चक्रवाती तूफान ताउते (Cyclone Tauktae) ने क्या नुकसान पहुंचाया, कितनी रफ्तार में आया और गया, किन-किन राज्यों में बर्बादी हुई...ये सारी बातें आपको पता ही होंगी. लेकिन आपको शायद ये नहीं पता होगा कि साइक्लोन ताउते आया क्यों? इसके आने की वजह जब वैज्ञानिकों ने जांची तो वो डर गए, क्योंकि जो काम अरब सागर और उत्तरी हिंद महासागर में पहले कभी नहीं हुआ, वो अब हो रहा है. समुद्र के अंदर हो रहे पर्यावरणीय बदलाव की वजह से आमतौर पर शांत रहने वाले हिंद महासागर और अरब सागर में इस समय अफरातफरी मची हुई है. आइए जानते हैं कि ये कैसी अफरातफरी है? (फोटोःPTI)
18 मई 2021, जब साइक्लोन ताउते ने गुजरात के तट को छुआ तब उस समय हवाओं की अधिकतम गति 220 किलोमीटर प्रतिघंटा थी. यानी किसी आम कार की अधिकतम स्पीड लिमिट तक. वहीं, हवाओं की ऐसी जानलेवा गति का सामना किया महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और लक्षद्वीप ने भी. इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेज बारिश भी हुई. इस तूफान की वजह से इन राज्यों में कुल मिलाकर 90 लोगों के मारे जाने की खबर है. (फोटोःAP)
साइक्लोन ताउते ने अरब सागर में एक नया क्लाइमेट ट्रेंड शुरू किया है. ये ट्रेंड क्या है, ये हम आपको बताएंगे लेकिन उससे पहले ये जान लीजिए कि अरब सागर आमतौर पर बंगाल की खाड़ी की तुलना में ज्यादा शांत रहता है. इसलिए ज्यादातर चक्रवाती तूफान बंगाल की खाड़ी में आते हैं न कि अरब सागर में लेकिन पिछले कुछ सालों से अरब सागर में साइक्लोन के आने की दर और उनकी तीव्रता व भयावहता बढ़ती जा रही है. इसकी वजह क्या है? (फोटोःPTI)
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटेरियोलॉजी (IITM) ने पर्यावरण वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कोल ने बताया कि बंगाल की खाड़ी की तरह अरब सागर गर्म नहीं है. जब बंगाल की खाड़ी में हर साल 2 या 3 चक्रवाती तूफान आते थे, तब अरब सागर में एक भी चक्रवात पैदा नहीं होता था. लेकिन अब ऐसा नहीं रहा. अरब सागर भी गर्म हो रहा है. जिसकी वजह से यहां पर ज्यादा तीव्रता के साथ चक्रवात आ रहे हैं. (फोटोःPTI)
IITM के शोधकर्ता विनीत कुमार सिंह ने बताया कि हमने अरब सागर पर स्टडी की तो पता चला कि पिछले 40 सालों में हर मॉनसून से पहले अरब सागर के तापमान 1.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है. यह वैश्विक गर्मी यानी ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हो रहा है. इसके अलावा हमने यह भी नोटिस किया है कि अरब सागर में चक्रवातों के आने की फ्रिक्वेंसी और तीव्रता लगातार बढ़ रही है. (फोटोःPTI)
When #CycloneTauktae hit the Indian state of Gujarat, it indicated the increased frequency and intensity of cyclones in the Arabian Sea.
