scorecardresearch
 
Advertisement
साइंस न्यूज़

2016-17 में भी फैला था कोरोनावायरस, चीन ने नहीं दी थी दुनिया को इसकी जानकारी

Coronavirus China 2016-17
  • 1/14

कोरोनावायरस साल 2019 में नहीं फैला, इससे पहले भी चीन में उसने कई लोगों को बीमार किया था. लेकिन इसकी जानकारी दुनिया में कम ही लोगों को है. चीन ने ये खबर तब फैलने नहीं दी थी. ये बात है 2016 और 17 के बीच की. चीन में 25 हजार सुअरों के शावक मारे गए थे. जिसकी वजह थे चमगादड़ों से निकला कोरोनावायरस. ये कोरोना वायरस हॉर्सशू चमगादड़ों की देन था. इन्हीं चमगादड़ों की वजह से साल 2002 में सार्स नाम की बीमारी फैली थी. (फोटोःगेटी)

Coronavirus China 2016-17
  • 2/14

2016-17 में 25 हजार से ज्यादा सुअरों को जिन कोरोनावायरस ने मारा था उसका नाम था स्वाइन एक्यूट डायरिया सिंड्रोम कोरोनावायरस (Swine Acute Diarrhea Syndrome Coronavirus - SADS-CoV). इससे इंसान संक्रमित नहीं हुए थे लेकिन इसने सार्स की याद दिला दी थी, जिसकी वजह से 8000 लोग बीमार हुए थे और 774 लोगों की मौत हो गई थी. (फोटोःगेटी)

Coronavirus China 2016-17
  • 3/14

सार्स के केस चीन में साल 2004 के बाद से नहीं आए हैं. लेकिन गुआंगडोंग (Guangdong) प्रांत के चार सुअर फार्म पर SADS-CoV के केस आते रहे हैं. इसकी पहचान ईकोहेल्थ एलायंस, ड्यूक-एनयूएस मेडिकल स्कूल, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने मिलकर की थी. इसकी स्टडी के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीसेस ने फंडिंग की थी. इसकी रिसर्च साइंस जर्नल नेचर में भी प्रकाशित हुई थी. (फोटोःगेटी)

Advertisement
Coronavirus China 2016-17
  • 4/14

तब भी वैज्ञानिकों ने कहा था कि जानवरों में किसी वायरस को खोजना और उसके बारे में जानकारी हासिल करना बहुत जरूरी है. क्योंकि न जाने कब ये इंसानों पर हमला बोल दे. इसिलए ऐसे वायरसों से बचाव के लिए अध्ययन जरूरी है. लेकिन हुआ क्या चीन में इतने बड़े-बड़े दावे करने के बाद भी साल 2019 में वुहान से ही नया कोरोनावायरस निकला. आज उसकी वजह से न जाने कितने और कोरोनावायरस दुनिया में घूम रहे हैं. (फोटोःगेटी)

Coronavirus China 2016-17
  • 5/14

साल 2016 के अक्टूबर महीने के अंत में गुआंगडोंग प्रांस के फोशान में स्थित एक फार्म में SADS-CoV ने सुअरों को मारना शुरू किया था. पहले जीव विज्ञानियों को लगा कि ये पोर्सीन एपिडेमिक डायरिया वायरस (PEDV) है. PEDV ऐसा वायरस है जो सुअरों में पाया जाने वाला सामान्य कोरोनावायरस होता है. जनवरी 2017 तक सुअरों के PEDV के केस आने बंद हो गए. लेकिन सुअरों की मौत होती रही. (फोटोःगेटी)

Coronavirus China 2016-17
  • 6/14

तब वैज्ञानिकों ने फिर से जांच शुरू की. अलग-अलग जगहों पर घूम कर सुअरों के मौत की वजह की जांच शुरू की गई. तब मई 2017 में पता चला कि कोरोनावायरस के एक नए रूप (SADS-CoV) ने इन सुअरों को संक्रमित किया है. इसी वजह से ये मारे जा रहे हैं. वैज्ञानिकों ने मारे गए सुअरों की आंत से चमगादड़ों में मिलने वाले कोरोनावायरस को खोजा था. (फोटोःगेटी)

