक हमारे खूबसूरत ग्रह के कोर (Core) और मैंटल (Mantle) के बीच मौजूद खनिजों की थर्मल कंडक्टिविटी यानी ऊष्मीय चालकता की स्टडी कर रहे हैं. जितनी ज्यादा तेजी से कोर की गर्मी बाहरी परतों पर आएगी, धरती उतनी तेजी से केंद्र की गर्मी खोती चली जाएगी. गर्मी गई तो धरती का चुंबकीय क्षेत्र, गुरुत्वाकर्षण जैसी ताकतें खत्म हो जाएंगी. (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 3/18

इसे समझने के लिए स्विट्जरलैंड की राजधानी ज्यूरिख स्थित ETH और कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में एक एक्सपेरीमेंट किया. उन्होंने ब्रिजमैनाइट (Bridgemanite) नाम के खनिज पर अत्यधिक दबाव और गर्मी डाली. यह खनिज कोर और मैंटल के बीच की परत में पाया जाता है. इसके बाद उन्होंने ब्रिजमैनाइट की ऊष्मीय चालकता का अध्ययन किया. ताकि धरती के केंद्र में बढ़ रही ठंडक को समझ सकें. परिणाम हैरान करने वाले आए. (फोटोः गेटी)

Advertisement
Earths Core Cooling
  • 4/18

ETH के प्रोफेसर मोतोहिको मुराकामी ने बताया कि हमने देखा कि ब्रिजमैनाइट की ऊष्मीय चालकता उम्मीद से 1.5 गुना ज्यादा थी. मोतोहिको और उनकी साथियों की यह स्टडी हाल ही में अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंस लेटर्स जर्नल में प्रकाशित हुई है. मोतोहिको ने कहा कि इस स्टडी से हमें यह पता चला कि अब हमें धरती की उत्पत्ति को लेकर फिर से अध्ययन करना चाहिए. उसकी परतों को खंगालना चाहिए. क्योंकि धरती ठंडी हो रही है और उसका असर उन तरंगों पर पड़ रहा है, जो धरती से निकलती हैं. (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 5/18

मोतोहिको मुराकामी ने बताया कि अगर इसी तरह से धरती ठंडी होती चली गई तो यह बुध और मंगल ग्रह की तरह पथरीला ग्रह बन जाएगी. जो कि एक खतरनाक स्थिति होगी. हालांकि, मोतोहिको और उनके साथी यह बता पाने में असमर्थ हैं कि धरती कितने सालों में मंगल ग्रह की तरह बन जाएगी. लेकिन अगर ऐसा हुआ तो यह अलग तरह की तबाही होगी. चुंबकीय शक्ति खत्म होगी. गुरुत्वाकर्षण खत्म हो जाएगा. वायुमंडल खत्म हो जाएगा. इंसानों के शव अंतरिक्ष में बहने लगेंगे. (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 6/18

कुछ महीनों पहले एक स्टडी आई थी, जिसमें कहा गया था कि धरती का केंद्र यानी इनर कोर एक तरफ खिसक रहा है. इसकी स्टडी करने के लिए दुनिया भर के सीस्मोलॉजिस्ट (Seismologists) यानी भूकंप विज्ञानी, मिनरल फिजिसिस्ट (Mineral Physicists) यानी खनिज भौतिकविद और जियोडायनेमिसिस्ट (Geodynamicists) लगे हुए हैं. तीनों मिलकर भूंकपीय गतिविधि, भूकंपीय तरंगों और खनिजों के भौतिक विज्ञान का अध्ययन करके धरती के इनर कोर के व्यवहार को समझने का प्रयास कर रहे हैं. (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 7/18

माना जाता है कि धरती के इनर कोर लोहे का बना है. धरती का इनर कोर (Earth's Inner Core) बहुत तेजी से विकसित हो रहा है. लेकिन दिक्कत ये है कि ये एक तरफ फैल रहा है. वैज्ञानिकों को लगता है कि इससे वो इनर कोर की उम्र का पता लगा सकते हैं. साथ ही धरती के चुंबकीय शक्ति का इतिहास भी पता चलेगा. लेकिन इनर कोर के एक तरफ फैलने या विकसित होने से किस तरह की दिक्कत आएगी...इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है.  (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 8/18

धरती के बनने का इतिहास करीब 450 करोड़ साल पुराना है. उसका केंद्र यानी कोर करीब शुरुआती 20 करोड़ साल में बनना शुरु हुआ था. युवा धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति ने भारी लोहे धरती के केंद्र में खींच लिया. इसके बाद पथरीले और सिलिकेट खनिजों को ऊपर छोड़ दिया ताकि मैंटल (Mantle) और क्रस्ट (Crust) का निर्माण हो सके.  (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 9/18

धरती के निर्माण के समय काफी ज्यादा गर्मी पैदा हुई जो धरती के अंदर समाहित होती चली गई. लेकिन साथ ही चल रहे रेडियोएक्टिव निष्क्रियता की प्रक्रिया ने इस गर्मी को कम करने का काम भी किया. धीरे-धीरे हमारी धरती ने यह रूप लेना शुरु किया, जैसा कि अभी है. गर्मी कम होने की वजह से धरती के केंद्र से तरल लोहे का आउटर कोर (Liquid Iron Outer Core) बना. इसी की वजह से धरती का चुंबकीय क्षेत्र बना और काम करता है.  (फोटोः गेटी)

Advertisement
Earths Core Cooling
  • 10/18

जैसे-जैसे धरती ठंडी होती चली गई, टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) को ताकत मिली और उनके जुड़ने और टूटने से धरती पर कई महाद्वीपों का निर्माण हुआ. धीरे-धीरे धरती ठंडी होती चली गई. तापमान इतना कम हो गया कि लोहा अपने मेल्टिंग प्वाइंट पर आकर टिक गया. उच्च स्तर का दबाव बर्दाश्त करने लगा. इसके साथ ही इनर कोर का क्रिस्टेलाइजेशन (Crystallisation) शुरु हो गया.  (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 11/18

