धरती पर तो आपने भूतों की कहानियां और अफवाहें सुनी होंगी. क्या अंतरिक्ष में नाचते हुए भूतों की तस्वीरें देखी हैं? यहां पर आप जो तस्वीर देख रहे हैं, वो 'नाचते हुए भूतों' (Dancing Ghosts) की ही तस्वीर है. जो सुदूर अंतरिक्ष में दो आकाशगंगाओं (Galaxies) के अगल-बगल दिख रहे हैं. साथ ही इनके पास ही एक बड़ा भयावह ब्लैक होल भी है. ऑस्ट्रेलिया के अंतरिक्ष विज्ञानियों ने जब दूरबीन से इसे देखा तो हैरान रह गए. उनकी समझ में कई बातें नहीं आई हैं. वो अब भी इन नाचते हुए भूतों पर अध्ययन कर रहे हैं. आइए जानते हैं कि इन भूतों का रहस्य क्या है? (फोटोः Jayanne English EMU Dark Energy Survey)
ऑस्ट्रेलिया की वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी (Western Sydney University) के स्कूल ऑफ साइंस के प्रोफेसर और अंतरिक्ष विज्ञानी रे नॉरिस ने बताया कि कुछ महीने पहले हमें फिलहाल असल में ये नहीं पता था कि ये नाचते हुई आकृतियां क्या हैं. दिखने में यह भूतों जैसे हैं. लेकिन अब हम हमनें यह पता कर लिया है कि इन आकृतियों के पीछे क्या है. ये कहां हैं? इनके आसपास क्या है? लगातार बदल रही इस नीली-हरी आकृति का निर्माण कैसे हुआ. ये कहां से आईं. ये कब तक इस तरह से यहां पर नाचती हुई दिख सकती हैं. या फिर ये हमेशा इसी तह से नाचती रहेंगी. खत्म होंगी कि नहीं. (फोटोः Jayanne English EMU Dark Energy Survey)
रे नॉरिस की यह खोज हाल ही में कॉस्मॉस मैगजीन में प्रकाशित हुई है. असल में ये 'नाचते हुए भूत' (Dancing Ghosts) दो रेडियो गैलेक्सी और ब्लैक होल्स के बीच फंसी इलेक्ट्रॉन्स के बादल (Cloud of Electrons) हैं. होता ये है कि जब ब्लैक होल इलेक्ट्रॉन्स की लहर फेंकता है, तो वे आकाशगंगाओं के बीच बहने वाली हवा में फंसकर अलग-अलग तरह की आकृतियां बनाने लगते हैं. जिसे देखने पर आप अपने अनुसार कोई भी आकृति का नाम दे सकते हैं. 'नाचते हुए भूतों' (Dancing Ghosts) की यह तस्वीर इवोल्यूशनरी मैप ऑफ द यूनिवर्स (EMU) प्रोजेक्ट का हिस्सा है. (फोटोः Jayanne English EMU Dark Energy Survey)
इवोल्यूशनरी मैप ऑफ द यूनिवर्स (EMU) प्रोजेक्ट के तहत अंतरिक्ष में मौजूद 7 करोड़ रेडियो स्रोतों का अध्ययन करना है. उनकी सही आबादी और संख्या का पता करना है. EMU प्रोजेक्ट में न्यू ऑस्ट्रेलियन स्क्वायर किलोमीटर एरे पाथफाइंडर (ASKAP) रेडियो टेलिस्कोप की मदद ली गई है. ताकि अंतरिक्ष की सुदूर गहराइयों में मौजूद इस तरह के जानी-अनजानी घटनाओं के बारे में ज्यादा जानकारी जमा की जा सके. रे नॉरिस कहते हैं कि जब इतने ताकतवर टेलिस्कोप से किसी और दुनिया में झांकते हैं, तो आपको कुछ नया ही देखने को मिलता है. (फोटोः गेटी)
इवोल्यूशनरी मैप ऑफ द यूनिवर्स (EMU) प्रोजेक्ट के तहत खोजे गए 'नाचते हुए भूत' (Dancing Ghosts) ही सिर्फ वैज्ञानिकों को हैरान नहीं कर रहे. कई अन्य अंतरिक्षीय वस्तुओं की भी खोज हुई है. एक स्थान पर रेडियो उत्सर्जन इतना ज्यादा है कि वहां पर इसका एक घेरा बना हुआ है. जो धरती से करोड़ों प्रकाश वर्ष दजूर है. इसे ऑड रेडियो सर्किल (Odd Radio Circles) नाम दिया गया है. अंतरिक्ष में हो रही यह प्रक्रिया कई सालों से वैज्ञानिकों के लिए पहेली बनी हुई है. इसका खुलासा वैज्ञानिक नहीं कर पा रहे हैं. (फोटोः गेटी)