— AGU's Eos (@AGU_Eos) May 27, 2021
Input from @rocksea and @vineet_tropmet, story by @rishpardikar. https://t.co/YfWtAfzCk6
वहीं, भारतीय मौसम विभाग के अनुसार साइक्लोन ताउते ने पिछले चार साल से (2018-2021) अरब सागर में लगातार आ रहे चक्रवातों में से एक है. ताउते ने पिछले 40 साल में पहली बार प्री-मॉनसून सीजन (अप्रैल-जून) में ऐसी तबाही मचाई है. अरब सागर में चक्रवातों की शुरुआत तो कमजोर स्तर से शुरू होती है लेकिन ये अचानक से बढ़कर अत्यंत गंभीर स्तर पर पहुंच जाती है. इसका उदाहरण साइक्लोन ताउते खुद है. आइए जानते हैं कैसे? (फोटोःPTI)
रॉक्सी मैथ्यू कोल ने बताया कि साइक्लोन ताउते की तीव्रता 24 घंटे में 55 किलोमीटर प्रतिघंटे तक बढ़ गई. इसे रैपिड इंटेसीफिकेशन (Rapid Intensification) कहते हैं. यानी पहले यह करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटे थी जो 24 घंटे में बढ़कर करीब 85 किलोमीटर प्रतिघंटे हो गई. इसके अलावा वैज्ञानिकों ने यह बात भी दर्ज की कि ताउते के पैदा होने से पहले अरब सागर यानी उत्तरी हिंद महासागर का तापमान औसत से 1.5 से 2.0 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो गया था. एक तो जमीनी सतह गर्म ऊपर से समुद्र का तापमान बढ़ने की वजह से साइक्लोन की ताकत और बढ़ गई. (फोटोःPTI)
अगर आप IPCC की पांचवीं एसेसमेंट रिपोर्ट देखेंगे तो उसमें भी लिखा गया है कि ग्रीनहाउस गैसों से निकलने वाली अतिरिक्त गर्मी का 93 फीसदी हिस्सा सागर सोखते हैं. ऐसा 1970 से लगातार हो रहा है. इसकी वजह से सागरों और महासागरों का तापमान साल-दर-साल बढ़ रहा है. ऐसे माहौल की वजह से ताउते जैसे ट्रॉपिकल यानी उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफानों की आमद बढ़ गई है. (फोटोःPTI)
ताउते जैसे चक्रवाती तूफान हमेशा सागरों के गर्म हिस्से के ऊपर ही बनते हैं, जहां पर औसत तापमान 28 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होता है. ये गर्मी से ऊर्जा लेते हैं और सागरों से नमी खींचते हैं. रॉक्सी मैथ्यू कोल की स्टडी के मुताबिक अरब सागर और हिंद महासागर का पश्चिमी हिस्सा पिछली एक सदी से लगातार गर्म हो रहा है. सागरों के गर्म होने का यह दर किसी भी अन्य उष्णकटिबंधीय इलाके से बहुत ज्यादा है. (फोटोःPTI)
रॉक्सी मैथ्यू ने बताया कि कोविड-19 महामारी की दूसरी भयावह लहर से जूझ रही भारत और राज्य सरकारों ने इस तूफान से निपटने की बेहतरीन तैयारी की थी. जिसकी वजह से जानमाल का नुकसान कम हुआ है. चक्रवाती तूफान का पूर्वानुमान बेहतरीन था. जिसकी वजह से राहत एवं आपदा के लिए काम करने वाली टीमों ने समय रहते लोगों को बचा लिया. जहां तक भविष्य में ऐसे तूफानों से जूझने की बात है उसके लिए भारत की सरकार को रिस्क एसेसमेंट पर काम करना होगा. ताकि तूफानों के आने से पहले नुकसान का अंदाजा लगाकर सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकें. (फोटोःPTI)
भारत को मैनग्रूव्स को बढ़ाना चाहिए. क्योंकि ये तूफानों के दौरान आने वाली बाढ़ और ऊंची लहरों से बचाते हैं. उदाहरण के लिए ओडिशा के भितरकनिका मैनग्रूव्स को देख लीजिए. इस मैनग्रूव्स ने 1999 में आए चक्रवात से उन गांवों के लोगों को बचाया जो इसके आसपास रहते थे. यहां अन्य जगहों की तुलना में कम नुकसान हुआ था. (फोटोःPTI)
साइक्लोन ताउते की वजह से गुजरात को काफी नुकसान उठाना पड़ा है. इस राज्य के पास देश का बड़ा तटीय वेटलैंड है. यहां पर कई संस्थाएं मिलकर मैनग्रूव्स को उगाने और उनके संरक्षण में लगी हैं. अगर जल्द से जल्द इन मैनग्रूव्स को फैलाया जा सके तो अगली बार किसी चक्रवाती तूफान से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है. (फोटोःPTI)