इस समय धरती के इनर कोर (Earth's Inner Core) का रेडियस हर साल 1 मिलमीटर की दर से बढ़ रहा है. यानी हर सेकेंड 8000 टन पिघला हुआ लोहा ठोस बन रहा है. भविष्य में करोड़ों साल बाद धरती का इनर कोर (Earth's Inner Core) ठोस लोहे में बदल जाएगा. इसके साथ ही खत्म हो जाएगी धरती की चुंबकीय शक्ति. फिर धरती पर क्या होगा.  (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 12/18

ऐसा माना जा सकता है कि धरती का इनर कोर (Earth's Inner Core) चारों तरफ से ठोस हो रहा है. लेकिन ऐसा है नहीं. 1990 में भूकंप विज्ञानियों ने देखा कि धरती के इनर कोर से टकराने वाली भूकंपीय लहरें या तरंगें एक समान नहीं हैं. इसका मतलब ये है कि धरती के इनर कोर के आकार में कहीं कोई असमानता है. या फिर एक तरफ बदलाव हो रहा है. जिसे आज ये कहा जा रहा है कि यह एक तरफ तेजी से बढ़ रहा है.  (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 13/18

धरती का इनर कोर (Earth's Inner Core) के चार हिस्से हैं. जो चारों दिशाओं में बांटे गए हैं. इसके पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के आकार में बदलाव आ रहा है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इनर कोर का पूर्वी हिस्सा एशिया (Asia) और हिंद महासागर (Indian Ocean) के नीचे है. दूसरा यानी पश्चिमी हिस्सा अमेरिका (US), अटलांटिक महासागर और पूर्वी प्रशांत महासागर के नीचे है.  (फोटोः गेटी)
 

Earths Core Cooling
  • 14/18

जब वैज्ञानिकों ने इनर कोर के पूर्वी और पश्चिमी छोरों के अध्ययन के लिए नए भूकंपीय आंकड़े जुटाए. उन्हें जियोडायनेमिक मॉडलिंग और उच्च दबाव में लोहे के व्यवहार को मिलाया गया. तब पता चला कि इंडोनेशिया के बांडा सागर (Banda Sea) के ठीक नीचे पूर्वी इनर कोर (Eastern Inner Core) तेजी से बढ़ रहा है. यह ब्राजील के ठीक नीचे मौजूद पश्चिमी इनर कोर (Western Inner Core) की तुलना में ज्यादा फैल रहा है.  (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 15/18

आप सोच रहे होंगे कि इससे होगा क्या? तो ऐसे समझिए की आपके फ्रिज के फ्रीजर में एक तरफ ज्यादा बर्फ जम जाए और दूसरी तरफ कम. यानी फ्रीजर में एक तरफ ज्यादा ठंडी हो रही है, दूसरी तरफ कम. ठीक इसी तरह यानी धरती का इनर कोर एक तरफ ज्यादा तेजी से ठंडा हो रहा है. दूसरी तरफ कम. भविष्य में यानी करोड़ों सालों में धरती के एक हिस्से से चुंबकीय शक्ति यानी मैग्नेटिक फील्ड खत्म हो जाएगी. यह धरती के आधे हिस्से में प्रलय ला सकता है.  (फोटोः गेटी)

Advertisement
Earths Core Cooling
  • 16/18

धरती का इनर कोर (Earth's Inner Core) का एक हिस्सा यानी पूर्वी हिस्सा अगर जल्दी से बढ़कर ठोस हो गया. तो उसके ऊपर की चुंबकीय शक्ति खत्म. इसका मतलब इंडोनेशिया समेत कई एशियाई देशों के ऊपर से गुरुत्वाकर्षण शक्ति खत्म. जीपीएस प्रणाली ठप. इंसान और जीव-जंतु हवा में तैरते नजर आएंगे. धरती के एक तरफ का समुद्र दूसरी तरफ भागने लगेगा. एशिया में बारिश नहीं होगी. इस तरह की दिक्कतें बढ़ जाएंगी. लेकिन घबराइए नहीं...यह प्रक्रिया इतनी जल्दी नहीं होगी. इसमें करोड़ों साल लगेंगे.  (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 17/18

नई स्टडी के लिए तैयार किए गए अध्ययन प्रणाली से वैज्ञानिकों ने धरती के इनर कोर (Earth's Inner Core) की उम्र पता की. नई गणना के अनुसार यह 50 करोड़ से 150 करोड़ साल के बीच है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इनर कोर का कम उम्र ही ज्यादा सही लगता है. यानी 50 करोड़ साल. जबकि, ज्यादा उम्र वाली संख्या यानी 150 करोड़ साल उसके चुंबकीय शक्ति की ताकत को विकसित होने का सबूत देता है.  (फोटोः गेटी)

Earths Core Cooling
  • 18/18

क्या होगा अगर धरती का इनर कोर पूरी तरह गोल न होकर किसी और आकार में हो जाए. या उसकी ताकत या क्षमता एक तरफ ज्यादा या कम हो. सौर मंडल में ऐसे कई ग्रह हैं, जिनका इनर कोर इसी तरह से है. मंगल ग्रह (Mars) के इनर कोर का उत्तरी हिस्सा निचला है, जबकि दक्षिणी हिस्सा पहाड़ी है. धरती के चांद (Moon) की बाहरी परत यानी क्रस्ट के नीचे इनर कोर का हिस्सा दूसरी तरफ से रासायनिक तौर पर अलग है.  (फोटोः गेटी)

Advertisement
Advertisement