'नाचते हुए भूत' (Dancing Ghosts) की रिपोर्ट जल्द ही पब्लिकेशन ऑफ द एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ ऑस्ट्रेलिया में भी प्रकाशित होने वाली है. नाचते हुए भूत और रेडियो के घेरे यानी ऑड रेडियो सर्किल्स बेहद दुर्लभ नजारे होते हैं. ये आमतौर पर अंतरिक्ष में नजर नहीं आते. वैज्ञानिकों ने 'नाचते हुए भूत' (Dancing Ghosts) के आसपास के इलाके को IC5063 गैलेक्सी नाम दिया है. यहां पर एक बहुत बड़ा रेडियो गैलैक्सी है. जिसके आकार को लेकर आजतक किसी वैज्ञानिक से शक जाहिर नहीं किया. (फोटोः गेटी)
This is stunning (and spooky)!https://t.co/bT1I1gTxHy
— Futurism (@futurism) August 8, 2021
'नाचते हुए भूत' जहां पर हैं, वहां सबसे बड़े रेडियो गैलेक्सी के साथ एक गैलेक्सी और है. इन दोनों के पीछे बड़ा सा ब्लैक होल है. जिससे निकलने वाली इलेक्ट्रॉन लहरें करीब 50 लाख प्रकाश वर्ष की यात्रा करके इन नाचते हुए भूतों जैसी आकृति बनाती हैं. न्यू ऑस्ट्रेलियन स्क्वायर किलोमीटर एरे पाथफाइंडर (ASKAP) रेडियो टेलिस्कोप दुनिया का इकलौता ऐसा टेलिस्कोप है जो इस तस्वीर को इतनी साफ तौर पर ले पाया. नहीं तो बाकी इसे इतना धुंधला दिखाते कि इसका पता भी नहीं चलता. (फोटोः गेटी)
आमतौर पर सुदूर अंतरिक्ष में रेडियो उत्सर्जन का सबसे बड़ा कारण होते हैं ये ब्लैक होल्स. जिन्हें ब्रह्मांड का शैतान भी कहा जाता है. ये अद्भुत तौर पर तेज रोशनी वाले सिग्नल फेंकते हैं या फिर उगलते हैं. साधारण रेडियो टेलिस्कोप इन बारीक और दूर स्थित रेडियो सिग्नलों को देख नहीं पाते. लेकिन न्यू ऑस्ट्रेलियन स्क्वायर किलोमीटर एरे पाथफाइंडर (ASKAP) रेडियो टेलिस्कोप इसे देखने में सक्षम है. यह कई करोड़ प्रकाश वर्ष की दूरी तक अंतरिक्ष में झांक सकता है. वहां की खबरें ला सकता है. वह भी धरती के दक्षिण हिस्से में तैनात होने के बावजूद. (फोटोः गेटी)
इवोल्यूशनरी मैप ऑफ द यूनिवर्स (EMU) प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2009 में हुई थी. EMU की टीम में 20 से ज्यादा देशों के 400 से ज्यादा वैज्ञानिक काम कर रहे हैं. अभी यह प्रोजेक्ट चल ही रहा है. यानी अभी ASKAP जैसे और दूरबीन बनाए जाएंगे, ताकि अंतरिक्ष की गहराइयों में देखकर हम ब्रह्मांड की उत्पत्ति से संबंधित जानकारियों को जुटा सकें. रहस्यों का खुलासा कर सकें. क्योंकि इंसानों को यह नहीं पता कि अंतरिक्ष में कहीं और जीवन है या नहीं. या सिर्फ धरती पर जीवन है. अगर धरती पर प्रलय आए तो क्या इंसान किसी और ग्रह पर जाकर रह सकता है. इसके लिए ब्रह्मांड की गहराइयों में इस तरह की खोज जारी रखनी होगी. (फोटोः गेटी)
अगले कुछ सालों में इवोल्यूशनरी मैप ऑफ द यूनिवर्स (EMU) प्रोजेक्ट और बड़ा हो जाएगा. इसके सारे डेटा को सार्वजनिक तौर पर रखा गया. आगे भी रखा जाएगा. हर नई जानकारी को लोगों को सामने पेश किया जाएगा. क्योंकि दुनिया के उनके ब्रह्मांड के बारे में जानकारी देने का काम ऐसी वैज्ञानिक संस्थाओं के वैज्ञानिकों का है. वो ये कहते हैं कि हम ऐसे जानकारियों से लोगों की नॉलेज बढ़ाना चाहते हैं. क्योंकि ये भविष्य के लिए जरूरी है. (फोटोः गेटी)