Coronavirus China 2016-17
  • 7/14

चीन के वैज्ञानिकों ने उस समय बताया था कि SADS-CoV का वायरस कभी भी रूप बदलकर दुनिया को परेशान कर सकता है. उस समय कलेक्ट किए गए 596 सैंपल्स में से 71 सैंपल में नया कोरोनावायरस था. उस समय 35 फार्म वर्कर्स की भी जांच की गई थी लेकिन उनमें से किसी को भी SADS-CoV का संक्रमण नहीं था. (फोटोःगेटी)

Coronavirus China 2016-17
  • 8/14

कोरोनावायरस (Coronavirus) के पहले प्रकार की खोज 1960 के दशक में हो गई थी. तब इसे ब्रॉन्काइटिस वायरस (Bronchitis Virus) कहते थे. यह वायरस तब मुर्गियों  में मिला था. इसके बाद इससे ज्यादा खतरनाक पीढ़ी इंसानों की नाक और गले में खोजी गई. (फोटोःगेटी)

Coronavirus China 2016-17
  • 9/14

इंसानों की नाक और गले में कोरोनावायरस (Coronavirus) के दो प्रकार मिले. इनका नाम है - ह्यूमन कोरोनावायरस 229ई (Human Coronavirus 229E) और ह्यूमन कोरोनावायरस ओसी43 (Human Coronavirus OC43). ये दोनों ही वायरस बेहद खतरनाक हैं. सामान्य सर्दी जुकाम से शुरु होकर घातक निमोनिया तक का रूप ले लेते हैं. (फोटोःगेटी)

Advertisement
Coronavirus China 2016-17
  • 10/14

इसके बाद कोरोनावायरस (Coronavirus) का सबसे ज्यादा खतरनाक रूप 2003 में सामने आया. इसे सार्स (SARS-CoV) कहा गया. इस वायरस की वजह से दुनिया भर में 8096 लोग संक्रमित हुए थे. इनमें से 774 लोगों की मौत हो गई थी. (फोटोःगेटी)

Coronavirus China 2016-17
  • 11/14

साल 2004 में कोरोनावायरस (Coronavirus) का नया रूप देखने को मिला. इसका नाम है ह्यूमन कोरोनावायरस एनएल63 (HCoV-NL63). ये वायरस नीदरलैंड्स के सात माह के बच्चे में मिला था. इसके बाद इस वायरस के संक्रमण की खबर पूरी दुनिया से आई. लेकिन इससे किसी के मरने की खबरें नहीं आईं. (फोटोःगेटी)

Coronavirus China 2016-17
  • 12/14

वर्ष 2005 में कोरोनावायरस (Coronavirus) का अलग रूप आया. जिसका नाम था ह्यूमन कोरोनावायरस एचकेयू1 (HCoV-HKU 1). इस वायरस का पहला पेशेंट था चीन के शेंनझेन का 70 वर्षीय आदमी. इसे बाइलेटरल निमोनिया हुआ था. इस वायरस के 10 शिकार ऑस्ट्रेलिया में मिले. लेकिन इससे किसी की मौत नहीं हुई. (फोटोःगेटी)

Coronavirus China 2016-17
  • 13/14

2012 में कोरोनावायरस (Coronavirus) ने मध्यपूर्वी एशिया में हमला किया. इसे सबसे पहले खोजा गया था सउदी अरब में. इसका नाम था मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस (MERS-CoV). 2015 में यह वायरस फिर फैला. तब इसने सउदी अरब, जॉर्डन, कतर, मिस्र, यूएई, कुवैत, तुर्की, ओमान, अल्जीरिया, बांग्लादेश, ऑस्ट्रिया, यूके, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, चीन और इंडोनेशिया में लोगों को संक्रमित किया. इसकी वजह से कुल 186 लोग बीमार पड़े और 38 लोगों की मौत हुई. (फोटोःगेटी)

Coronavirus China 2016-17
  • 14/14

वर्तमान कोरोनावायरस चीन के वुहान से फैला. इसकी वजह से अब तक दुनिया भर में 13.80 करोड़ लोग बीमार हुए हैं. जबकि, 29.71 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. इससे सबसे ज्यादा प्रभावित पांच देश हैं- अमेरिका, भारत, ब्राजील, फ्रांस, रूस और यूके. अमेरिका तो संक्रमितों और मरने वालों की संख्या में सबसे ऊपर है. (फोटोःगेटी)

Advertisement
Advertisement